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World's Best Cow Hospital

रोने के लिए हम एकांत ढूँढ़ते हैं, हँसने के लिए अनेकांत। प्रेमचंद

इत्र सी महक उठती हैं ये शामजब हिस्से में आता हैं तुम्हारा नाम..!!

जिन पेड़ो ने पतझड़ सहे हैं, बसंत भी उन्हीं पेड़ो पर आता है....

कुछ ग़म और कई उलझनें है जो दौर है जिम्मेदारियों का तो ख्वाहिशों से भी रंजिशें है.

फिर एक दिन वो लोग हमेशा के लिए सो जाते हैं , जिनको रात भर नींद नहीं आती !

फिर से उलझाता है सबको नफ़रत वाली बात में दूसरे राउंड में ही लुच्चा आ गया औक़ात में

पहले ख़ुद पर ध्यान दो…बाद में दूसरों को ज्ञान दो … !!!

होंगे तुम्हारे शहर में तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे ,हमारे गांव में तो हमारी सादगी मशहूर है..

"फूल चुन कर एकत्र करने के लिए मत ठहरो। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे" ~रबीन्द्रनाथ ठाकुर

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

उस दिन साढ़ी मैं थी वो बिना मेकअप के मेरी सांस थम गई थी क्या कयामत दिख रही थी...| ᵈ᭄•समंदर...༈

जेब में अगर पैसा हो तो लोग.. आपकी बकवास भी सलाह मानते है..!!

यदि आपके घर के सारे कोनों में नेट बराबर आ रहा है, तो घर आपका वास्तु दोष से मुक्त है।

जो जवाब वक्त पर नहीं मिलते, अक्सर वो अपने मायने खो देते हैं।

#वफा का समुन्दर कभी रूकता नहीं इश्क़ मे चला हैं वो कभी झुकता नही, मरहम धीरे से ही लगाना मेरे जख्मों पर, तूं ये ना समझ मेरा दिल दुखता नहीं...!!!

हम भी दरिया हैं,हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ता हो जाएगा. बशीर बद्र

जिसने हालत पिए हो,उसे जहर का खौफ कहा…

दिखा के मदभरी आंखें कहा ये साकी ने , हराम कहते हैं जिसको यह वो शराब नहीं

हालातों के साज़ परपीड़ा के तार सेवेदना के स्वर लिखूँगा वक़्त की राह परज़िन्दगी की क़लम सेलम्हों की रफ़्तार लिखूँगा वैश्या की पीड़ा सेजिस्म के खरीददारों परमैं हवस के बाज़ार लिखूँगा तन्हाई के साये मेंअन्धेरे की क़लम सेमैं अपना संसार लिखूँगा..

हसीनों की गलियों से आँखें बंद कर गुज़रना  लड़ गयीं जो उनसे आँखें, गड्ढे में जा गिरोगे।


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