अब क्या ही काहू अपने मां के बारे में..मां के ताने और खाने का कोई जोड़ नहीं..!!
लबों पर मुस्कान लेकर आंखों से इशारा करती हो,
मुझ पर ही इतनी इनायत है या दुनिया को मारा करती हो..!!
विरक्ति
तू ज़ाहिर है लफ़्ज़ों में मेरे
मैं गुमनाम हूँ खामोशियों में तेरी…
और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए,
हिम्मत और ज़मीर का ज़िंदा होना चाहिय...
ज़िद है तो ज़िद ही सही,
आत्म सम्मान से बड़ा कुछ भी नहीं..
ना दोस्त, ना मसीहा और ना ही किस्मत ने साथ दिया था,
खुली किताब सा लड़का मैं जिसे इश़्क़ ने बर्बाद किया था..!!
अच्छे हमसफर का साथ इंसान कोमुश्किल रास्ते में भी थकने नही देता ..!!
“संसार में हर इंसान का परिवर्तन निश्चित है,किसी का हृदय परिवर्तित होगा और किसी का समय..!!
मैं जा रही हूँ – उसने कहाजाओ – मैंने उत्तर दियायह जानते हुए कि जानाहिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है।
~ केदारनाथ सिंह
इस दौर में इज्जत दौलत पर निर्भर करती है ,
जो जितना अमीर होगा उसकी उतनी इज्जत होगी ...
फितरत से जो गिरगिट होता है
राजनीति में वो फिट होता है !
लबालब भरा हो जो फ़रेब से
किरदार वो बड़ा हिट होता है !
वक्त तराजू है जनाब •••
वो जो बुरे वक्त में आपनो का वजन बता देता है ....!!
मुजरिम हो गया इस कद्र खुद की नजरो में
स्वाभिमान छोड़ प्रेम ढूंढ रहा था पत्थरों में