हम भी दरिया हैं,हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ता हो जाएगा.
बशीर बद्र
लोगों को खिलाना अच्छा है,
अपने अहंकार को खिलाना बुरा है...
जब तक मन में खोट और दिल में पाप है !
तब तक बेकार सारे मंत्र और जाप है !
आजादी का सबसे बड़ा दुश्मन,
संतुष्ट गुलाम है।
बहुत महंगा पड़ता है वो रिश्ता, जिसमे खुद को सस्ता कर दिया जाए...
चुपके से भेजा था गुलाब उसे...खुशबु ने पूरे मोहल्ले मे शोर मचा दिया...
शाख से टूटे हुए फूल ने सबक दिया, ज्यादा अच्छे बनोगे तो लोग तोड़ देगें..
ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं,
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं.
आलोक श्रीवास्तव
याद रखना सपने तुम्हारे है तो पुरे भी तुम ही करोगे , न तो हालात तुम्हारे हिसाब से होंगे और न ही लोग !
ये मेरा इश्क औरों जैसा नहीं…अकेले रहेगें पर तेरे ही रहेगें…!!
तमन्ना है की हर तमन्ना में तू रहे….
तुझमें मैं रहूं और मुझमें हमेशा तू रहे
नाराज़ हो जाते हैं अब वो साहब
जब जवाब हम उन्हें उनके ही लहज़े में देते हैं
तुम रूठना
तो ऐसे रूठना
जैसे माॅं रूठती ही
माॅं मेरी
सुबह की बात
शाम तक भूल जाती है...
सपना गर्ग
सम्मान सबका मगर इज्जत उतनी,जितनी सामने वाला करे...!!
अपनी ज़िंदगी की तारीफ तब भी करो..
जब वो तुम्हे कुछ ना भी दे रही हो...!!
सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जां कहते हैं,
हम जो अपने मुल्क की मिट्टी को भी #माँ कहते हैं...
कुछ ख़्वाब तुमनें तोड़ दिए..और कुछ हमनें देखने छोड़ दिए..!!
दूरियां बढ़ाता दौलत का घमंड भी एक दिन खाक हो जाएगा,
ये रूह भी साथ छोड़ देगी, जिस दिन जिस्म राख हो जाएगा..!!
लहू रिसने नही देता कभी जो अपने अंदर से ,ज़माना सोचता है वो ज़ख़्म ताज़ा नहीं होता!बस आंखों की उदासी खोलती है राज ए दिल वरना ,मेरे चेहरे से मेरे गम का अंदाज़ा नहीं होता!
बीते मीठे लम्हों का है जो आसराहसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरातेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरातुझसे ही जाने क्यूँ मेरा है ऐसा राब़्ताचादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासलेतेरे पास ना होने का करे हर पल...