वक़्त बदल गया है अब बेटियाँ नहीं, बेरोजगार लड़के माँ-बाप के कंधों पर बोझ होते हैं।
जैकी यादव
ज्यादा अच्छे मत बनो
अच्छे से इस्तेमाल कर लिए जाओगे !
किसी की निंदा करने से यह पता चलता हैं,
की आपका चरित्र क्या हैं ना की उस व्यक्ति का.
ज़िंदगी को जंगल केउस पेड़ की तरह बनाओ,जो हर परिस्थिति मेंमस्ती से झूमता रहे।
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
‘’शोक मत करो ! नहीं उतरेगा कोई भी उत्सव
बुलावे पर उनके लाल क़ालीनों पर
करेंगे सारे उत्सव प्रतीक्षा
न्योते की तुम्हारे रोककर साँसें अपनी
बस करना होगा थोड़ा सा इंतज़ार”
जिंदगी ने यूँ उधेड़ा बुन न पाये,चाह थी क्या, क्या मिला हम चुन न पाये.
आदमी केवल दिमाग की नस फटने और दिल की धड़कन रुकने से नहीं मरता, बल्कि उस दिन भी मर जाता है जिस दिन उस की उम्मीदें और सपने मर जाते हैं; उसका विश्वास मर जाता है इस तरह आदमी मरने...
जिएं इतना कि
ज़िन्दगी कम पड़ जाए
हंसे इतना कि
रोना मुश्किल हो जाए
किसी भी चीज़ को पाना
नसीब की बात है
मगर कोशिश इतनी करें कि
उपरवाला देने पर मजबूर हो जाए..
खुद को अच्छा बना लीजिए,
दुनियां से एक बुरा इंसान कम हो जायेगा....
रिश्ते भी इमारत की तरह होते हैं ,
हल्की-फुल्की दरारें नज़र आए तो इमारत तोड़िये नहीं
मरम्मत कीजिए !
वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे है
“संगीत”
लगाता है मन की पीड़ाओं परमरहम सुकून का
इस दुनिया में सब कुछ कीमती है, एक पाने से पहले और दूसरा खोने के बाद । ~ गुलज़ार
रात को जब अकेला होता हूॅं
खुद को सवालों के कठघरे में पाता हूं
औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है
दरिया आँखों में था फिर भी प्यास रहीज़िन्दगी भर ज़िन्दगी की तलाश रही
इरादा है बदलने का तो कोशिश कर बदलने की
अगर सूरज नहीं है तो चराग़ों से उजाला कर
मिलेगी हार या फिर जीत का परचम उठाएगा
नतीजा जो रहे लेकिन नया सिक्का उछाला कर
राघवेंद्र द्विवेदी
दिलों के दरवाज़े नहीं होते,
बस सरहदें होती हैं।
"सफलता छोटे-छोटे प्रयासों का योग है - जिसे दिन-प्रतिदिन दोहराया जाता है।''
~ रॉबर्ट कोलियर