मन में कुछ "भरकर" जिएंगे तो...
"मन भरकर" नहीं जी पाएंगे...!!
पहले डर लगता था कि लोग क्या कहेंगे
अब डर लगता है कि कहीं मैं ही ना उन्हें सुना दूं..
चाय में अपना भी एक हुनर हैजो पास नही होता उसको भीखींच लाती है यादों मेंअपने साथ हर शाम
मित्रता बड़ा अनमोल रतन
कब उसे तोल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ जाय अगर बैकुंठ हाथ
उसको भी न्योछावर कर दूँ,
कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
सिर लिए स्कंध पर चलता हूँ,
उस दिन के लिए मचलता हूँ,
यदि चले वज्र दुर्योधन...
मरना यहाँ
बहुत है आसान
ज़िन्दगी जीना है
हिम्मत का काम
हथियार रख
मैदान छोड़ना है आसान
संघर्ष पथ पर चलना है
हिम्मत का काम
रोते रोते बिखरना और
टूट जाना है आसान
मुस्कुराते हुये गिरना और संभलना है
हिम्मत का काम
मरना यहाँ
बहुत है...
मंदिर बहुत बना लिया,
अब एक लंका भी बना दो,
जहा सीता जैसी बहन बेटी सुरक्षित रह सके ....!
अगर कोई हमेशा आपको व्यस्तहोने का दिखावा करता है तो वहव्यस्त नही किसी और के साथ मस्तरहता है, कितना भी याद कर लोकितना भी जता लो एक दिन खुदको ही लगेगा कि अब अपना रास्ताअलग ही सही है सूचना जनहित...
थोड़ा डुबूंगा, मगर मैं फिर तैर आऊंगा ,
ऐ ज़िंदगी,
तू देख, मैं फिर जीत जाऊंगा...
अनुभव पहला या आखिरी नहीं होता,
हर अनुभव बस नया होता है....
सितमगर हो तुम खूब पहचानते है
तुम्हारी अदाओ को हम जानते है
दगा बाज़ हो तुम सितम ढाने वाले..
मेरे मसले अलग है दुनियां से मैं सबसे ज्यादा अपने में ही उलझी हूं
औकात जो नाप रहे हो ज़ुबान की धार से ,
ज़रा ख़ुद में झाँक लो ज़मीर के दीदार से...
आज वो मेरे कफ़न का पूरा इंतज़ाम कर के आयी हैं, सुना है मेहंदी पर किसी और का नाम लिखा कर आयी हैं..!!
खामोशी जुर्म है इस दौर में बोलना सीखो..
वरना मिट जाओगे हालातों के तूफानों में..!!
ग़मज़दा हैं वो तो बेशक गुफ़्तगू भी न करें ..पर करम इतना तो हो कि सामने बैठा करें … !!
ज़रूरतें तो फिर भी मान जातीं हैं
भूख के पास मगर होता नहीं दिमाग़
जिंदगी में विनम्र रहिए मगर,
अपनी कीमत से बेखबर नहीं।।
वक़्त चलता गया पानी के नज़ारों की तरह चाहे कितना किया कश्ती से किनारा हमने याद है शाम वो ठहरी तेरी पहली वो नज़र तब से खोई है हर इक साँस हमारी हमने
आती है जब याद तेरी तोतेरी यादों में हम खो जाते हैंआजकल तुझे सोचते-सोचते ही,हम सो जाते हैं।
पटाखा न,आइटम न,मिर्ची न सेटिंग, वो लड़की ग़ज़ल है, ग़ज़ल ही रहेगी.