इंसान तो हर घर में पैदा होते हैं,
बस इंसानियत कहीं कहीं जन्म लेती है....
बच्चो बाली हरकत करने बाली लड़कियां,
किस्मत बालों को मिलती है…||
काटकर गैरों की टाँगें ख़ुद लगा लेते हैं लोग
इस शहर में इस कदर भी कद बढ़ा लेते हैं लोग....!!
वो नहीं रुकीमैंने आंसू भी दांव पर लगा के देखे…!!
राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलेंरास्ते आवाज देते हैं सफर जारी रखो !
एक अरसे से हमारी बोलचाल बन्द हैफिर भी क्या यादों की आवाजाही बन्द है
तुम बेवफाई के उसूलों से वाफिक नहीं शायद ,
बिछड़ने के बाद महबूब की खैरियत नहीं पूछी जाती...
कुछ परेशानियां इतनी बड़ी होती हैं,की उनके चक्कर में जिंदगी छोटी हो जाती है….
सबके अपने सत्य हैं,सबके अपने झूठ।कोई कहता लाभ इसे,तो किसी को लगती लूट।
जिसमें ‘मैं’ का फ़ायदा,‘मैं’ का है नुक़सान।‘मैं’ का बढ़ता मान देखकर,‘मैं’ की जलती जान॥ 💐
अनुभव पहला या आखिरी नहीं होता,
हर अनुभव बस नया होता है....
बहुत कम लोग जानते हैं कि वो बहुत कम जानते हैं !
हजारी प्रसाद द्विवेदी
सारा ज़माना जब खिलाफ था भूलो नहीमें आपके बाप के कंधे से कन्धा मिलाए खड़ा था
जब तक सब अपने थे ज़िन्दगी साथ गुज़ारी है,
धीरे धीरे सब बदल गयें,अब हमारी बारी है।
मोहब्बत मे लड़को की नजरों का शुक्र गुजार रहा करो, तुम्हारी साधारण सी शक्ल को चाँद कहा जाता हैं...!!
जिस हिसाब से जिंदगी चल री है ना
उस हिसाब से मुझे hugs की नहीं drug की जरूरत है
इश्क है अगर तो शिकायत न कीजिए... और शिकवे हैं तो मोहब्बत ना कीजिए..!!
जिंदगी रेल सी गुजर रही है,और उम्मीदें स्टेशन सी छूट रही है।
प्रेम भी आया नहीं सौभाग्य में ,साधुओं को क्या मिला वैराग्य में
शौक़–ए–वफ़ा ना सही,खौफ–ए–खुदा तो रखो।
रुकना नहीं है...
थकना नहीं है...
और झुकने का तो सवाल ही नहीं बनता !