सिर्फ छू कर बहक जाने को नही...
उतर कर रूह में,
महक जाने को प्यार कहते है...
सबके अपने सत्य हैं,सबके अपने झूठ।कोई कहता लाभ इसे,तो किसी को लगती लूट।
जिसमें ‘मैं’ का फ़ायदा,‘मैं’ का है नुक़सान।‘मैं’ का बढ़ता मान देखकर,‘मैं’ की जलती जान॥ 💐
जब जब तू गीत मोहब्बत के गाएगी,
मेरी रूह को अपने आसपास ही पाएगी,
और नहीं हुआ मुकम्मल इश़्क़ तो ग़म मत करना,
मैं मौजूद रहूंगा तेरे संगीत में, जब भी तू साज बजाएगी..!!
विरक्ति
शीत लहर के स्पर्श से
जब मन झंकार उठा
मधु कूक कोयल से
जब हृदय में ज्वार उठा
तब शब्द हार पहन
विरही मन मुख से कविता गान उठा
हे भगवान ये क्या हो रहा है।
चक्र कहां है आप का।
गिरवी होते तो ख़रीद लेते,
अब गिरे हुए लोगों की कीमत कौन लगाता है....
फासले और बड़ा लो एतराज़ कब किया हमने ,
तुम भी ना भूल सकोगे वो अंदाज़ हूं मै ..!!
डरता है ज़माना मुझसे..... जब मैं उसके पीछे और वो मेरे आगे चलता है..!!
सारे सपेरे वीरानों में घूम रहे हैं बीन लिए,आबादी में रहने वाले साँप बड़े ज़हरीले थे
उठाना खुद ही पड़ता है थका टूटा बदन,जब तक सांसे चलती है,कंधा कोई नही देता !
औरत बड़ी प्यारी चीज़ है रो लेगी,
मगर अपनी गलती कभी नहीं मानेगी...
ज़रूरतें तो फिर भी मान जातीं हैं
भूख के पास मगर होता नहीं दिमाग़