इतने हिस्सों में बँट गए है हम ..
जैसे अंदर से कट गए है हम … !!
तेरे राहों में काँटे बहुत है।
तेरी निगाहों के प्यासे बहुत है।
मैं दोस्ती में हर एक बढ़ता हाथ चूमता हूं
बस शर्त ये हैं कि बन्दा नमक हराम न हो
औरत, आवाज़ उठाने भर से बेग़ैरत हो जाती है और आदमी बार बार हाथ उठाकर भीथोड़ा और ज़्यादा मर्द ही होता रहा…!
असत्य है ईश्वर नहीं मारताउसकी निर्माण सत्ता का भवन नहीं बिखरता एक पिता की मृत्यु परथरथरा कर रेत साधड़ाम से गिर पड़ता हैईश्वरीय सत्ता का भवनऔरप्रत्येक मां की मृत्यु परसंतान दृष्टि मेंमर जाता है ईश्वरक्योंकि मां ही ईश्वर का प्रतिबिंब...
कीमत दोनों को चुकानी पड़ती है,
बोलने की भी और चुप रहने की भी....
कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है , पर यह पशु की तौहीन है, पशु बलात्कार नहीं करते। सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
औकात से बड़े दिखावे इंसान को, अक्सर कर्ज़ में डुबो देते हैं...
मैंने अपनी ज़िंदगी के सारे, महंगें सबक सस्ते लोगों से सीखे हैं...
संबंधों की मधुरता के लिए
संबोधन कि मधुरता अनिवार्य है !!!
जरूरतें, ख्वाहिशे, ज़िम्मेदारियां, यूंही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है..
विरानी खुद में थी,बेरंग दुनियां को लिखते रहे…
जो दिल मै होते है अक्सर... वो नसीब मै नहीं होते।।
प्यार वह नहीं है जो आप कहते हैं।
प्यार वह है जो आप करते हैं।
तस्वीरों पर फिल्टर इतना ही लगाएं कि मिलना पड़े!..
तो शर्मिंदगी ना हो…!
मेरा मोहब्बत मेरा तजुर्बा हैअमीर होना और हसीन होनादोनो ही लाजिम है ,वरना आपकी मोहब्बतआपके मुंह पे मार दी जाएगी
जिस दौर से हम गुजरे हैं ,
तुम गुजरते तो गुजर जाते...
मशहूर तुम आज भी हो मेरे नाम सेपहचान तुम्हारा आज भी है मेरे नाम सेवेवफाइ का चादर ओढ़ तुम आए थे मेरे पासले कर चली गई सारी खुशियांखुदा ने जो रखा था मेरे नाम से…..
मरना है इक रोज सभी को ही बस ख्वाहिश इतनी है उस पल हाथों में हाथ बस तेरा होरहे तू सामने मेरे और मेरी आंखों को दीदार सिर्फ तेरा हो.... जा सकूं मैं इस दुनिया से चैन से इस तरह...