घड़ी नहीं मेरा समय खो गया हैखुद से मिले एक अरसा हो गया है!
प्रीत के पंछी हो,तड़पने से डरते हो?जब बारिश में निकले हो ,तो भीगने से क्यों डरते हो?
_अर्चना शर्मा
महंगे होटल में भी भुख मिटती नहीं ,मां तेरी वो हाथों की रोटियां बिकती नहीं ..!!
पिता वो दीपक है, जो खुद जल जाता है
और अपने बच्चे को प्रकाश देता है ।।
रास्ते खूबसूरत होते हैं ,, यक़ीननपर उन यादों से ज़्यादा नहीं ,, जो सफऱ करती रहती हैं ,, ताज़िन्दगी हमारे साथ ….
झूठ ही जिसका आसरा झूठ ही जिसकी ताक़त सोचो वो कैसे जीता होगा झूठ की जिसको आदत एक दिन ये झूठ ही उसको सच बन कर खा जाएगा देखना वो दिन दूर नहीं वो दिन जल्दी आएगा सच का दामन...
हमारी भी तमन्ना थी किसी को हमारी याद आती बारिशों में.
जिंदगी भी किताब सी होती है.... सब कुछ कह देती है खामोश रह के भी..!!
हर दर्द का इलाज नही दवाखानेकुछ दर्द चले जाते हैंदोस्तों के साथ मुस्कुराने से …!!
चुनना होंगे नए लोग नई यात्रा के लिए देना होंगे पैर उन्हें चलने के वास्तेपर नहीं होगा आसान छीन पाना उनसे थाम रखी हैं जो रंगीन बैसाखियों
सुखी वो नहीं जिसके पास सब कुछ है,
सुखी वो है जिसके पास सब कुछ है।
कुछ लोग आपसे सिर्फ उतना ही प्यार करेंगे,
जितना वो आपको इस्तेमाल कर सकते हैं,
जहां लाभ मिलना बंद हो जाता है,
वहां उनकी वफादारी खत्म हो जाती है
अगर कोई हमेशा आपको व्यस्तहोने का दिखावा करता है तो वहव्यस्त नही किसी और के साथ मस्तरहता है, कितना भी याद कर लोकितना भी जता लो एक दिन खुदको ही लगेगा कि अब अपना रास्ताअलग ही सही है सूचना जनहित...
दुनिया के साथ समस्या ये है कि बुद्धिमान लोग संदेह से भरे हैं जबकि मूर्ख आत्मविश्वास से!
तुम्हे केसे बताएं तुमसे क्या चाहते हैबस वफा के बदले थोड़ी वफा चाहते हैहमसे मोहब्बत की इंतहा ना पूछोहम तो सनम तुम्हे बेइंतहा चाहते हैतुझे मानते हैं तुझे पूजते हैतुझमें ही अपना खुदा चाहते हैअपने आशिक पे थोड़ा सा एहसान...
जिंदगी में एक ही उसूल रखों ,जहाँ कदर नहीं वहां कदम मत रखों …
कुछ घंटो की नींद एक वक्त की चाय इसके अलावा घर से,
क्या लेता हूँ मै,
उसका नाम ऐसे दोबारा मत लेना ये वन्दूक रखी है,
और चला लेता हूँ मै.
हालात चाहे कैसे भी हो मुस्कुरा लेते है
बच्चे खुश रहे तो भूखे पेट भी आंसू छिपा लेते है
कभी मीनारो से गिरते है कभी मलबे मे दब जाते है
कभी गटर मे गिरते है कभी बेमौत मर जाते है
मजबूर भी है मजदूर...
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी,
मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी.....
हमें पता है तुम कही और के मुसाफ़िर हो
हमारा शहर तो बस यूं ही रास्ते में आया था