गलती कीमाफी ना मांगीमाफी से मुक्ति मिल जाए तोबंधे रहना मुझेबुरी सी याद बनकरकुछ तो पाप धूल जायेंगेबद्दुआओं से…
कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर
कबीरदास
अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की...
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मिरी तन्हाई की...
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
बड़ी मुद्दतों के बाद लगा कोई मिला है मुझेपर ये तो ख़्वाब था ख़्वाब से गिला है मुझे.।
-नेहा यादव
मेरे साथ चलना है तो दर्द सहने के आदी बन जाओमेरा मसला है काँटों से खेलना और तुम फूल जैसी हो
मनुष्य कितना भी बड़ा क्यो न बन जाए,
उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।
ईश्वरचन्द्र विद्यासागर
मेरा दुख दर्द महज़ आपके लिए,मनोरंजन एवं बकवास का विषय है.
ज़िन्दालाश बना देने वाली,
समय की मार से अंंजान था मैं,
रूह सहमी थी परिस्थितियां देखकर,
जिस्म से बेजान था मैं..
की गैर तो गैर है गैरों से गिला क्या..
अपने तो अपने हैं अपनों से मिला क्या..!!
चाहता था मैं, वफा का सिला..🦋मगर वो भी जख्मों में ही मिला
शांति वही है जो अंदर से आती है, न कि बाहर से !
शुक्र भी है और शर्मिंदा भी हैतेरे बाद मर भी गए और जिंदा भी है
मैं नहीं कहता मुझे औरों से बेहतर चाहिए
मुझ को जितनी है ज़रूरत उतनी चादर चाहिए
हैं परेशाँ इस लिए भी लोग अपनी प्यास से
प्यास की ख़ातिर सभी को इक समुंदर चाहिए
मुद्दतों भटके हैं मेरे ख़्वाब सारे दर-ब-दर...
कायरता कि लेप चढ़ाकर,
अपनी मर्दानगी खत्म करते हैं,
औरत अगर उड़ने के ख्वाब देखे,
तो उसपर ज़ुल्म करते हैं..!!