जो हर मुलाकात पे चाय पिलाते हैं ,
वो लोग सीधा मेरे दिल को भाते हैं ।।
ना राधा बनना है, ना मीरा बनना है,,मुझे ज़िंदगी की राहों में,,बस तुम्हारे साथ चलना है,,
~कीर्ति चन्द्रा
8 अरब वाली दुनिया में, एक तुमसे ही तो इश्क़ है ..!!
क्योंकि नहीं मिलते विचार तुम्हारे हमारे, अलग अलग रास्ते से क्यों ना पहुंचे हम मंज़िल तक
चले जाना चाहता हूँ
बहुत दूर...
जहाँ कोई भी न हो!
चले जाना चाहता हूँ
उन बर्फीली पहाड़ियों के अनज़ान सफ़र पर
जिसका कोई अंत न हो!
मैं ख़ुद को भी भूल जाना चाहता हूँ!
परिन्दों की तरह सब कुछ छोड़
आसमां में उड़ना चाहता हूँ!
छिन जाती है "मासूमियत" चेहरे की,मुफलिसी "उम्र" देखकर वार नहीं करती..!!
किस किस से छुपाऊ तुम्हें मैंअब तो तुम मेरी मुस्कुराहट मेंभी नजर आने लगे हो।
ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं।
वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं
और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।
स्वामी विवेकानंद
जाती है सबकी नज़र तुम्हारी ही तरफ,
सब्जी़ मंडी में टमाटर जैसी हो तुम ।।
ऐसी शिक्षा जो डॉक्टर और इंजीनियर को तो जन्म देती है,
लेकिन मनुष्य को जन्म नहीं देती व्यर्थ है।
महीनों की आहट में मोहब्बत करते हैं लोग ,,
और दिनों के रिवाज में रिश्ते निभाते हैं लोग..!!
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं,
दूसरों को डुबाके मुझे तैरना नहीं है।
दिल बड़ा रखो
हैसियत छोटी भी होगी तो चलेगा
हम पहुंचेंगे हर घर तक,
न्याय का हक़, मिलने तक!
गली, मोहल्ला, संसद तक
न्याय का हक़, मिलने तक!
सहो मत...डरो मत!
जिंदगी की किताब में….सुकून के पन्ने गायब है!!!
मंज़िल पहुंचने के बाद पता चला की.."मंज़िल से अच्छा तो सफर होता है"…!!
ना गिले ना शिकवे ना उम्मीद है किसी से, बड़े मतलबी जो निकले है सब इस दौर में..!!
लैलाओं को महलों का दुःख होता है,चौराहों पर मजनू पत्थर खाते हैं.
जो भारी कोलाहल में भी संगीत को सुन सकता है,
वह महान उपलब्धि को प्राप्त करता है।
डॉ. विक्रम साराभाई
झूट बोल कर कुछ पाने से अच्छा हैं ,सच बोल कर उसे खो दो …