जिददी हूँ, गुस्से वाला हूँ, बतमीज़ हूँ, बेपरवाह हूँ,
लेकिन मैंने कभी किसी से रिश्ता मतलब के लिए नहीं रखा..!!
हर तुफान से टकराएं वो आंधी बनाऊंगा, नए अंग्रेज आएं हैं, नया गांधी बनाऊंगा
वो जो कभी रुक नहीं पायेतुम्हारी तोहमतों से भीवो जो चुपचाप चलते रहेसौंधी मुस्कान लिए
वही प्रेमी हैं ..!
-मनीषा शर्मा
आजादी का सबसे बड़ा दुश्मन,
संतुष्ट गुलाम है।
मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है।
मुंशी प्रेमचंद
इंसानियत की बातें सब करते हैं लेकिन
गुस्से में आते ही भूल जाते हैं, वो इंसान हैं।
गर शौक़ ज़िन्दा हैं ,
तो दिल आज़ाद परिंदा है..!!
वो करता है जब भी तारीफ़ मेरी... हाय,चेहरा मैं उसके सीने में छुपाती हूं..!!
बारिश में भीग मन बावलाधीरे-धीरे पट हृदय के खोल रहाआंखों से चूम तन बावलामृग कस्तुरी बन स्वच्छंद दौड़ रहा
कितनी मासूम है एक तरफ़ा मोहब्बत वैसे खेलता रहता है ... मैदान में बच्चा तन्हा
मेरे सपने में भी कभी ऐसा संयोग नहीं होताकोशिश करता हूं, पर मुझसे योग नहीं होता।
तारीफ़ें दिन बनाती हैं और ताने ज़िन्दगी।
इरादे अगर मजबूत हो तो नियति खुद ब खुद रास्ता बना देती हैं
पेट का कोई धर्म नहीं होता,राजनीति तो भरे पेट वाले ही करते हैं…
इल्तिजा करते हुए प्यासा परिंदा मर गया
अब तो दरिया को हया से डूब मरना चाहिए
राघवेंद्र द्विवेदी
अहंकार का बस इतना ही सच है
दिल से जुड़े रिश्ते भी खा जाता है।
सुलह कराने में लगा हूं
दिल और दिमाग के बीच
दिल मानता नहीं
दिमाग सोंचता नहीं
कुसुरवार दोनों हैं
दिल स्वीकारता नहीं
दिमाग जानता नहीं
मुद्दा जो था वो रहा नहीं
जाने से पहले दोनों से कुछ कहा नहीं
तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
मानता हूं मिजाज में सख्ती है मेरे मगर,
मैं इज्जत देने वालों की इज्जत करता हूं.
बेशक फलक तक साथ चलने कि दुआ कीजिए मगर
जो ज़िदा हैं ज़मीं पर पहले उनसे वफ़ा कीजिए