"पड़ते जिस ओर चरण मेरे
भूगोल उधर दब जाता है।"
दिनकर जी
प्यार की गिनती नही आती मुझे..तुझसे जो हुआ है अनंत हुआ है…!!
मत सोचो जिंदगी बोझ है...
खुश रहो क्योंकि समस्या तो रोज है..!!
अधूरापन कभी खत्म ही नहीं होता,
कभी आंखें नहीं होती तो कभी काजल..!!
रास्ते ख़ूबसूरत हो तो मंज़िल की परवाह क्यूँ करनादिल में अगर सुकून हो तोबेचैनियों की फ़िक्र क्यूँ करना
फूल जैसी होती है , वफ़ा की तासीरख़त्म होते ही , मिट्टी में अपनी खुशबू छोड़ जाती है …
बोध हो तो सभी बातें रहस्यपूर्ण हैं ।
वृक्ष से एक सूखे पत्ते का गिरना भी ।
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
शराब तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी,
तुम एक शख्स के नशे में मरोगे..
कीचड़ में पत्थर नहीं मारा जातासूखने का इंतज़ार किया जाता है
हज़ारों जताने वालों सेएक निभाने वाला बेहतर है..!!
उसने लिखी मेरी लिए कई ग़ज़लें ढेरों कविताएँ ख़ूबसूरत नज़्में मगर मैंने सिर्फ़ उसका नाम लिखा दिल पे और अपना बना लिया
सब गुज़र तो जाता है,
मगर सब भुलाया नहीं जाता...
खिलाफ कितने हैं क्या फर्क पड़ता है
साथ जिनका है वो लाजवाब हैं
घटी कमाई, बढ़ गए खर्चे गली-गली बदलाव के चर्चे
सुनो कृष्ण!!मौसम हरे रखनाऔर मन गीला
हंसने की आदत डाली है,
खुशी का कुछ एहसास नहीं,
आसू भी अक्सर डुलते है
पर दुःख भी कोई खास नहीं,
नकाबों मैं वक्त गुजरे अपना,
गहरे अपने जज़्बात नहीं...!!
हमें देखो हमारे पास बैठो हम से कुछ सीखो
हमीं ने प्यार माँगा था हमीं ने दाग़ पाए हैं..
जैसा दिल बनाया है, काश वैसा ही नसीब भी बना देता मालिक।।
गालों पर उंगलियों की छाप
पीठ पर लात जूतों की बरसात
होंठों पर दाँतों के निशान
मुख की कोरों से बहता रक्त
कानों में गूँजती
रिश्तों को शर्मशार करती
हुईं गालियाँ
'उन दिनों'.
उसकी टाँगों के नीचे
आने से मैंने मना क्या कर दिया
बस..
उसने एक चुटकी...