मेरे लिखे शब्दो का हूबहू अर्थ हो तुम,खुद को तेरा न कहुँ तो मुझ बिन व्यर्थ हो तुम।
हो गई है पीर पर्वत-सी अब पिघलनी चाहिए।
हर सूरत में अब इस हिमालय से कोई नई गंगा निकलनी चाहिए।
तेरे लौटने के इंतेजार में,तेरी यादों से मोहब्ब्त हो गई….
ढलती उम्र के साथमोहब्बत बढ़ती जाएबस तुम्हारा इतना साथ चाहिए।
-नेहा यादव
शिकार है मासूमियत गरीबी की,
फिर भी चेहरे पर मुस्कान है,
रूपयों का मोह नहीं उसे,
बस दो निवाले में बसती उसकी जान है
तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!
पैसा इन्सान को ऊपर जरूर ले जाता हैं,
परंतु इंसान पैसे को ऊपर नहीं ले जा सकता....
इतिहास लिखने के लिए कलम नही हौसलो की जरूरत होती हैं..!!
कई बार हम लोगों को इसलिए भी खो देते है..
क्यूंकि हम उनके लिए जरूरत से ज्यादा मौजूद रहते है..
दफन कर दिया था जो किरदार सुकून कि तलाश में,
आज परछाईं से उसकी सामना हुआ तो रूह कांप गई..!!
थक चुका हूं इन पुराने अल्फ़ाज़ों से खेलते खेलते,
तुम मेरे दिल से खेल कर एक नया शब्दकोश उपहार कर दो..!!
सभी अनुभवों का स्वागत कीजिए,पता नहीं कौन सा अनुभव आपकी ज़िन्दगी बदल दे..!!
आइने से डर जाएंगे लोग यहां...
कभी किरदार नज़र आया जो चेहरे की जगह..!
सिपाहियों बैरिकेड लगवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
नुकीले भाले बिछवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
भक्तों गालियाँ बरसाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं,
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है!!
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है,परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है ।मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ,मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी
जरूरत जिन्हें दिमाग की हो,
उन्हें दिल कभी मत देना.....
काश तूझे तस्वीरों में ही जी भर के दिख लूं यार
आज ये दिल मुस्कुराने की जिद में है....!!!!
जीवन में किसी को परखने का नहीं ,समझने का प्रयास करिए …
कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ हैवो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ हैयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ हैयही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है
-कैफ़ी आज़मी