इश्क है अगर तो शिकायत न कीजिए... और शिकवे हैं तो मोहब्बत ना कीजिए..!!
तुम अलविदा कहकर चले गएऔर ना जाने कितने ही मौसम बदल गएपर देखो ना…,मैं आज भी वहीं खड़ी हूंक्योंकि मैं तुम्हें अलविदा ना कह पाई!
जिसकी सबसे दोस्ती होती है,
अक्सर वो किसी के नहीं होते...
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
सूरज सितारे चाँद मेरे साथ में रहे,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे..
दुनियां उन्हीं से हाल पूछती है,जिनकी हालत ठीक होती है…
किसी भी क्लास में नहीं पढ़ाया जाता है,
कि कैसे बोलना चाहिए ,
लेकिन जिस प्रकार से आप बोलते हैं,
वह तय कर देता है कि आप किस क्लास के हैं !
अपने को साधारण आदमी मानना भी एक ताक़त है।
ऐसा आदमी असाधारणता के कोई फालतू सपने नहीं देखता,
और निराश नहीं होता, टूटता नहीं।
रिश्तो में अपेक्षा ही कमजोर बनाती है,
अपेक्षा तो स्वयं मस्तिष्क में जन्म लेती है..!!
नत हूं मैं सबके समक्ष, बार-बार मैं विनीत स्वरऋण - स्वीकारी हूं - विनत हूंमैं मरूंगा सुखीमैंने जीवन की धज्जियां उड़ाई हैं।
~ अज्ञेय
सारा ज़माना जब खिलाफ था भूलो नहीमें आपके बाप के कंधे से कन्धा मिलाए खड़ा था
शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है
~गुलज़ार
नींद भी क्या खूब होती है यदि आ जाये तो सब कुछ भुला देती है और ना आए तो हर कुछ याद दिला देती है !!!
मुझे तुम्हारा साथ चहिए,तुम्हारी सलाह नहीं…
सदा जो दिल से निकल रही हैवो शेर और नगमों में ढल रही हैकी दिल के आंगन में जैसे कोईग़ज़ल की झांझर छनक रही है
मंज़िल चाहें जो भी हो मेरी, रास्ते आप ही से होकर गुजरते हैं..!!
पिता का संघर्ष इस बात का साक्षात प्रमाण है, कि जिंदगी में चमत्कार जैसी कोई चीज नहीं होती । ~ योगेश्वर
बिन मेहनत तरक्की चाहकर, रूपयों से खुशियां छांट लेते हैं,
स्वाभिमान बेचकर अपना, वो किसी के भी तलवे चाट लेते हैं..
पिता बिना न हस्ती तेरी, न कोई तेरा ठिकाना है पिता के नाम से आना जग में पिता के नाम से जाना है !!
रिश्ता कैसा यह जानने से अच्छा है,
अपनापन कितना है ये महसूस किया जाए....