एक हमारे उठने से क्या होता है,
आंख दुनिया की भी तो खुलनी चाहिए...
जिनको हर मोड़ पे कोई मिल जाएउनको पुराने रास्ते क्या ही याद रहेंगे!!
अगर दिशा दिखाने वाला सही हो तो,
दीपक का प्रकाश भी सूर्य का कार्य करता है...
बादलों को गुरुर था कि वो उच्चाई पे है,जब बारिश हुई तो उसे ज़मीन की मिट्टी ही रास आयी।
अगर किरदार ऊंचा करना है तो अपना हुनर दिखाओ अपनी औकात नहीं..!!
समझौता करो तो खुद से करो क्योंकि, अपने से फैसला लेना भी सही रास्ता होता है !!
ईश्वर का मौन, सुन पाना और
उन, इशारों पर चलते जाना ।
ले जाएगा यही, कामरानी तक
तेरा जज़्बा तेरा यूं साहस भर चलते जाना।
काँच के टुकड़े बनकर बिखर गयी जिंदगी किसी ,
ने समेटा ही नहीं हाथ जख्मी होने के डर से !!
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलेंरास्ते आवाज देते हैं सफर जारी रखो !
वर्तमान में
स्त्री का एक हिस्सा ,
उसके बहोत से हिस्सो पर
भारी पड़ रहा है ।
शंका का कोई समाधान नहीं ,चरित्र का कोई प्रमाण नहीं,मौन से अच्छा कोई साधन नहीं,और शब्द से तीखा कोई बाण नहीं।
~अज्ञात🌷
सबको लगता है खुश हूं मैसब के सब धोखे मे है…
घमंड से आदमी फूल सकता है, फल नहीं सकता।
प्रेमचंद
उठाना खुद ही पड़ता है थका टूटा बदन,जब तक सांसे चलती है,कंधा कोई नही देता !
तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहींकमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
~ दुष्यंत कुमार
सब चीज़ बिकाऊ है यहाँ ,इंसाफ से लेकर इंसान तक !!
कभी खुदा से मिला तो जरूर पूछूंगा,ग़ुलाब' कितने लगे थे तुम्हें बनाने में...
जिंदगी भर डर डर के रिश्तों को,
निभाने से बेहतर है अलग हो जाना...
ग़ुरूर में बन्दा खुद को
हर इक से जुदा समझता है
अधूरा आदमी ख़ुद को
ख़ुदा समझता है
अभी ख़मोश हूं तो
ताअल्लुक़ की ज़िंदगी के लिए
ख़बर नहीं वो मेरी चुप्पी को
क्या समझता है।
ये दबदबा, ये हुकूमत, ये नशा, ये दौलतें,
सब किरायेदार हैं, घर बदलते रहते हैं...!!