न हम-सफर न किसी हम नशीं से निकलेगा,हमारे पाँव का काँटा है हमीं से निकलेगा !
बिना किताबों की जो पढ़ाई,
सीखी जाती है उसे जिंदगी कहते हैं..!!
मनुष्य कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए,
उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।
ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!
कैसे उसने ये सब कुछ मुझसे छिपकर बदला , चेहरा बदला, रास्ता बदला बाद में घर बदला , मैं उसके बारे में ये कहती थी लोगो से , मेरा नाम बदल देना अगर वो शख्स बदला ..
हम भूल सके हैं, न तुझे भूल सकेंगे,तू याद रहेगा हमें, हाँ याद रहेगा.
पहले मुग़ल दरबार में नाचते थे,अब मस्जिद के बाहर नाचते हैं,जगह और समय बदला है,मानसिकता व हरकत अभी भी वही है!
मैं खुद अकेला रह गया,
सबका साथ देते देते..
आग का क्या हैं पल दो पल में लगती है
बुझाते बुझाते एक जमाना लगता है
कुदरत को गहराई से देखो,आपको सब कुछ साफ-साफ समझ आएगा !
जो वक्त नहीं दे सकता..
वो साथ कैसे देगा..!!
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
सुलझा हुआ मनुष्य वह है जो अपने निर्णय स्वयं करता है,
और उन निर्णयो के परिणाम के लिए किसी दूसरे को दोष नही देता !!!
मुकम्मल हो गर इश्क़ तो तेरे सारे नखरें झेलूं मैं,
तुझे लेकर अपनी आगोश में तेरी जुल्फों से खेलूं मैं..!!
विरक्ति
आँखों से निकले हर आँसू कोतलाश होती है अपनी एक मुस्कान की …
-मधुलिका
जिसके जाने से जान जाती थी
उसको मैंने खुद Block किया है
जहां साधारण लोगों की हिम्मत टूट जाती है,
वहीं से इतिहास रचने वाले शुरुआत करते हैं
ये कैसा भार हैं जब
मैं मुझमें ही रिक्त हूं..!!
हराम की कमाई से शक्लें तो तो सवार सकते हो,नस्लें नहीं !!