उम्मीदों के जंजाल में उलझे हुए हैं,अपनी ही आंखों में खोए हुए हैं…
मुझे मौत का खौफ ना दीजिए
मौत भी "शर्म से मुंह छुपाए" बैठी है.......
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"मौत" भी मुझे इतना, तड़पा ना पाती
जितना "ज़िंदगी मुझे तड़पाए" बैठी है.....!!
सबसे ख़तरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
न होना तड़प का सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर जाना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वह घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई...
जहाँ प्यार के नगमे गूँजते थे
वह बाँसुरी जाने कहाँ खो गई!
अमृता प्रीतम
मुझे क्या आई फ्लू होगा ,
मैं पहले ही उसके प्यार में अंधा हु..
मर्दों ने युद्ध जीते, धरती जीती, समुद्र जीता, आसमान जीता...
औरतों ने मेकअप किया और मर्द को ही जीत लिया...
ना दशहरा ना होली ना दिवाली होता हैं,
बेरोज़गारो का त्योहार नौकरी होता हैं...
जीवित लोगों से अधिक फूल प्राप्त होते है मृत लोगों को,क्योंकि…आभार से अधिक ताकतवर है अफ़सोस।
क्रोध सदैव दूसरे को कम
और
स्वयं को ज्यादा हानि पहुंचती है !!!
समझौते ही करने होते तो व्यापार करते
ना समझ थोड़े ही है जो तुझसे प्यार करते
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट रही है
देखूँ तो एक शख्स भी मेरा नहीं हुआ..!!
दिल लगा कर ठुकराए हुए लोग हैं हम..
अफ़सोस कीजिए, किनारा कीजिए, सबक लीजिए..!!
दो चार मिस यूनिवर्स तो उस पर यूँ ही कुर्बान कर दूँ,
आपने देखी कहा है साड़ी मे तस्वीरें मेरी जान की ..
जहाँ तक मुमकिन था मै तुम्हारे पीछे भागा, अब इस से आगे तुम्हारी बदनसीबी है..
सिर्फ़ पोस्ट पढ़ने का ही रिश्ता न रखिए हमसे...
कभी चाय+नाश्ते के लिये भी बुलाया करो हमें..!!
भाई को डांटती हुई बहन से खूबसूरत दृश्य भला और क्या हो सकता है
तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....
कांटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़वाये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में 🎼