जिंदगी में एक वक्त के बाद खुशी नहीं सुकून चाहिए होता है.!
घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी,
मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी.....
मिट्टी के हम चराग़ हैं यूं मत बुझा हमें ,
नादान -- तेरे ताक की रौनक हमीं से है
रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी,
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है।
वसीम बरेलवी
कमाल की थी तेरी वो मुस्कुराहट जिसके हम कायल थे,
आज तो तेरा लहजा मेरे मौन को भी घायल किये हुए है..!!
विरक्ति
इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन
चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।
काश तू चाॅंद , और मैं सितारा होता ,आसमान में , आशियां हमारा होता..!!
लोग तुम्हें दूर से देखते ,पास से देखने का हक , सिर्फ हमारा होता..!!
उम्र कटी दो अल्फाज में,एक आस में दूसरा काश में….
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
बारात में #नोटों की गड्डी उड़ाने वाले #लोग #पूजा की #आरती के लिए खुल्ले #पैसे ढूंढते हैं अभी हमे बहुत बदलना है
विधान को चुनना ज़ुबान को नहीं संविधान को चुनना अज्ञान को नहीं किसान को चुनना निशान को नहीं जवान को चुनना सुल्तान को नहीं ईमान को चुनना बेईमान को नहीं मुस्कुान को चुनना गुमान को नहीं मकान को चुनना मसान...
प्यार नहीं था वो
था वो बस एक दिखावा,
छला दिल को उसने ऐसे
दिया दर्द मुझे ज़िंदगी भर का !!
दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि अगर तुम किसी एक ही नजरिए का दामन थामे रहोगे,
तो आगे नहीं बढ़ सकते।
इंसान की कदर तब होती है जबउसके कारनामे लोगों के काम आते हैं..!!
महल मेरा रेत का बनवाते हो
और पता बारिश को देते हो....!!
समशान सा हैं दिल मेरारोज़ न जानें कितने ख़्वाबजलकर राख होते हैं यहां..!!
अफ़सोस इंसानियत को भुला कर इंसानइंसानियत दिखाने का ढोंग बहुत करता है
सच के लिए संग्राम में इतनी हिम्मत
और ज़ज्बा तो होना ही चाहिये !
सबूत तो गुनाहो के होते है !बेगुनाह मोहब्बत का क्या सबूत