जो ठीक लगे वो ही देना प्रभू,
हमारा क्या है हम तो कुछ भी मांग लेते हैं...
बचपन में तो यही स्टाइल था
दिल है बेताब नज़र खोई हुई लगती है,
ज़िन्दगी दुख में बहुत रोई हुई लगती है।
तिलक राज पारस
ढूँढोगे तो सुकून खुद मे ही मिलेगा..दूसरो मे उलझन मिलती है....
बूढ़े मां बाप को अपने घर से निकाल रखा है
अजीब शौक है बेटे का, कुत्तों को पाल रखा है
वो सब देख रहा है आपकी पार्थना भीआपका संघर्ष भी आपकी तकलीफ़ भीऔर आपका संयम और कर्म भी...
प्यार, मुहब्बत, ख्याल, एहसास, रिश्ते-नातें, तालुक, वास्ते, सब झूठ, बकवास…अगर इनमें से किसी एक का भी वजूद होता तो, मेरे पास जरूर होता!
मुँह में ज़ुबान सब रखते हैं,
मगर कमाल वो करते है,
जो उसे संभाल कर रखते हैं …..!!!
बुरा व्यक्ति उस समय और भी बुरा हो जाता है,
जब वह अच्छा होने का ढोंग करता है।
छत पर वॉक करने वाला मौसम है,
और छत से छलांग लगाने वाले हालात.
'पागल औरत है' ये सुनकर भी,
औरत ने घर को घर ही बनाया पागलखाना नहीं।
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है,
पर यह पशु की तौहीन है,
पशु बलात्कार नहीं करते,
सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
सालों बाद उन पर नज़र पड़ी, उन पर ही ठहरी रह गयीं ... ~ दीपक चौधरी
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
खुद पर यक़ीन होना चाहिए क्यूकी , सहारे ही इंसान को बेसहारा करते हैं ...
जिनके दिल साफ होते हैं,वो हर जगह से ठुकरा दिए जाते हैं
ख़्वाब ख़्वाहिश ख़ैरियत है ज़िंदगीहक़ीक़त उल्फ़त कैफ़ियत है ज़िंदगी
एक उम्र के सौदे में बंधी हुईइनायत इबादत तबियत है ज़िंदगी..!
मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं
बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं
मलिकज़ादा जावेद
जब वक्त बुरा हो तो ‘मेहनत’ करना
जब वक्त अच्छा हो तो ‘मदद’ करना
भस्म तेरा श्रृंगार प्रभु, तू मेरा पहला–आखिरी प्यार प्रभु,सबके लिए महादेव है तू…पर मेरे लिए संसार प्रभु.