इंतजार किसका करें आखिर ,,हर किसी ने उम्दा तोहफे जो दिए।।
उस की तस्वीर हटाये तो ज़माना गुज़राफिर भी दीवार से तस्वीर का साया न गया...
शुक्र करो तुम्हें अपना माना हैं मेरे दोस्त, वरना मैं तो कभी अपनी गलती तक नहीं मानती...!
◈•✦───•✿✺『💠』✺✿•───✦•◈
सफ़र में होती है पहचान कौन कैसा है
❖◈•┼•◈❖
ये आरज़ू थी मेरे साथ तू सफ़र करता!
◈•✦───•✿✺『💠』✺✿•───✦•◈
दिखावे के शरीफ बनने की आदत नही हमारी,..शब्द चाहे जैसे भी हो खुलेआम बोलते है हम..!!
थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे
उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे
रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो...
मैं हूं कि जनवरी से आस लगाए बैठा हूं
तुम हों की जून में भी नहीं पिघल रही हों
बहुत आसान नहीं थानज़दीकियों का फ़ासलामीलों तय किया हैअपनों को अपना समझते समझते!
मुझे ज्ञान मत दो सहाब
मेरा वक्त ख़राब है दिमाग नहीं
मैंने ख़त लिख रखा है आँखों मेंआप नजर मिलाकर पढ़ो तो सही
नज़र अपनी मिली है...
तो नज़रिया किसी और का क्यूं रखें..!!❣️
टूटते पुल, धंसती सड़कें,टपकती छतें, बेपटरी ट्रेनें, बंद नाले, डूबते बेसमेंटझकझोर रहे हैं सबअब तो जागो कम से कमजनता हो तुम जागीर नहींकिसी रजवाड़े कीवोट जो देते रहोगेभ्रष्ट, निर्लज्ज, अक्षम प्रतिनिधियों कोधर्म और जाति के नाम परमरते रहोगे यूंही सब...
सोचा थाघरबना कर बैठूँगासुकून सेपर घर की ज़रूरतों नेमुसाफ़िर बना दिया
~ गुलज़ार
सब गुज़र तो जाता है,
मगर सब भुलाया नहीं जाता...
"तुम कर लो नजरंदाज अपने हिसाब से""हम तो इश्क़ मोहब्बत बेहिसाब करेंगे"
ख़ुशी बिकती नहीं बाज़ार में
देख तेरे ही भीतर तो छुपी है
ज़रा सा हंस ज़रा सा मुस्कुरा
देख ज़िंदगी कितनी हसीं है
पानी से पानी मिले, मिले कीच से कीच।
ज्ञानी से ज्ञानी मिले, मिले नीच से नीच।
जरा भी असर नहीं होता मुझ पर इन सांपों के ज़हर का,
मैंने अपनी जवानी में एक मशहूर नागिन को मुंह लगाया था !
जिंदा इंसान को गिराने में और मरे हुए इंसान ,
को उठाने में गजब की एकता दिखाते है लोग !!
बीतने को पूरी रात पड़ी है और जीतने को कितने स्वप्न!
~ बाबुषा कोहली