हिन्दू मुस्लिम चाहे जो माथे पर लिखा हो मगर ,
आपके सीने में हिन्दुस्तान होना चाहिए
दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
सिपाहियों बैरिकेड लगवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
नुकीले भाले बिछवाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
भक्तों गालियाँ बरसाओ
मेरे किसान आये हैं
मेरे किसान आये हैं
न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है।
मैथिलीशरण गुप्त
प्राण देना प्रेम नहीं...किसी के प्राण बन जाना प्रेम है...।
घर वाले जब भी कहते हैं कि भाड़ में जाओ तो मैं चुपचाप आकर फेसबुक पर बैठ जाता हूँ.
मजाक का सहारा लेकर लोग
दिल की बातें बोल जाते हैं...!!
गिरने के बाद समझ आया ,यहां चलना भी खुद है संभलना भी खुद है …
अल्फ़ाज़ नर्म पड़ गए और लहज़ा बदल गया,
लगता है कुछ ज़ालिमों का इरादा बदल गया…!!
ऐ खुदा लोग बनाने थे पत्थर के अगर,तो मेरे एहसास को शीशे सा न बनाया होता।
दिल एक हो तो कई बार क्यूँ लगाया जाए,बस एक इश्क़ ही काफ़ी है अगर निभाया जाए..!!❣️
मैं मगन डमरू की धुन पर नाचूँ ।
तुम दशाश्वमेध' का राग हो जाओ।
मैं तुमको छूऊं जलकर राख हो जाऊं ।
तुम मणिकर्णिका की आग हो जाओ...
परिवार, हालात और रिश्ते जो संभालना चाहता है,वही झुक जाता है,वर्ना स्वाभिमान तो सुदामा का भी कहाँ कम था।
धूप तो यूँ ही बदनाम है ,जलन तो इंसानों को एक दुसरे से है ..!!
मैं मुंतजिर हुं तेरा तू हर दफा चाहिए
जैसे किसी बीमार को दवा चाहिए
काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ
क्या तुम..
नही मिलोगी
यह पूछतीं हैं मुझसे
बेचैन सांसें
मैं बस टकटकी लगाकर
सुनसान सड़क के
उस मोड़ को देखता रहता हूं
जहां से तुम ओझल हो गई थी
इस आस में..
कभी तो समय की ये बेरहम धुंध छटेगी
और तुम..
लौट आओगी...
कुछ लोग भूलने के नहीं,
बल्कि दफनाने के काबिल होते हैं...
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएं कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे।