मसला सकून का है जान,
वरना जिस्म बाज़ार में भी मिलता है...
अच्छा सुनो तुम इश्क की बातें न किया करो मासूम हैं हम, तेरी बातों से बहक जाते हैं..
जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा!
~गोपालदास नीरज
बड़े बड़े युद्ध अक्सर
शांत कमरों में अकेले लड़े जाते हैं !
शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को, कोशिशें की बहुत मगर" भुला ना पाए तेरे एक नाम को !!
अब तो ख्वाबों में आना छोड़ दो ,
कौन सा अब तुम्हारे साथ हैं !
तेरे साथ भी बर्बाद थे ,
तेरे बाद भी बर्बाद हैं !!
सिर्फ़ पोस्ट पढ़ने का ही रिश्ता न रखिए हमसे...
कभी चाय+नाश्ते के लिये भी बुलाया करो हमें..!!
युद्ध का ज्वालामुखी है फूटताराजनैतिक उलझनों के ब्याज सेया कि देशप्रेम का अवलम्ब ले !किन्तु, सबके मूल में रहता हलाहल है वहीफैलता है जो घृणा से, स्वर्थमय विद्वेष से !युद्ध को पहचानते सब लोग हैंजानते हैं, युद्ध का परिणाम अन्तिम...
रिश्ता कैसा यह जानने से अच्छा है,
अपनापन कितना है ये महसूस किया जाए....
तू रूह में शामिल है मेरी आती जाती साँसों की तरहजिस पल भूलूँगी तुझेवो लम्हा मेरा आखिरी होगा
खुश क़िस्मत तो हूं लेकिन , खुशियां मेरा नसीब नहीं हैं ..!!
जीवन में दो बार ही माँ बाप रोते हैं,
जब बेटी घर छोड़े,और जब बेटा मुंह मोड़े।।
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
कुछ किताबे ताउम्र धूल फाँकती रह जाएगी,
एक रुपया ही सही किसी का तुम पर उधर रह जाएगा,
कुछ कपड़े बिन पहने ही अलमारी मे दबे रह जाएँगे,
किसी अपने से मुलाकात अधूरी रह जाएगी,
किसी खास से दिल की बात कभी कह नहीं...
✯||ले आया झुमका भी तुम्हारे लिएअब पहन कर दिखाओ की कैसे हैं …||✯
अश्कों से .. धोखों से .. जख्मों से मिलता है ..
सबक जिंदगी का ,
कहाँ दो - चार किताबों से मिलता है...
धन न हो तो रिश्ते...
उंगली पे गिने जाते हैं....!!
की महोब्बत की हथेली पर जुनून का जाम रख दूंगा ,
अगर बेटी हुई मेरी तुम्हारा नाम रख दूंगा...
मन्दिर तक पहुंचना तन का विषय है,
लेकिन शिव तक पहुंचना मन का विषय है …