प्रेम सरल है.. जटिल उसे अपेक्षाएं बना देती हैं..!!
परिवार और समाज दोनों ही बर्बाद होने लगते हैंजब समझदार मौन और नासमझ बोलने लगते हैं।
हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते !
पवित्रता किस को रास आती है यहाँ जनाब ,
सब के सब "जिस्म"के कीचड़ में "इश्क़"ढूंढते हैं.
किसी को इश्क़ विश्क करना हो तो बता देना,
आज और कल बिलकुल फ्री हूं मैं...
प्यार हो या परिंदा, दोनों को आज़ाद छोड़ दो... अगर लौट आया तो तुम्हारा और अगर न लौटा तो वह तुम्हारा था ही नहीं कभी...
मनचाहे शख्स के पास ,
सारे जहां का सुकून होता है...
वक्त तो आने दो हम तुम्हे,बताएंगे तूफान कैसे आता है !
पिता वो दुआ है जो हर किसी के हिस्से नहीं आती।
जिसके आती है उसकी कोई ख़्वाहिश अधूरी नहीं रहती।।
गहरे दु:ख हमेशा
नि:शब्द और मौन होते हैं !
दिल बड़ा रखो
हैसियत छोटी भी होगी तो चलेगा
चढ़ते सूरज के पुजारी तो लाखों हैं 'फ़राज़'डूबते वक्त हमने सूरज को भी तन्हा देखा
~ अहमद फ़राज़
दिल के रिश्ते तो किस्मत से मिलते हैं,वरना मुलाकात तो हजारों से होती है !!
लिखें वही जिसके नीचे अपने हस्ताक्षर कर सकें …..
सोचे वही जो बेहिचक बोल सकें …..
और बोलें वही जिसका जवाब सुन सकें !!!
औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है
हजारो विकल्प होते हुए भी, "किसी एक पर अडिग रहना ही " प्रेम " है।
सुलझी सी कविताएँ लिखते हैं, ख़ुद में ही उलझे से लोग..!
यूँ भी हयात में है, जवानी की अहमियत
जैसे शदीद प्यास में पानी की अहमियत
रफ़्तार में रहें न रहें और बात है
लेकिन है ज़िंदगी में रवानी की अहमियत
लोगों ने सिर्फ़ सुन के, बजा दी हैं तालियाँ
किरदार को पता है कहानी...
लहरों का शोर नहीं, सागर का 'शान्त' सुनो
जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो
प्रह्लाद पाठक
वैसे तो बहुत बुरा हूॅं मैं लेकिन दो चेहरे नहीं रखता !!