प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।- रवींद्रनाथ टैगोर
अदालत बन गई है जिंदगी,
रोज नए मामले दर्ज़ होते जा रहे हैं...
जो तुम सपना देखते हो
वह तुम पा भी सकते हो।
होठों पर जरूरत से ज्यादा बिखरी हंसी,अक्सर गवाह होती है आंखों में पसरी हुई उदासी की....
हसीनों की गलियों से आँखें बंद कर गुज़रना लड़ गयीं जो उनसे आँखें, गड्ढे में जा गिरोगे।
गलती पीठ की तरह होती है...
औरों की दिखती है अपनी नहीं..!!
जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए !!
ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!
किसी एक को खुश करने के लियेलोग अपने लोगों से दूरी बना लेते हैंऔर एक दिन ऐसा भी आता है, किजिसके लिये पूरी दुनिया से अलग हुयेवो खुद अकेला छोड़कर अलग हो जाता है
लोग अपनी परेशानियों से नहीं,
दूसरों की खुशियों से परेशान होते हैं....
संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं,
कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं।
हरिओम पंवार
मानो तो मौज है ,
वरना टेंशन तो रोज है.....!!
सरकारी सेवाओं सी है तुम्हारी मोहब्बत
चर्चा खूब होती है पर मिलता कुछ भी नहीं
हराम की कमाई से शक्लें तो तो सवार सकते हो,नस्लें नहीं !!
राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था !
दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था !!
दुख की शाम हो या सुख का सवेरा…सब कुछ कबूल है अगर…"साथ हो तेरा"…!!
यूँ तो कोई सबूत नहीं है कि वो मेरे हैं ,
ये दिल का रिश्ता तो बस यकीन से चलता है ..!!
औरत बड़ी प्यारी चीज़ है रो लेगी,
मगर अपनी गलती कभी नहीं मानेगी...
पहले हेलीकाप्टर नेता आयेअब हेलीकाप्टर पत्रकारिता आ गई…विकसित होने का रास्ता या दिवालियापन…