आखिर में ज़िंदगी चंद सवाल,
और कुछ जवाब बनकर रह जाती हैं...
बोध हो तो सभी बातें रहस्यपूर्ण हैं ।
वृक्ष से एक सूखे पत्ते का गिरना भी ।
सारे फरिश्ते मुझे ही मिले हैं ज़िंदगी में,
कोई गलती करता ही नहीं, मेरे सिवाय...
दूसरों की आंखों में आंसू लाने वाले ये क्यों भूल जाते हैंकि भगवान ने दो आंखें उन्हें भी दी हैं और कर्म समय चक्र के साथ घूमकर एक दिन हमारे समक्ष अवश्य आते हैं।
पानी अगर शांत हैं तो,
गहराई से मज़ाक नही करते...!
दोनों भाई बहनों को ऊंट भी चाहिए और राजस्थान भी नहीं जाना चाहते..शास्त्रों में इसे ही कूटनीति कहा गया है…
जीवन में हमेशा इंतजार ही नही करना चाहिए,क्योंकि सही वक्त कभी नही आता,उसे लाना पड़ता है !
जिन्हें तकदीर रुलाना चाहे ,उन्हें बेक़दरों से इश्क़ हो जाता है.
देश से बड़ा कुछ नही है,देश हित में मतदान जरूर करें...!
तू बन जा गाली बनारस की मैं शाम तलक..
कष्टों में रोने, और प्रसन्नता में गले लगने को,
कम से कम एक कंधा तो सुरक्षित रहना चाहिए !!
चले जाना चाहता हूँ
बहुत दूर...
जहाँ कोई भी न हो!
चले जाना चाहता हूँ
उन बर्फीली पहाड़ियों के अनज़ान सफ़र पर
जिसका कोई अंत न हो!
मैं ख़ुद को भी भूल जाना चाहता हूँ!
परिन्दों की तरह सब कुछ छोड़
आसमां में उड़ना चाहता हूँ!
तेरे हुस्न को परदे की क्या जरूरत,,,
कौन होश मे रहता है तुझे देखने के बाद,,,
मोटिवेशन वाली वीडियो देख करआदमी 10-15 मिनट ही मोटीवेट रहता है।।
पता नहीं नसीब खराब है या मैं खराब हूं
हर उसने दिल दुखाया हैं जिसपे मुझे नाज था !!
मैं ढूंढती हूं खुद में...खुद को ही,शायद मैं वो नहीं जो हुआ करती थी..!!
हम ज़ाहिल लोग हैं,
आज भी हमें झुमके और
काली बिन्दी
ही पसंद आती है ।
अज्ञात
जिनको मेरी कदर नही अब मुझे भी,उनकी फिकर नही !
अब आग माचिस से नहींलोगों की बातों से लगती है…!!
मैंने झूठ के बहाने नहीं बनाए,
इसलिए भी हम बहुत ज़्यादा उसको नहीं भाए,
मेरा सच ही मेरी ज़िंदगी है,
जिसको निभाना है निभाए,
जिसको नहीं निभाना ना निभाए.