प्रेमिकाओं ने प्रेम में हमेशा ,
अपना भविष्य चुना है , प्रेमी नहीं।
मैं उसे देख भी लेता हूं….. छू भी लेता हूं….
भला हो रात का…. नींद का….. ख्वाब का….!
जो गलत है उसका विरोध खुलकर कीजिए, चाहे राजनीति हो या समाज इतिहास आवाज उठाने वालों पर लिखा जाता है तलवे चाटने वालों पर नहीं।
लोग खुद पर ध्यान नहीं देंगेलेकिन दूसरों को ज्ञान जरुर देंगे….!
कोई मुझ से पूछ बैठा ‘बदलना’ किस को कहते हैं ?सोच में पड़ गया हूँ मिसाल किस की दूँ? “मौसम” की या “अपनों” की…🌻
पानी अगर शांत हैं तो,
गहराई से मज़ाक नही करते...!
दुर्घटना तो जन्म है
मृत्यु तो घटना का अंत है
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
तेरी फ़ोटो को देख के क्रेजी बन गए, तेरे fan थे पहले अब AC बन गए
कितनी भी जान छिड़क लो…
बदलने वाले बदल ही जाते हैं!!!
भला उनका भी बहुत कर रखा है,जिंनकी नजरों में आज हम गलत है।
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क ना महसूस हो जहां
मैं दिल को उस मकाम पे लाता चला गया
साहिर लुधियानवी
लोग अपनी परेशानियों से नहीं,
दूसरों की खुशियों से परेशान होते हैं....
फिर हमनें अपनी आंखो को सजाया है तुम्हारे लिएतुम अपना दिल कब सजाओगे मेरे लिए....!!
उसके लिए कविताएं लिखना और फ़िर उन्हें जला जाना, उससे मोहब्बत करना और फिर उसे बिना बताएं मर जाना !
कोई किरदार तो तुम लाओ हमारे जैसा
हम उसी रोज़ कहानी से निकल जाएंगे....!
दूसरे से मिली इज्जत
और अपनों
से मिली बेइज्जती इंसान कभी नहीं भूलता है..
टमाटर का भाव खाना एक बार समझ आता हैं, लेकिन अदरक शक्ल ना सूरत फिर भी 200 रू किलो...शायद इसलिए ही इसे कूटा जाता है..
जो बड़ी समस्यायें सुलझाने आये थे
वो खुद सबसे बड़ी समस्या बन गए
खलिश तेरी "आंखों" कि बयां करती है,
तूने बसाए हैं "दुखों" के समंदर इनमें..!!
विरक्ति