कर्म से डरिये…..ईश्वर से नहीं…..ईश्वर माफ़ कर देता है…..कर्म नहीं ….. !!!
बेचारगी पे मेरी उसे प्यार आ गया, शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ उसे भा गया
बालों के सफेद होने से लेकर चेहरे कि सिलवटें बनने तक,
तुम्हारा साथ चाहिए मेरी अर्थी के पास बैठकर रोने तक..!!
हर जगह इत्र हीं नहीं महका करते..!!
कभी-कभी शखिसयत भी खुशबू दे जाती हैं..!!
थक गई हूँ जिम्मेदारियों से,,ज़िंदगी मुझे चंद पल तू सुक़ून के उधार दे..!!
मेरे शब्दों का ज़िम्मेदार हूं
मैं, आपकी सोच का नहीं
तुम इस शहर की रिवायत से
अनजान हो मेरे दोस्त,
यहाँ याद रहने के लिए
पहले याद दिलाना पड़ता है.....
वक़्त ने फसाया है लेकिन मैं परेशान नहीं हूं,
हालातों से हार जाऊं मैं वो इंसान नहीं हूं !
ख़्वाहिशों पर पाबंदी ख़्वाबों पे पहरा है ,
कौन समझेगा दर्द मेरा कितना गहरा है।।
प्रार्थना और ध्यान बहुत ही जरुरी हैं !
प्रार्थना में भगवान आपकी बात सुनते हैं,
और ध्यान में आप भगवान की !
मिट्टी के हम चराग़ हैं यूं मत बुझा हमें ,
नादान -- तेरे ताक की रौनक हमीं से है
खता मत गिन इश्क़ में,किसने क्या गुनाह किया
इश्क़ एक नशा था, तूने भी किया और मैंने भी किया !!
गुस्से में केवल मेरे शब्द बदलते हैं
तुम्हारे लिए मेरा प्यार नहीं जान...
जिंदगी का खेल भी कुछ कबड्डी के खेल जैसा ही है ,सफलता की लाइन टच करते ही लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ...
बिन मेहनत तरक्की चाहकर,
रूपयों से खुशियां छांट लेते हैं,
स्वाभिमान बेचकर अपना,
वो किसी के भी तलवे चाट लेते हैं...
योग्यताएं कर्म से पैदा होती है,जन्म से हर व्यक्ति शून्य होता है...
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
फरक नहीं पड़ता दुनिया क्या सोचती है,मैं अच्छा हूँ ये मेरी माँ कहती है !
गालों पर उंगलियों की छाप
पीठ पर लात जूतों की बरसात
होंठों पर दाँतों के निशान
मुख की कोरों से बहता रक्त
कानों में गूँजती
रिश्तों को शर्मशार करती
हुईं गालियाँ
'उन दिनों'.
उसकी टाँगों के नीचे
आने से मैंने मना क्या कर दिया
बस..
उसने एक चुटकी...
खुद्दार दुश्मन के आगे नाक रगड़ देनामगर गद्दार दोस्त से फिर कभी हाथ मत मिलाना