बेचारगी पे मेरी उसे प्यार आ गया, शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ उसे भा गया
वो हाल है अंदर से कि, बाहर है बयाँ से
उसके दिल को भी आधार कार्ड से जोड़ दो, पता तो चले कितने खाते खुले हैं...
पैसा बोलता है लेकिन अफ़सोस,
कोई इसका ग्रामर चेक नहीं करता.
ये कैसा भार हैं जब
मैं मुझमें ही रिक्त हूं..!!
कुछ दर्द जो अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं, आंखों से पानी बन निर्झर नदियों से बहते हैं । समझ ही नहीं पाती,किसी को नही कह पाती, इस जीवन से अब कुछ और नही चाहती ।
कभी कभी किसी के शब्द इतनेचुभ जाते हैं कि हमचुप से हो जाते हैं और सोचते हैं किहम इतने बुरे हैं…….
तुम्हें याद करके सोने की आदत थीआज तुम्हें याद करके रोने की आदत हो गई
कभी-कभी शब्दों को पढ़ते व शब्दों को गढ़ने से क़िताब तो पूर्ण हो जाती है,किंतु कहानी अधूरी ही रह जाती है।।
गिरते हुए मैने जब भी तेरा नाम लिया है
गिरने ना दिया तुने मुझे थाम लिया है।।
कुछ इस तरह लगना तुम गले मुझ से,
कि छीन लेना मन की उदासियां सारी .!
वेदना मेरे हृदय में नासूर कर रही है,
ये खामोशियां मेरी चीखें रोक रहीं हैं..!!
विरक्ति
जिनकी आंखें बात बात पर भीग जाती हैं,
वो कमज़ोर नहीं दिल के साफ होते हैं....
तनाव से केवल समस्या जन्म लेती है,
समाधान खोजना है तो मुस्कुराना पड़ेगा....
हमारी खामोशी को हरगिज बुझदिली ना समझा जाये,,,अभी हम तेरे जुल्म और अपने सब्र की इंतहा देख रहे है,,
मज़लूम होते हुए फ़तेह हासिल करना, यह मैंने इमाम हुसैन से सीखा
महात्मा गांधी
स्वार्थ मनुष्य के व्यवहार में शामिल होता है ,
बारिश रुक जाने के बाद छाता भी उसे बोझ लगने लगता है …
सफलता यूँ ही क़दम नहीं चूमतीथके हों पाँव फिर भी चलना पड़ता है
सही लोगों की रक्षा करें और बुरे लोगों का नाश !
हजारों कमियां होगीं मुझे में पर
औरों सा डबल रोल में तो नहीं हूं ना...!!