रोने के लिए हम एकांत ढूँढ़ते हैं,
हँसने के लिए अनेकांत।
प्रेमचंद
अपनी किस्मत और लोगों कि गंदी नियत ताकने में,
एक बिटिया की उम्र गुज़र जाती है दरीचा झांकने में..!!
वादों की जरूरत नहीं होती उन रिश्तो में,,
जहां पर भरोसा अपने आप से ज्यादा होता है।।
जहां साधारण लोगों की हिम्मत टूट जाती है,
वहीं से इतिहास रचने वाले शुरुआत करते हैं
कर्ज़ लेकर परेशान वही होता है,जो कर्ज़ चुकाने की सोचता है….
हवा गुजर गई पत्ते हिले भी नही
वो मेरे शहर आए और हम मिले भी नही..!!
दिल में नहीं हम सीधे रूह में उतरते हैं,
जब भी करते हैं मोहब्बत बेशुमार करते हैं
बढ़ती हुई समझ,जीवन को मौन की ओर ले जाती है.!
ये जो मां की मोहब्बत होती है नायह तमाम मोहब्बतों की मां होती है..!!
किसी को इश्क़ विश्क करना हो तो बता देना,
आज और कल बिलकुल फ्री हूं मैं...
“प्रतिभा तो ग़रीबी ही में चमकती है दीपक की भाँति, जो अँधेरे ही में अपना प्रकाश दिखाता है।”
~ मुंशी प्रेमचंद
कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ हैवो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ हैयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ हैयही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है
-कैफ़ी आज़मी
बुराई पर अच्छाई की
असत्य पर सत्य की
अधर्म पर धर्म की
नफ़रत पर मोहब्बत की
जीत सदैव सुनिश्चित है
शायद तुम्हें कभी पता ना चले...
पर तुम्हारा ख़याल...
तुम्हारी परवाह...
मुझे अब भी है...
इत्र,परफ्यूम से सिर्फ़, लिबास मेहकता है, क़िरदार नहीं।
मज़दूर स्त्रियों के साथ अपने खेत में धान की रोपनी की..!
नेहा सिंह राठौर
धन न हो तो रिश्ते...
उंगली पे गिने जाते हैं....!!
जब कभी मुझे तुम्हारी याद आती हैं तो मैं नहीं देखती हमारी तस्वीरें,मैं पढ़ती हूं तुम्हारी लिखी कविताएं जहां मैं और तुम हमेशा साथ होते हैं !
सोने से पहले इक काम तुम कर देना. तक़लीफ देते हैं ख़्वाब आने से पहले जगा देना. ~ मालती
जिस दिन धरती से छिपकली, कॉकरोच और चूहे खत्म हो जाएंगे,उस दिन धरती पर स्त्रियों का पूर्ण शासन होगा.