यदि आप उड़ना चाहते हैं, तो वह सब कुछ छोड़ दें जो आपको नीचे खींचता है।
बुद्ध
उम्मीद हाथ पकड़ने की है,और लोग हैं कि कमज़ोर नस पकड़ते हैं।
जरूरी नहीं कि काम से ही इंसान थक जाए,
कुछ ख्यालों का बोझ भी, इन्सान को थका देता है !
एक गुमनाम सा किरदार,
हमारा भी हैं कहीं,
जज्बात तो बहुत हैं,
मगर हक एक भी नहीं,
करना तो बहुत कुछ हैं किसी एक की खातिर,
मगर मन इसी कश्मकश में हैं कि उनके जीवन में,
हमारा कोई अस्तित्व भी तो नहीं कही ..
आंखों के समॅंदर में तूफ़ान का आग़ाज़ हैं ,अब कोई अपनी कस्तियां संभालें भी तो कैसे..!!
वाणी की मिठास अन्दर के भेद नहीं खोलती,
मोर को सुन कर कौन कह सकता है कि वह साँप खाता होगा।
अज्ञात
बस सफ़र के मज़े लो,
मंजिल सबकी मौत है.....
अल़फाज सुनने वाले हजारों लोग है मगर
खामोशी सुनने वाला सिर्फ मेरा अल्लाह है...
रोने के लिए हम एकांत ढूँढ़ते हैं,
हँसने के लिए अनेकांत।
प्रेमचंद
जैसा दिल बनाया है, काश वैसा ही नसीब भी बना देता मालिक।।
जिसकी आंखों से आंसू की उम्मीद कर रहे थे
कमबख्त उसकी आंखों में शर्म भी नहीं दिखी।
"अपनों" में रहें...
"अपने" में नहीं....!!🕊️
बस्ती नहीं सूरत अब किसी और की आंखों में,
काश कि तुम्हें इतना गौर से ना देखा होता
बेरोज़गार के लिए,
रोज़गार ही त्योहार होते हैं…
जिन साँपों को गुरूर है आपने जहर पर
मैं उन्हें बता दू कि मैं इलाज जानता हूं।
क्या थी मेरी गलती जो मुझे अकेला छोड़ गयी तू
बिना सोचे मुझे क्यों इतना तनहा छोड़ गयी तू .!!
पत्थर में भगवान है, लेकिन इंसान में इंसान नहीं !
किसी की कहानी मे ...
फिजूल का किरदार थे हम ....
कितना ख़ास बनाया था हमें ईश्वर ने
हम कितने आम बन गए हैं
मशीनों से ग़ुलामी कराते कराते
मशीनों के ग़ुलाम बन गए हैं
साधू भूखा भाव का,
धन का भूखा नाहिं,
धन का भूखा जी फिरै,
सो तो साधू नाहिं।
कबीरदास