कितना तकलीफ उठाकर कमाते है,,,
जब गाँव से कम उम्र के बच्चे शहर जाते है….
इजहारे ऐ इश्क महफिल में आंखों ही आंखों में बयां हो रहाकैसे बचाते दिल को जब #कातिल से ही इश्क हो रहा था !!
रील बनाने से पहलेवोट देकर भविष्य बना लो
सबको मेरे बाद रखियेगा.. आप सिर्फ़ मेरे हैं,याद रखियेगा…
आज ये दिल बेवजह ही खुश हैं
लगता है एक नया दर्द मेरे इंतजार में हैं
यदि लक्ष्य न मिले तो रास्ते बदलो लक्ष्य नहीं,
क्योंकि वृक्ष अपनी पत्तियाँ बदलते है जड़ें नहीं...
किसी के दुख पे अगर हम मलाल करते हैं ,
अजीब लोग हैं उल्टा सवाल करते हैं ।
🦋 देवदास 🦋
लहू में घरौंदा कर के
अहसास बैठे थे
नस नस से उभर कर
वो आज
तूलिका के द्वार से
फलक पर उतर रहे हैं
लोग ये समझ रहे हैं
मैं तेरी #तस्वीर बना रहा हूं
हकीकत में तो मैं
तूलिका की आंखों से
तुझे देख रहा हूं....
मैं कहां #तस्वीर...
रोयी भी हूँ रूठी भी हूँ ,
अकेले में टूटी भी हूं.
जिंदगी बस उन्हीं लोगों की रंगीन हैजो रंग बदलना जानते है
शीशे टूटने के बाद कहाँ जुड़ पाते हैं जो जुड़ भी जाए तो एक ही अक्स हज़ार नजर आते हैं।
जिंदगी का खेल भी कुछ कबड्डी के खेल जैसा ही है ,सफलता की लाइन टच करते ही लोग आपके पैर खींचने लग जाते हैं ...
गर खुद को
रखना है जवान
तो दिल को
सम्भाल कर रखिये
तजवीज ये ही
दिल को किसी ना किसी से लगा कर रखिये
सोचता हूँ कुछ “क़िस्से” कहूँ
फिर सोचता हूँ “किस से” कहूँ…
संघर्षो के दिनों में, तन्हा हर इंसान होता है।
साथ न कोई यार होता है, और न इतवार होता है।।
न्यूज़ देख रहा था
ना मुझे इजराइल से बैर है
ना फलीस्तीन से मोहब्बत
दोनो तरफ से मरने वालों की
संख्या बताई जा रही थी
जिसमे औरते मर्द मासूम थे
टूटते घर थे
कुछ लाशें थी
कहीं आग लगी थी
कहीं रुदन था...
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
अदब की बात है वरना मुनीर सोचो तो
जो शख़्स सुनता है वो बोल भी तो सकता है
मुनीर नियाज़ी
जब मुसीबत सर पर भारी हो,
तब सारे दांव फंस जाते हैं,
और जिनको समझते हैं हम घनिष्ठ,
अक्सर वही डंस जाते हैं..!!