बात नहीं हुई सुबह, सुबह नहीं हुई सुबह से सीधा दोपहर हो गई….
गरीबी ही सटीक है मेरे लिए,फालतू लोग आस-पास फटकते भी नहीं फिर ……
सारी उम्र एक ही गलती हमने बार बार दोहराई
अन्धों को आँसू दिखलाये बहरों को आवाज़ लगाई
उस दिन साढ़ी मैं थी वो बिना मेकअप के
मेरी सांस थम गई थी क्या कयामत दिख
रही थी...|
ᵈ᭄•समंदर...༈
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
बहुत जानी हुई शक्ल भी ,
कभी कभी पहचानी नहीं जाती है ...
ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था ,
हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते ..!!
ये मत समझ की तेरे काबिल नहीं हम, तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हम...!
तपस्या में भले ही कमी
रह गयी हो,
नीचता में कोई कमी नहीं है.
ख़ामोश हूं मैं भी वक्त की तरह,
शोर करूंगी तो समझना कयामत आ गईं!
षडयंत्र से सफलता
मिल सकती है , श्रेष्ठता नहीं..!!
कोशिश करे ,शिकायत नहीं...
बड़ी कस केबांधे रक्खी है मुझेयादें तेरीबिछड़ना मुझे भी नहीइन से…..
खामोशी गवाह है,
इंसान अंदर से थक चुका है...
जहाँ तक मुमकिन था मै तुम्हारे पीछे भागा, अब इस से आगे तुम्हारी बदनसीबी है..
ज़िन्दगी के कुछ लम्हें और हादसे भुलाये नहीं जाते,हालांकि भुला देने में भलायी होती है.लेकिन अफसोस हमसे ये हो नहीं पाता.
मैं वो दरिया हूँ की हर बूंद भँवर है जिसकी,तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,कौसल्या हितकारी ।हरषित महतारी, मुनि मन हारी,अद्भुत रूप बिचारी ॥लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,निज आयुध भुजचारी ।भूषन बनमाला, नयन बिसाला,सोभासिंधु खरारी ॥कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,केहि बिधि करूं अनंता ।माया गुन ग्यानातीत अमाना,वेद पुरान भनंता ॥
मै लेखक हू लेकिन मै उद्दंडता नही लिखता,देश को पृथक करने वाली उग्रता नही लिखता,इंसान हू मै इसलिए हिन्दू मुस्लिम नही लिखता,हिन्दुस्तान के गौरव पर चोट करती अशिष्टता नही लिखता,और इश्क चाहती है मेरी कलम मै दुष्टता नही लिखता,मै द्वेष...