जिसमे निखरे वो भी इश्क़ था , जिसमे बिखरे वो भी इश्क़ है ...
जून कीझुलसती गर्मी के मध्य भी जो तुम आ जाओपीपल की घनीछांव के नीचेहम तुम दशहरी आम चखेंगे
पीड़ा, अवसादों से रिश्ता जोड़कर, नाता खुशियों से तोड़ा था,
मोहब्बत में रूह को फना करके, मैंने अपनी जान निचोड़ा था..
दर्द से मेरा दामन भरदे या अल्लाह...
ईद मुबारक !
वे भगवान हैं जिनको हमनें माँ के रूप में पाया है
उनकी गोद स्वर्ग है तो आँचल आख़िरी छाया है
हम महानता के सबसे करीब तब आते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं।
रबीन्द्रनाथ टैगोर
जब रात है ऐसी मतवाली
फिर सुबह का आलम क्या होगा….
अहंकार भी आवश्यक है,जब बात अधिकार, चरित्र या सम्मान की हो...
मुझे हजार चाहने वाले नही..
बस एक समझने वाला चाहिए..!!
अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
परवीन शाकिर
कमाने वाले को पता होता है पैसे कैसे कमाए जाते हैं,
बैठके खाने वाले लोग हाथ का मैल कह देते हैं।
अनवर चतुर्वेदी
अब कोई आए चला जाए मैं ख़ुश रहता हूँ
अब किसी शख़्स की आदत नहीं होती मुझ को
"रास्ते" पर "गति" की सीमा है,"बैंक" में "पैसों" की सीमा है,"परीक्षा" में "समय" की सीमा है,परन्तुहमारे "सोच" की कोई सीमा नहीं,इसलिए "सदा" "श्रेष्ठ" "सोचें" और "श्रेष्ठ" पाएं..
बीवी मेरी शरारती होनी चाहिए
क्योंकि शरीफ़ तो मैं खुद हूं
जब बच्चे ने काग़ज़ खाया तो माँ ने डाँटा,
बच्चे ने रो कर कहा माँ काग़ज़ पर रोटी बनी थी।
तीर.. खंज़र... चाकू.. आपस में लड रहे थे कि कौन सबसे ज्यादा घाव देता है...
शब्द पीछे बैठे मुस्कुरा रहे थे...
जो भी जितना साथ दे वो एहसान है, लंबा साथ तो सिर्फ़ ख़ुदा का होता है। लोग इतना ही निभा सकते हैं जितना उसका ज़र्फ़ था सो उतना निभा दिया उसने…
खुद को इतना भी कमजोर ना समझो कि
किसी ऐरे गेरे के एहसान की जरूरत हो..!!