मैं छिपाना जानता तोजग मुझे साधु समझताशत्रु मेरा बन गया हैछल रहित व्यवहार मेरा।।
हरिवंशराय बच्चन
मेहनत एक ऐसी " मधुमक्खी" है,
जो बिना फूलों के कामयाबी का शहद चखा देती है।
अगर विश्वास खुद पर हो तो, उजड़ी हुई जिंदगी भी खिल जाती है...
परिवार, हालात और रिश्ते जो संभालना चाहता है,वही झुक जाता है,वर्ना स्वाभिमान तो सुदामा का भी कहाँ कम था।
तेरे वजूद से हैं मेरी मुक़म्मल कहानी,
मैं खोखली सीप और तू मोती रूहानी...!!
अजीब है..
औरत खुल कर हंस नहीं सकती बद किरदार कहते हैं,
मर्द खुल कर रो नहीं सकता कायर कहते हैं..
शब्दों से तुम बन गए
पंक्तियों में मेरे ढल गए
स्याही में मेरे पिघल गए
रचना मेरी तुम बन गए।
हर छंद में तुम रम गए
मैं तुम पर अब क्या लिखूं?
मेरे गीत के नज़्म बन गए
जीने की वजह तुम बन गए।
स्वर लहरी तुम बन...
घमंड तेरा भी एक ना एक दिन ख़ाक हो जाएगा,
जिस दिन मिट्टी से बना ये शरीर राख हो जाएगा..!!
पता नहीं नसीब खराब है या मैं खराब हूं
हर उसने दिल दुखाया हैं जिसपे मुझे नाज था !!
मुझे बर्दाश्त करने की नसीहत ना दीजिएबल्कि मेरी जगह आइए और बर्दाश्त कीजिए...
मुद्दतों बाद उठाए थे पुराने काग़ज़.. साथ तेरे मिरी तस्वीर निकल आई है..!!
जो अधर्म के द्वारे जाएँगे, युगों तक धिक्कारे जाएँगे
हों कर्ण दुर्योधन या दुःशासन, हर युग में मारे जाएँगे
अम्बष्ठ
जिम्मेदारियों के मशवरे मुझे न दो
मैंने भरी जवानी में ख्वाहिशें जला डाली हैं!
शब्द पढ़ने वाले
लिखें जज़्बात नहीं पढ़ पाते..!!
खामोश रहोगे
तो
सच परेशान भी रहेगा
और पराजित भी होगा ।
शक्ल पर मरने मिटने वाले बहुत देखे ,
हृदय की तिजोरी तलाशने वाला न मिला ।
रथ रावण के पास था
संसाधन रावण के पास थे
सेना रावण के पास थी
सोना रावण के पास था
भगवान राम के पास सत्य था
आशा थी. आस्था थी. प्रेम था.
परोपकार था. विनय था. धीरज था. साहस था.
सदैव नहीं रहती...
आह जो दिल से निकाली जाएगीक्या समझते हो कि खाली जाएगी
~अकबर इलाहाबादी
मैं तेरे साथ 'गुज़ारा' भी नहीं कर सकता..
और अफ़्सोस 'किनारा' भी नहीं कर सकता..!!
रिश्ता गहरा हो या न हो,
विश्वास" गहरा होना चाहिए .