दर्पण देख सँवर गए कितने
अपने पर ही मर गए कितने
ख़्वाबों की खेती को सच के
कीट-पतंगे चर गए कितने
प्यार वफ़ा ईमान की बातें
करके लोग मुकर गए कितने
फ़ाइलें सब्ज़ योजनाओं की
चूहे रोज़ कुतर गए कितने...
मुजरिम हो गया इस कद्र खुद की नजरो में
स्वाभिमान छोड़ प्रेम ढूंढ रहा था पत्थरों में
तुमसा कोई प्यारा,कोई मासूम नही है,क्या चीज हो तुम, खुद तुमको मालूम नही है
सफलता डिग्री नहीं....
हुनर मांगती है...!!
कलियुग है करेला बनो..मिठाई बनोगे तो मिट जाओगे..!!
कुछ होगाकुछ होगा अगर मैं बोलूँगान टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता कामेरे अंदर एक कायर टूटेगा -टूट मेरे मन टूटएक बार सही तरहअच्छी तरह टूटमत झूठमूठ - ऊब मत रूठमत डूब, सिर्फ टूट
~ रघुवीर सहाय
बहुत आसान नहीं थानज़दीकियों का फ़ासलामीलों तय किया हैअपनों को अपना समझते समझते!
बातों की उम्र घट सी गई है,,
कभी तुम नहीं मिलते,,
कभी मैं खो जाती हूं,,
पुरुष पेड़ पे लगे उन पत्तो कि तरह होते है,
जिन्हे धूप तो मिलती है पर छाँव नहीं..
कोई व्यक्ति कितना ही ख़ास क्यों न हो,
उसे एक पल में त्यागने कि क्षमता तुम्हारे भीतर अवश्य होनी चाहिए।
जिंदगी का सबसे कठिन काम है,
सही इंसान की पहचान करना....
वफ़ा की उम्मीद एक बेवफ़ा से लगाई है, मैने अपनी अर्थी अपने ही हाथों से सजाई है
जिसे आपके गुस्से की परवाह नहीं, यकीं मानो उस व्यक्ति को तुमसे कोई लगाव नही॥
सपने में बिछड़े हुए लोगों का मिलना ,
डेटिंग का सबसे दर्दनाक रूप है...!!!
जिंदगी में आप जितनी बार प्रयास करेंगे..
उतनी ही बार आप कुछ नया प्राप्त करेगे..!!
दुनिया की सबसे खतरनाक नदी हैं,भावना जिसमें सारे बह जाते हैं…