औरत बेवा हो जाती है
तो उसकी चूड़ियाँ तोड़ देते हैं
मर्द की घड़ी या ऐनक या हुक्का तोड़ने का
कभी किसी को ख़्याल न आया।
एक हंसता खेलता
आंगन मेरा भी था
बलखाती इठलाती
रौनक ऐ जहां मेरी भी थी
पैरों के नीचे जन्नत
कहलवाने वाली माँ भी थी
एक कमजोर सा
बाप का साया था
जो मेरी हर जरूरत में
काम आया था
एक गौरैया दो बोलते...
पैसा इंसान का लिबास तो,
बदल सकता है पर औकात कभी नहीं...
कुछ भी अच्छा सा रख लीजिए मेम, वैसे भी करना उसके विपरित है !!
सुरमे की तरह पीसा है हमें हालातों ने,
तब जा के चढ़े है लोगों की निगाहों में..!!
कुछ चीज़ों को अधूरा ही छोड़ना पड़ता है
हर बार परिस्थिति अनुकूल नहीं होती!
मै खुद में अल्प हूं..
पर मुझे विकल्प मत समझना..!!
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँमाँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ
मौत का डर उसे दिखाना,जिसे जिंदगी से मोहब्बत हो !
प्यार, मुहब्बत, ख्याल, एहसास, रिश्ते-नातें, तालुक, वास्ते, सब झूठ, बकवास…अगर इनमें से किसी एक का भी वजूद होता तो, मेरे पास जरूर होता!
लिख देने से, कह देने से,
बोझ कहां ख़त्म होते हैं ...
बहुत अच्छे होकर भी आप हर किसी के लिए अच्छे नहीं हो सकते , कहीं बुरे बना दिए जाते हैं तो कहीं बुरे साबित कर दिए जाते हैं …
ये तुम्हारी यादें भी चैन नहीं लेते देतींदेखो सुबह से मज़दूरी पर लगा रखा है..!
वादों की जरूरत नहीं होती उन रिश्तो में,,
जहां पर भरोसा अपने आप से ज्यादा होता है।।
सत्य से मीठा कोई फल नहीं,झूठ कितना भी बोलो उसका कोई कल नहीं !!
मैं तुम्हरे साथ हूं कहने में और,रहने में बहुत फर्क होता है….
जिस तन को छुआ तुने, उस तन को छुपाऊँ
जिस मन को लागे नैना, वो किसको दिखाऊँ..🦋
साजिशे वो रचते है जिन्हे कोई जंग जितनी हो
वरना कोशिशे तो दिल जीतने की होनी चाहिए..
जो वक्त नहीं दे सकता..
वो साथ कैसे देगा..!!
ज़िंदगी से बढ़कर था भूख का मसअला ,
परिन्दा जाल पे यूँ ही नहीं उतर आया ..!!