ये चेहरे का गुस्सा महज एक बहाना है,
मेरी दुनिया मासूमियत का खजाना है!
मैं तो मुसाफ़िर हूँ, आया हूँ सैर करने यहाँ,
नफ़रत भरी दुनिया में न कोई घर बसाना है ¡!
जीवन एक ऐसा रंगमंच है,
जहां किरदार को खुद नहीं पता होता,
कि अगला दृश्य क्या होगा...
ये गांधी का देश है लेकिनइसी देश में अंग्रेजों ने फूट डाले, शासन किए
हर रात कि "सुबह" ऐसी चाहता हूं,कि मेरे उठते ही नज़र "तू" आ जाए,तेरी "मुस्कान" देख कर खोलूं मैं आंखें,और मुझे देखकर तू मेरी "बाहों" में समा जाए..!!
सोचा थाघरबना कर बैठूँगासुकून सेपर घर की ज़रूरतों नेमुसाफ़िर बना दिया
~ गुलज़ार
पूर्ण है श्रीकृष्ण, परिपूर्ण है श्रीराधे,
आदि है श्रीकृष्ण, अनंत है श्रीराधे ।
तुम्हारे जाने के बादज़िंदगी के अलग अलग पड़ाव में..हर जगह…हर एक शख़्स के अंदर…ढूंढा मैंने तुम्हें,
फ़िर एहसास हुआ किछोड़ गये हो तुम…सब जगह थोड़ा थोड़ा ख़ुद को
ढूंढा तुम्हें…पर दोबारा कभी तुम मुझे पूरे ना मिले।
सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख
सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।
आपसे बिछुड़े तो ख़ुद को और बेहतर कर लिया
आँख दरिया कर न पाए दिल को पत्थर कर लिया
नीलोफ़र नूर
शाख से टूटे हुए फूल ने सबक दिया, ज्यादा अच्छे बनोगे तो लोग तोड़ देगें..
वादों की जरूरत नहीं होती उन रिश्तों में,
जहां निभाने वाले पर भरोसा होता है...
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
ना मैं किसी की,
ना कोई मेरा ..
इस गुजरती रात का,
मैं हूं आने वाला सवेरा !
प्रेम का अर्थ है अंत तक उन वादों को निभाना...
जो हमने अनुकूल परिस्थिति में किए थे
खुशियां बहुत सस्ती हैं इस दुनियां में
हम ही दूंढते है उसे महंगे लोगों और महंगी दुकानों में..!!
ये दुनियाँ अगर मिल भी जए तो क्या है …..
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं
व्यापार हो या व्यवहार उन्हीं लोगों से रखो ,
जिनकी जान से ज्यादा जुबान की कीमत हो ..!!
जीवन में किसी को परखने का नहीं ,समझने का प्रयास करिए …
जिंदगी की जंग में हालात चाहे जैसे भी हों।।
धडकनों में नशा जीत का ही होना चाहिए।।