अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥ ~कबीरदास
असल में साथ था ही नहीं कोईबेकार में गुमान होता था अपनों पर !
ये आईने कभी आँखों को पढ़ नहीं पाते
ये लबों की हँसी से आगे बढ़ नहीं पाते
है जिनके दम से ज़माने में रंग और ख़ुश्बू
वो फूल अपने ही काँटों से लड़ नहीं पाते
मालविका हरिओम
कुछ भी मेरा नही मेरे पास,
ये बदुआये भी लोगों की दी हुई है..
झूठी हैं इश्क़ की किताबें और शायर सभी ,
किसी ने रोते हुए लड़को के बारे मे नहीं लिखा ।।
खुशियां खत्म हो चुकी मेरे जीवन से,
मैं अवसादों का रहगुजर हूं,
और जिसे कोई नहीं तराश सकता,
मैं वो मानव निर्मित पत्थर हूं..
मुकेश को याद करते हुए...१०० साल {1923-2023}
एक नौकरी के चक्कर में
पूरे शौक ही खत्म हो गए !
कई बार हम लोगों को इसलिए भी खो देते है..
क्यूंकि हम उनके लिए जरूरत से ज्यादा मौजूद रहते है..
चाहे जितनी हो हिमालय की ऊँचाई
बाप के कंधे से ऊँचा कुछ नहीं है !!
सही लोगों की रक्षा करें और बुरे लोगों का नाश !
मुझे मालूम था मेरी मंज़िल "मौत" है,
फिर भी चाह "जीने" की करता रहा,
मुझे नहीं थी परख सही या ग़लत की,
मैं गुस्ताखी पर गुस्ताखी करता रहा,
और जब "जुदा" हुआ उनसे तब मैंने जाना,
सफ़र में तो वो थे "ठोकरें" मैं खाता रहा..!!
समझदार बनो, वफ़ादार बनो,
असरदार बनो पर दुकानदार मत बनो !!
इंतज़ार मत करो
जो कहना हो कह डालो
क्योंकि हो सकता है
फिर कहने का कोई
अर्थ न रह जाए।
एक मनपसन्द शख्स की कमीदुनिया के सारे लोग मिल के भी पूरी नहीं कर सकते...
इतना बारूद मत रखो अपने अंदर,
एक चिंगारी से खाक हो जाओगे...
बेवफा लोग बड़ रहे है धीरे धीरे
एक शहर अब इनका भी होना चाहिए..!!
जितना ज्यादा तुम उसे बाहर ढूंढते हो, उतना ज्यादा ही वो तुम्हारे अंदर होता हैं पढ़ लो चाहे दुनियां का कोई भी ग्रंथ, इश्क़ और ईश्वर हमेशा ऐसे ही तो मिलता हैं!
चल जी कर दिखाते हैं…..दिखा कर जीने में क्या मज़ा …..!!!
अच्छा इंसान जब बुरा बनता है,
तब बहुत बुरा बन जाता है....