गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है
मैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है
ना दोस्त, ना मसीहा और ना ही किस्मत ने साथ दिया था,
खुली किताब सा लड़का मैं जिसे इश़्क़ ने बर्बाद किया था..!!
उन रिश्तों का खत्म हो जाना ही बेहतर है, जहां दुख और अपमान के सिवा कुछ न मिले...
अरमान सिर्फ उतने ही अच्छे है जहाँ,
स्वाभिमान गिरवी रखने की जरूरत ही ना पड़े…!!
उम्मीद ना कर किसी से इस दुनिया में हमदर्दी की...
बड़े प्यार से जख्म देते है शिद्दत से चाहने वाले...!!
तबियत की बात है जनाब , वर्ना जबाब ऐसे दूं कि सवाल ही पैदा ना हो ।।
देखने के लिए सारा आलम भी कमचाहने के लिए एक चेहरा बहुत
इन्तज़ार मत करो
जो कहना है कह डालो
क्योंकि हो सकता है
फिर कहने का कोई अर्थ न रह जाय...!!
"जिन्हें ईश्वर ने हृदय और परख दी है,
वे आदमियों की पोशाक नहीं देखते,
उनके गुण और चरित्र देखते हैं।"
मुंशी प्रेमचंद
दूरियां बढ़ाता दौलत का घमंड भी एक दिन खाक हो जाएगा,
ये रूह भी साथ छोड़ देगी, जिस दिन जिस्म राख हो जाएगा..!!
जिंदगी में हर मौके का फायदा उठाओ
लेकिन किसी के विश्वास का बिल्कुल नहीं...
बेशक उठाओ उंगली मेरे किरदार परमगर शर्त ये है कि उंगली बेदाग होनी चाहिए
कभी खामोश…कभी गमगीन,कभी सैलाबनजर आती है…ये जिंदगी भी कलाकार हैंशायद हर रोज नया किरदार निभाती है
चिंता से चतुराई घटे, दु:ख से घटे शरीर।
पाप से लक्ष्मी घटे, कह गये दास कबीर।।
हमें भी इश्क़ के मारों पे रहम आता है ,
ये बोझ वो है जिसे हमनें भी उठाया है ।।
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे
'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
इलाज़ ना ढूंढ तू इश्क़ का, वो होगा ही नहीं, इलाज़ मर्ज़ का होता है इबादत का नहीं..!!
मैं और मेरा रेड कार्पेट
अक्सर ये बातें करते हैं
तू होता तो ऐसा होता
तू होता तो वैसा होता
तू बीच की रेत पे बिछता, तू गार्डन में फैला होता
तू समंदर के तल पे लेटकर मेरी ईगो सहला...
मत कर यकीन यहां पर, पल भर की मुलाकात पर, जरूरत ना हो तो लोग सालों के रिश्ते भूल जाते हैं!!