उन्हें याद करें! विक्रम साराभाई, नेहरू, अब्दुल कलाम
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क ना महसूस हो जहां
मैं दिल को उस मकाम पे लाता चला गया
साहिर लुधियानवी
तजुर्बा चाहे जितना भी कर लीजिए ज़िंदगी का साहबहर एक मोड़ पर नई राह दिखाती है ज़िन्दगी…
अब रिश्ते भी नौकरी की तरह हो गए है,
बेहतर Offer मिलते ही लोग Change कर लेते है !
क्या भला मुझको परखने का नतीजा निकला , ज़ख्म-ए-दिल आपकी नज़रों से भी गहरा निकला !!
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
मैथिलीशरण गुप्त
झूठी हैं इश्क़ की किताबें और शायर सभी ,
किसी ने रोते हुए लड़को के बारे मे नहीं लिखा ।।
और धीरे धीरे मैंने ये मानना शुरू कर दिया,
कि मैं किसी के लायक नही हूं अकेली ही ठीक हूं..!!
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।
प्रेम सिर्फ अपने अच्छे कर्मों और ईश्वर से करो... ईश्वर सदैव आपका समिप होते हैं....!!
क़ासिद दयारे यार से लाए हो कुछ ख़बर । ईद तो दहलीज़ पर है वो आए क्यू नही ।
जब जब लोगपरेशान हो जाते हैं..काफ़ी हद तक वोइंसान हो जाते हैं...
जो कल थे,वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं,वे कल नहीं होंगे।
होने न होने का क्रम,
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं,हम रहेंगे, ये भ्रम भी,
सदा पलता रहेगा।।
अटल बिहारी वाजपेई
बस साथ निभाने की जो कसमें दिलाई गई थीउसका बोझ है पर प्रेम नहीं हैअब यदि वो प्रेम की बात भी कर रहे हैतो वो इसलिए कि मजबूरी हैकि पति पत्नी हैगहराई में जाकर देखा जायतो वो सामाजिक बंधन ही...
भक्ति यदि पवित्र हो तो बिगड़े काम बन जाते हैं,
साधना यदि सच्ची हो तो "राम" भी मिल जाते हैं..!!
ख कर लगे है तुझको ये राब्ता पुराना है
तेरी ही बाहों में जैसे गुज़रा इक ज़माना है
अजीब अदा है लोगों की ...
नजरें भी हम पर और नाराजगी भी हमीं से...!
हार मंज़ूर है मुझे, मगर एहसान नहीं, तुम जीत के भी, मेरे कर्ज़ दार रहोगे....!!
कुछ ख़्वाब तुमनें तोड़ दिए..और कुछ हमनें देखने छोड़ दिए..!!
ख़ुशियों के झोंके सा है वोजिसे भी छूकर गुजर जाता हैज़हन में उसके मुस्कुराहटें भर जाता है
-मधुलिका