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जितना कम सामान रहेगा उतना सफ़र आसान रहेगा! ~गोपालदास नीरज

धीरे-धीरे जाने से नहीं डरें। स्थिर रहने से डरें।

जिददी हूँ, गुस्से वाला हूँ, बतमीज़ हूँ, बेपरवाह हूँ, लेकिन मैंने कभी किसी से रिश्ता मतलब के लिए नहीं रखा..!!

चले जाना चाहता हूँ बहुत दूर... जहाँ कोई भी न हो! चले जाना चाहता हूँ उन बर्फीली पहाड़ियों के अनज़ान सफ़र पर जिसका कोई अंत न हो! मैं ख़ुद को भी भूल जाना चाहता हूँ! परिन्दों की तरह सब कुछ छोड़ आसमां में उड़ना चाहता हूँ!

माँ बाप का सहारा ऐसे बनो, जैसे बचपन में वो तुम्हारा सहारा थे...

काँटों से दिल लगाया है, लहूलुहान होने दो अभी ज़मीं कहा है बस, उसे आसमान होने दो

लहरों का शोर नहीं, सागर का 'शान्त' सुनो जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो प्रह्लाद पाठक

जा बिछड़ जा मगर ये ख़्याल रहेयूं ना हो कि उम्र भर मलाल रहे

दुनिया का सारा मोटिवेशन एक तरफऔर मां पापा का यह कहना कि घर के हालात तुम्हें बदलने है ,एक तरफ!

नहीं आती नींद अब इन आंखों में,तेरे इश्क़ ने मेरी रातें खराब की हैं..!!

घर वाले जब भी कहते हैं कि भाड़ में जाओ तो मैं चुपचाप आकर फेसबुक पर बैठ जाता हूँ.

हमेशा मन में रखता है बोला नही जाता जिसे पाया ही ना हो,उसे खोया नहीं जाता..!! कुछ हादसे ऐसे हैं जो करीब है दिल के कुछ खुशियों के दाग को,धोया नहीं जाता..!! ज्यादा मुस्कुराने का सबब है बस इतना सा है रोना चाहो भी अगर,तो...

जिंदगी के रास्ते में सफर के मज़े लो,मंजिल तुमसे खुद किसी मोड़ पर टकराएगी ।

वो लौट कर आई है मनाने को... शायद आजमा कर आई है जमाने को..!!

चालाकी, चतुराई और बेशर्मी के मिश्रण को आजकल होशियारी कहते हैं!!!

सुलझ भी सकता है झगड़ा उसे कहो कि अभी , जुदाई के किसी कागज़ पर दस्तखत ना करें ।।

तजुर्बा उम्र नहीं मुर्शदतजुर्बा हालात सिखाते हैं

दुनियां एक खतरनाक जगह है, बुराई करने वालों से नहीं बल्कि उन लोगों की वजह से जो देखते हैं और कुछ नहीं करते!!

बूढ़ा बाप समझा मुकद्दर संवर गया , बेटे ने डिग्री ली और घर से निकल गया ।।

भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते.. और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती..!!


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