चढ़ते सूरज के पुजारी तो लाखों हैं 'फ़राज़'डूबते वक्त हमने सूरज को भी तन्हा देखा
~ अहमद फ़राज़
नही लिखूँगी खत में, अपने तन्हाई के किस्से ,,
क्योंकि कुछ शिकायते, गले लगकर की जाती है।
सेजल
वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे है
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।
रूठी हुई ख़ामोशी से बोलती हुई शिकायतें अच्छी होती हैं
फिर से उलझाता है सबको नफ़रत वाली बात में दूसरे राउंड में ही लुच्चा आ गया औक़ात में
दुआ के वक्त आंखों का भर आना,
कुबूलियत की सबसे बड़ी दलील है !!
तेरा ख़ामोशी पर फ़िदा तो हम हैं ही, कुछ कह दो तो शायद फ़ना हो जाएँ
ज़ोर से बात वो करते हैं,
जिनकी बात में ज़ोर नहीं होता....
कोशिश बहुत की , कि
राज-ए-मुहब्बत बयां न हो ,
पर ये मुमकिन कहाॅं ,
के आग लगे और धुंआ न हो..!!
⊰𖤍⊱┈─ 𝑻𝒉𝒆𝑨𝒘𝒂𝒓𝒂𝑷𝒂𝒓𝒊𝒏𝒅𝒂 ─┈⊰𖤍⊱
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...
जो देख के हँसता था हम जैसे फ़क़ीरों कोशोहरत की बुलंदी से उतरा तो बहुत रोया-रईस अंसारी
शब्द नहीं हूँ.. जो तू पढ़ सकेएहसास हूँ.. बस महसूस कर..
"फूल चुन कर एकत्र करने के लिए मत ठहरो। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे"
~रबीन्द्रनाथ ठाकुर
जबरदस्ती की नजदीकियों से ,सुकून की दूरी अच्छी ।
स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन और विश्वास सबसे अच्छा संबंध।
~ गौतम बुद्ध
ना गिले ना शिकवे ना उम्मीद है किसी से, बड़े मतलबी जो निकले है सब इस दौर में..!!
गर शौक़ ज़िन्दा हैं ,
तो दिल आज़ाद परिंदा है..!!
शतरंज सी जिन्दगी में कौन किसका मोहरा है
आदमी एक है मगर सबका किरदार दोहरा है
दिल तुझे नाज था जिस शख्स पर दिलदारी पर..देख अब वो भी उतर आया अदाकारी पर..