World's Best Cow Hospital

मेरे घर की दीवारें बवाल कर रही हैं , मैं क्यूं अकेला हूं सवाल कर रही हैं...

रिश्तों को वक्त दिया जाता है.. बहाने नहीं..!!

क्यों अपना दर्द महफ़िल में सुनाया जाए चलो मुस्कुरा कर सबका दिन बनाया जाए आभा

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते अटल बिहारी वाजपेयी

अपनी शरारतों से भी हृदय प्रफुल्लित कर देते हैं, बच्चे शैतानी कर के भी आकर्षित कर लेते हैं..!!

तू रूह में शामिल है मेरी आती जाती साँसों की तरहजिस पल भूलूँगी तुझेवो लम्हा मेरा आखिरी होगा

मुकम्मल नहीं हुआ "इश़्क़", इसलिए आज "शायर" बना बैठा हूं, अपने कल के "हालातों" से हार कर, मैं आज "कायर" बना बैठा हूं, और हर "कसौटी" पर खरी उतरी वो, तो "मोहब्बत" को क्या दोष देते, मैं खुद "मुकद्दर" से चोट खा कर, आज यहां "अधमरा" बैठा...

पिता सी ही महफ़ूज़ जिन हाथों में होती है कलाई नारी के लिए वो शख्स महज़ होता है उनका भाई।

जब हृदय जलता है तो वाणी भी अग्निमय हो जाती है !!!

माटी कहै कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय। इक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगीं तोय॥ कबीरदास

ये दो शब्द जीवन को नष्ट कर देते है..पहला "अहम" और दूसरा "वहम"…!!

तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे यूँ दुआएँ मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो

बेवजह खुश रहो... वजह महंगी है.....!!

क्या मनाउ होली.. कैसे मनाउ जश्न... जब फिलिस्तीन के.. बच्चो के जिस्म पर है.. खुन निकलता जख्म

जमाना वो आ गया है की.. जहर एक देता है जहरीले सभी लगने लगते है..!!

कोई ऐसी कला, कोई विधा, कोई शब्द, कोई गुण कोई आचरण बना ही नही जिससे कोई भी अनमना न हो, जिससे किसी को भी शिकायत न हो.

मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे

यादें दस्तक देती हैं आँखें नम हो जाती हैं होठ खामोश रह जाते हैं दिल की धड़कनें शोर बहुत मचाती हैं मधुलिका

सब बीत जाता है पल हो दिन हो महीना हो या फिर हो साल जो नहीं बीतता वो है सिर्फ़ तेरा ख़्याल

कौन आगे है, कौन पीछे इससे मुझे क्या? मेरा मुकाबला ख़ुदसे है, औरों से नहीं।


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