तू श्रृंगार क्यूँ नहीं करती तेरी सादगी जान लेती है
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
आपके मानने या न मानने से
सच को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता
स्वतंत्र वही हो सकता है जो अपना काम अपने आप कर लेता है।
विनोबा भावे
शादीशुदा मर्द की इज्जत,
औरत की वफादारी पर टिकी होती है।
कभी उसे भी तो खले ना मिलना हमारा ,सिर्फ मैं ही क्यों रोयु ,याद करू और गिड़गिड़ाऊं ।।
करवट बदल रही थी ज़िन्दगी, मेरे सारे ख्वाब टूट रहे थे,
समय तेजी से बढ़ रहा था आगे, पर हम पीछे छूट रहे थे..!!
पहले आयु में बड़ों का सम्मान होता था
अब आय में बड़ों का सम्मान होता है!
हक जिसका था उसी का रहेगा इश्क एकबार होता हैं बार बार नहीं...!!
एक ही शख्स समझता था उसे,
और एक ही शख्स समझता था मुझे !!
फिर ये हुआ की वो भी समझदार हो गया,
और हम उसके सामने बच्चे ही रह गये !!
मेरे घर की दीवारें बवाल कर रही हैं ,
मैं क्यूं अकेला हूं सवाल कर रही हैं...
कुछ लड़कियां 30 सेकंड की reels के लिए,
अपनी इज्जत को दांव पर लगाने को तैयार हो जाती हैं।
कर्म से डरिये…..ईश्वर से नहीं…..ईश्वर माफ़ कर देता है…..कर्म नहीं ….. !!!
मुसीबत में भी रास्ता निकाल लेते हैं..
वक्त कैसा भी हो मां बाप संभाल लेते हैं..!!
मुझसे ना मिल सकेगा किसी का मिजाज़ ,
मुझको तो अब गुलाब भी काले पसन्द हैं…..🖤
सुविधाएं अगर हमारी आजादी को गिरवी रख लें,
तो उन सुविधाओं का सुख सहूलियत मात्र नहीं होता,
गुलामी में बदल जाता है।
चित्रा मुग्दल
दुश्मनो से निपटना तो हम खूब जानते है...मगर मेरे कुछ अपने है जो मोहब्बत से वार करते है...
प्रेम के रंग,
खुशियों का गुलाल,
36 बिरादरी का भाईचारा...
स्वादिष्ट पकवान और भाभी के कोरड़े... मुबारक !
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
रिश्ते में रहते हुए तो है ही,
रिश्ते से अलग होते हुए भी डिग्निटी बहुत ज़रूरी है.