न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
ये जो तुम कहते हो कोई नहीं अपना,कभी ख़ुद से पूछो क्या तुम किसी के हो पाये.
तुम्हारा "तुम" कह कर रोज़ झगड़ना,
तुम्हारा "आप" कह कर बिछड़ने से अच्छा था...!!
चाहे राजा हो या किसान, वह सबसे ज़्यादा सुखी है जिसको अपने घर में शान्ति प्राप्त होती है।
बीते मीठे लम्हों का है जो आसराहसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरातेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरातुझसे ही जाने क्यूँ मेरा है ऐसा राब़्ताचादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासलेतेरे पास ना होने का करे हर पल...
एक”मरहम”की …तलाश में कई “ज़ख्मों”से ….गुज़रे हम
हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते !
पा तो लिया इंसाँ ने दोनों ही जहाँपर इंसाँ में इंसाँ ही बाकी न रहा
एक दुःख को कम करने में एक सुख नहीं लगताबल्कि एक दुःख दूसरा लगता है
इंसान के झूठ का मजा तब आता है जब हमे सच्चाई पहले से पता हो ..!!
कुछ लोगों को उम्र नहीं..जिम्मेदारियां समझदार बना देती हैं..!!
ज़िंदगी की धूप-छाँव में,
संघर्ष है, सफ़र है, जीने का अद्भुत अंदाज़ है।
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
ज़िन्दगी के "पन्नों" में मेरा किरदार भी "जोकर" का रहा,
मैं "हंसा" तो भी लोग हंसे मैं "रोया" तब भी लोग हंसें..!!
जिंदगी शिकायतो को लेकर पीछे पड़ा है
और मेरा हौसला मुस्कुराने की जिद लिए बैठा है..!!
मोहब्बत आसान होता तो तुम भी करते,
जीना पड़ता है इसमें ,मरते-मरते.
सुरमे की तरह पीसा है हमें हालातों ने,
तब जा के चढ़े है लोगों की निगाहों में..!!
फूल जैसी होती है , वफ़ा की तासीरख़त्म होते ही , मिट्टी में अपनी खुशबू छोड़ जाती है …
बहुत कम लोग है जो मेरे दिल को भाते है,और उससे भी कम लोग मुझे समझ पाते है।
लिख देने से, कह देने से,
बोझ कहां ख़त्म होते हैं ...