हाफ़िज़ ए खुदा परे हट जाये मर्ज़ तेरे बूते का है हि नहींसाकि के मयखाने के सिवाग़म की कोई दवा नहीं होती ।।
सजा मे तुम मिलोगे तो बोलो , गुनाह क़बूल कर लूँ ..!!
मेरा circle छोटा है क्योंकि, मैं Quantity में नहीं Quality में विश्वास करता हूं।
पहले लगता था कि.... तुम ही दुनिया हो... अब लगता है कि.... तुम भी दुनिया हो....!!!
जिम्मेदारियाँ जब सर पर हों,
तो जिन्दगी के दलदल भी कदमो को बढ़ने से रोक नहीं पाते ।
~ प्रह्लाद पाठक
ज़िन्दगी के तजुर्बों में एक अनुभव ये भी सबसे काम का रहा,गोपनीयता को प्राथमिकता देने वाला हर इंसान नमक हराम रहा
मेरी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे लोग भी आए जो साथ बैठ कर हंसते थे...और मेरे पीठ पीछे मुझे ही डसते थे..!!
चाय के दुकान पर इतने छोटे कप हों गए हैं किलगता हैं चाय नहीं पोलियों ड्राप पिला रहे हैं...!
तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद...
इक शम्अ जो रौशन थी बुझा दी गई शायद...
लाइलाज मेरे जख्म का अगर सनम तुझे पता नहीं, आंखों से दे ज़हर इश्क की इससे अच्छी दवा नहीं
"कर्म" मेरे लिए "उल्टा काम" करता है..मै जितना ज्यादाअच्छा" करता हूँ, मेरे साथ उतना ही ज्यादा "बुरा" होता है.
अगर पैसा और संबंध दोनों में से एक को महत्व देना पड़े तो, संबंध को बचाना पैसा तो आता जाता रहेगा..!!
वतन के जाँ-निसार हैं वतन के काम आएँगे,
हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमाँ बनाएँगे!
लोग छूट जाते हैं,
मोह नहीं छूटता.
आजकल वो कुछ कहते नहीं है मशरूफियत है या नाराज़गी…?
बेहद ना हो तो चाहत कैसी
जान पर ना बन आए तो मोहब्बत कैसी...!!
यह लड़ाई साझी थी...मुल्क से मुहब्बत साझी थीनफ़रत से लड़ाई साझी थी कभी-कभी जो होती थीवो हताशा साझी थी झीख...खीज...अनबनहंसी-बैठकीसब साझी थी और साझी रहेगी तुम्हारा हिस्साअब तुम्हारी यादें देंगी तुम्हारी यादेंसब में साझी रहेंगी
संभलना था हमें,, साथ फिसलते चले गए,, ना चाहा फिर भी,, उसकी चाहत में संवरते चले गए,, अंज़ाम मालूम था,, फिर भी आगे बढ़ते चले गए,, तिनका तिनका जोड़ा था ख़ुद को,, दूरियों में बिखरते चले गए,, अब तकलीफ़ ये...
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
इश्क़ में दो की संख्या आखरी होती है, तीन की जलन आप नहीं समझ सकते.