इक़ अरसे बाद मिलना हुआ
उसने बस इतना ही पूछा था
आपका मिजाज कैसा है...!
बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं
व्यापार हो या व्यवहार उन्हीं लोगों से रखो ,
जिनकी जान से ज्यादा जुबान की कीमत हो ..!!
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!
कोई गिरता गया कोई गिर ही गया
पिता एक उम्मीद है, एक आस है,बच्चों की हिम्मत और विश्वास है!
अगर तुमअपनी सांसों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपनी धड़कनों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपने छूटते प्राण को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अन्यथाजाने दो जिसे जाना है,
मत करो विलाप किसी के जाने का
~ अम्बष्ठ
इतवार की सुबहइत्मीनान वालासुकून चाहती हूंकोई हो जग जाएमुझसे पहले मेरे लिएताकि सो सकूँ औरमेरी चिंता कर पाए।कहे सबसे धीरे सेसोने दो उसे ज़राथकी हुई सी आजउसे आराम जी भरतसल्ली से करने दोसोती रहूँ बेफिक्र सेकरे मेरी फ़िक़्र ज़राकहे सब...
सुबह की चाय और बड़ो की रायसमय समय पर लेते रहना चाहिए।
तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए।
अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए।
तुलसीदास
स्वार्थ मनुष्य के व्यवहार में शामिल होता है ,
बारिश रुक जाने के बाद छाता भी उसे बोझ लगने लगता है …
प्रेम से बढ़कर त्याग हैदौलत से बढ़कर मानवतापरन्तु सुंदर रिश्तों से बढ़करइस संसार मे कुछ भी नहीं !!
एक नौकरी के चक्कर में
पूरे शौक ही खत्म हो गए !
जिंदगी एक खेल है और ये आप पर निर्भर करता है , खिलाड़ी बनना है या खिलौना......!!
मैं बिल्कुल शीशे जैसा हु
जो जितना मेरा है मैं उसका उतना हु.
पिता का दिन नहीं होता है पिता से ही दिन होता है
क़िताब सादा रहेगी कब तक।....
कभी तो आगाज़ -ए- बाब होगा।.....
जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली।......
कभी तो उनका हिसाब होगा।.....
उन रिश्तों का खत्म हो जाना ही बेहतर है, जहां दुख और अपमान के सिवा कुछ न मिले...
बहुत कुछ लिखा गया ,बहुत कुछ पढ़ा गया,परन कोई किसी के आँसू लिख सका,न कोई किसी के दर्द पढ़ सका..!!
मेरे कानों का वो झुमकाहमारे इश्क़ की छन छन पेइतराता है
तेरे हाथों की छुअन सेजाने क्यूँ अब भीशर्माता है
किरदार बह गया पानी में...
हम तैरते ही रह गए कहानी में..!!