ज़िंदगी के रास्तों मेंखुद से चलने,गिरने,उठने,का हुनर सीख लो,क्यूॅंकि सहारे कितने भीभरोसेमंद क्यूॅं न हों,एक न एक दिन साथछोड़ ही जाते हैं!!!
गुस्सा करना अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है,क्योकि आप जिसपे गुस्सा करते है,उससे ज्यादा आपका खुद का नुकशान हो जाता है !
मैं बिल्कुल शीशे जैसा हु
जो जितना मेरा है मैं उसका उतना हु.
लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है'
अंगुलियां यूं न सब पर उठाया करो,
खर्च करने से पहले कमाया करो
राहत इन्दौरी
काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ
मोहब्बत क्या है,हाथों में चूड़ामांग में सिंदूरगले मे मंगलसूत्रऔरमहबूब की वफादारी।
जो ज्ञानी होते हैं उन्हें कभी अहंकार नहीं होता
रेगिस्तान कभी यह नहीं कहता कि वह ऊँट का घमण्ड तोड़ देगा।
बहुत सीधा सा परिचय है जिंदगी का,
आसूं सच्चाई हैं और मुस्कुराहट एक नाटक...
किसी से भी उलझने का अब मन नही करता ,
आप सही , मैं ग़लत , बात ख़त्म …
ग़ुरूर में बन्दा खुद को
हर इक से जुदा समझता है
अधूरा आदमी ख़ुद को
ख़ुदा समझता है
अभी ख़मोश हूं तो
ताअल्लुक़ की ज़िंदगी के लिए
ख़बर नहीं वो मेरी चुप्पी को
क्या समझता है।
दोस्ती करनी हो तो गणित के जीरो जैसी करो,जिसके साथ मिल जाओ उसकी कीमत बढ़ जाए…
सम्मान सबका मगर इज्जत उतनी,जितनी सामने वाला करे...!!
कच्ची उम्र में इश्क़ और पक्की उम्र में वहम, बहुत जल्द होता है।
मुझे नफरत है कुछ चलती चीजों से
जैसे मेरी सांसे, नब्ज और धड़कने..
जब-जब धर्म की ग्लानि-हानि यानी उसका क्षय होता है और अधर्म मे वृद्धि होती है, तब-तब मैं धर्म के अभ्युत्थान के लिए अवतार लेता हूं !!
शक्ल पर मरने मिटने वाले बहुत देखे ,
हृदय की तिजोरी तलाशने वाला न मिला ।
मैं ऐसे धर्म को मानता हूं,
जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।
डॉ. भीमराव आंबेडकर