मेहनत एक ऐसी " मधुमक्खी" है,
जो बिना फूलों के कामयाबी का शहद चखा देती है।
ख़्वाहिशे ही तो हैं
मन के भीतर
कितनी मासूमियत से पनपती हैं
उचक उचक कर
शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार
पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं
चाहत होती है के सब पा लें
सहज़ ही
मगर कहाँ इतना सहज़ है
इनकी ही तरह सहज़...
इंसानियत दिल में होती है हैसियत में नहीं
ऊपर वाला कर्म देखता है वसीयत नहीं!
अधूरे प्रेम का बोझ लिए जीनाअनायास आयी मृत्यु के दुख से ज्यादा दुखदायी होता है
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
सियासत को लहू पीने की लत है ,
वरना हमारे मुल्क में सब खैरियत है ।।
भरोसे का पात्र नहीं रहता वो व्यक्ति ,जो भावनाओ के साथ खेल गया हो !!
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें,शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें !
तन्हा होना नज़र अंदाज़ होने से बेहतर है।
आग अपने ही लगा सकते हैं
ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं!
— मोहम्मद अल्वी
सबसे बड़ी त्रासदी बुरे व्यक्तियों का अत्याचारऔर दमन नहींबल्कि इस पर अच्छे लोगो का मौन रहना है ...
क़िताब सादा रहेगी कब तक।....
कभी तो आगाज़ -ए- बाब होगा।.....
जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली।......
कभी तो उनका हिसाब होगा।.....
सिर्फ सांत्वना स्वीकार नही,
इस बार पूरी तरह से न्याय चाहिए।
हैवानो की सजा के साथ - साथ,
हर नजर में पुराना सम्मान चाहिए।
सेजल
ईश्वर जिन्हें खून के रिश्ते में बांधना भूल जाता है... उन्हें दोस्त बना देता है.
शेर को पालने में उतना खर्चा नहीं है
जितना मेकअप और पब्लिसिटी
कर सियार को लगातार शेर के रूप में प्रस्तुत करने में है।
विरासत मे हमेशा जागीर सोना चांदी नहीं मिलते,कभी कभी जिम्मेदारियां भी मिल जाती है!!
कैसे हो पायेगी अच्छे इंसान की पहचान ,
दोनो ही नकली हो गए है आँसू और मुस्कान …
चार दिन भी कोई दूसरा निभा नहीं सकता, जो किरदार पापा जिंदगी भर निभाते हैं!!
गरीबी शिक्षा सस्ती करने से कम होगी ,मुफ्त के राशन से नही।