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शराब तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी, तुम एक शख्स के नशे में मरोगे..

मोहब्बत जुदाई बर्दाश्त कर सकती है , मगर बेइज्जती नहीं ...

जीवन की असली पढ़ाई,पढ़ाई खत्म होने के बाद सुरू होती हैं…

सबसे बेज़ार हो गया हूं मैं ज़ेहनी बीमार हो गया हूं मैं…!!! कोई अच्छी ख़बर नहीं मुझमें यानी अख़बार हो गया हूं मैं…!!!

सुनो साहिब, तुम्हारे प्रेम के रंगों से रंगीन हुआ मेरा बेरंग उदास सूना जीवन। जी नहीं सकती अब कभी भी तुमसे दूर रह मर जाऊंगी तुम्हारे बिन। ख्वाहिश नहीं मुझे ज्यादा चीजों की सिर्फ़ चूड़ियां कभी अपनी पसंद की पहना देना, पायल तो नहीं पहनूंगी तुमसे कदमों में अपने कभी तुम्हें नहीं झुकाना।

आदमी दुख में काम आना चाहिए, ख़ुशी में तों हिजड़े भी नाचने आ जाते हैं...

किस्मत का नहीं साहबसब मेहनत का खेल है!!

खता मत गिन इश्क़ में,किसने क्या गुनाह किया इश्क़ एक नशा था, तूने भी किया और मैंने भी किया !!

समस्या रोने-धोने से दूर नहीं होती। समस्या तब हटती है, जब आप बहादुरी से सामना करते हैं।

किसके लिए जन्नत बनाई है तूने ऐ खुदा, कौन है इस जहाँ में जो गुनहगार नहीं?

उसके घरवालों को कैसे समझाऊंजब वो फोन पर रोती है तो मेरा खून खौलता है..

होंगे तुम्हारे शहर में तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे , हमारे गांव में तो हमारी सादगी मशहूर है...

खामोशी गवाह है, इंसान अंदर से थक चुका है...

कुछ भी मेरा नही मेरे पास, ये बदुआये भी लोगों की दी हुई है..

बना कर मिट्टी के दिए जरा सी आस पाली है , मेरी मेहनत भी ख़रीदो लोगो मेरे घर भी दिवाली है ...

मैं निभाता रहा वफ़ा वो धूल झोंकती रही, फना करके मेरी रूह मुझे दफन करती रही..!!

बड़ा ही मुश्किल है उस वक्त में मुस्कुराना जब जिंदगी रुला रही हो कितना आसान है सब्र का टूट कर बिखर जाना जब जिंदगी इम्तहान ले रही हो चारो तरफ ही नज़रे फैलाते है की कोई तो उम्मीद बची हो और उस मझधार से निकालने के लिए...

जैसे जैसे उम्र गुजरती है हमें अहसास होता है कि माता पिता हर चीज़ के बारे में सही कहते थे!

हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी कुछ हमारी ख़बर नहीं आती

इन्सान की ख्वाहिशों की कोई इंतिहा नहींदो ग़ज़ ज़मीं भी चाहिए दो ग़ज़ क़फ़न के बाद


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