निगाहें आज भी उनकी याद में बेचैन रहती हैं,
ये दिल उदास रहता है जुबां खामोश रहती हैं,
जब मयस्सर दीदार उनका ख्वाब में होता है,
तब नींदें हराम होती हैं आंखें रो पड़ती हैं..!!
विरक्ति
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे
उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे
रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो...
उम्मीद अच्छी है,
पर हर किसी से नहीं...
कामयाबी में रफ्तार का होना बहुत जरूरी है
क्योंकि कछुआ सिर्फ कहानियों में जीतता है
बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है
सफर जारी रखो, वक्त बदलने वाला है।
यशवर्धन जैन
बाद में खुलकर जी लूंगा,
ये खुद को समझता रहा
जिम्मेदारियां आती रहीं
और शौक जाता रहा...
आदमी जब थक जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैआदमी जब उब जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैआदमी जब टुट जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैइसे दुसरे तरीके से कहें तोथके टुटे और उबे हुऐ आदमी कोसिर्फ स्त्रीयॉ बचाती हैं..!!
गुज़रता हुआ वक्त क्या क्या सिखा देता है.….. कभी हँसना तो कभी रोना सिखा देता है वक्त है कभी जहर पीना तो,कभी जख्म सीना सिखा देता है...!
तेरा वो #रूहानी सा लगने वाला इश्क़,
तेरी वो आग - ए - खास बातें,
तेरी वो सलीके वाली मुलाकातें. 💕
पेश आाना तेरा वो अदब से.. 🌿
हाय!! वो तेरी शरमाती सी आँखें... 👀🌹
इनको जेल भी भेजना चाहिए?
निलंबन तो छोटी बात है
रिश्तो से आजाद नखरो की गुलामी नहीं करता, मुंह पर सच बोलता हूं पीठ पीछे बुराई नहीं करता
बरसी हैं घटाएं आज फिर अंगड़ाइयां लेकर ,
नया सावन तो आया है मगर तन्हाईयां लेकर ..!!
उबाऊ से दिन, अज्ञात भविष्य और अनियमित नींद, दिन बीतते जाते हैं और कुछ भी नया नहीं होता…!!!
जिसके दिल में जगह ढूंढते रहे,उसने ही दिखाया कुआं था,मेरी वफा बेवजह हो रही है,इसका एहसास बाद में हुआ था..
कभी किसी को हैसियत से मत तोलो,
एक रुपए की मोमबत्ती भी खुद
मिटकर किसी घर को रोशन कर जाती है।
सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
न होना तड़प का सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर जाना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वह घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई...
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है..दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ….!!
इतना अजीब शख़्स हूँ कि मेरे साथ रहकरबिगड़े हुए सुधर गए सुधरे हुए बिगड़ गए