बाप गरीब जरूर है लेकिन इस बेटी के लिए ,
एक राजा की तरह सभी ख्वाइशें पूरी करता है ।।
एक तेरा दीदार मेरे सारे गमो को भुला देता है….
मेरी जिंदगी को जिंदगी बना देता है….!!
कर्म अगर अच्छा है तेरा
क़िस्मत तेरी दासी है
दिल है तेरा साफ़ तो प्यारे
घर में मथुरा काशी है!
गोपालदास नीरज
तुम्हें छूकर मैंने जाना
किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर
धरती कांपती क्यों है।
तुम्हें चूमकर मैंने जाना
छूइमूई के पौधे का रहस्य।
तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना
चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास।
तुमसे प्रेम करके मैंने जाना
मछुआरे और मछली के बीच...
वो मुझे भीख की तरह दे रहा था इश्क अपना,मैने भी अमीरों की तरह लेने से मना कर दिया
वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में
निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है..
प्रज्ञा शुक्ला
खुद की तलाश में हूं आजकल
मुझे आवारा कहने वालों तुम्हारी बात में दम है!
खामोशी से खत्म हुए रिश्ते,
मन में गहरा शोर छोड़ जाते हैं।
चार दिन बाज के ना उड़ने से
आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!
जम्हूरियत पर कस रहा फंदा
ख़ुद को ख़ुदा समझ रहा बंदा
बहलाया-फुसलाया, डराया भी
बॉन्ड से भी जुटा लिया चंदा
चुनाव की बिसात धर्म का दांव
नफ़रत का तूफ़ान कभी पड़े न मंदा
किसी को जेल इनके लिए खेल
इन पर भी चलेगा वक़्त का...
तुम्हारा इंतज़ार बिल्कुल वैसे ही करतीं हूँ, जैसे बचपन में करती थी पापा के दफ़्तर से लौट आने का ..!
मर्द कि मुस्कराहट उस वक्त गायब हो जाती हैं ,जब उसका बैंक अकाउंट और जेब दोनों खाली हो
भेदभाव देखें तो चुप न रहें।
चुप रहना बढ़ावा देना है।
गालों पर उंगलियों की छाप
पीठ पर लात जूतों की बरसात
होंठों पर दाँतों के निशान
मुख की कोरों से बहता रक्त
कानों में गूँजती
रिश्तों को शर्मशार करती
हुईं गालियाँ
'उन दिनों'.
उसकी टाँगों के नीचे
आने से मैंने मना क्या कर दिया
बस..
उसने एक चुटकी...
मैं अपने आप को इतना समेट सकता हूँ,
कहीं भी कब्र बनाओ मैं लेट सकता हूँ…!!
इतवार की सुबहइत्मीनान वालासुकून चाहती हूंकोई हो जग जाएमुझसे पहले मेरे लिएताकि सो सकूँ औरमेरी चिंता कर पाए।कहे सबसे धीरे सेसोने दो उसे ज़राथकी हुई सी आजउसे आराम जी भरतसल्ली से करने दोसोती रहूँ बेफिक्र सेकरे मेरी फ़िक़्र ज़राकहे सब...
सबूतों की जरुरत पड़ रही है..
यकीनन... दूरियां अब बढ़ रही हैं।
उसके दिल को भी आधार कार्ड से जोड़ दो, पता तो चले कितने खाते खुले हैं...
हर रात कि "सुबह" ऐसी चाहता हूं,कि मेरे उठते ही नज़र "तू" आ जाए,तेरी "मुस्कान" देख कर खोलूं मैं आंखें,और मुझे देखकर तू मेरी "बाहों" में समा जाए..!!