मतलब के बिना कौन पूछता है किसी कोबगैर रुह के तो घर वाले भी नहीं रखते
तेरी फ़ोटो को देख के क्रेजी बन गए, तेरे fan थे पहले अब AC बन गए
थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे
उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे
रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो...
मरना यहाँ
बहुत है आसान
ज़िन्दगी जीना है
हिम्मत का काम
हथियार रख
मैदान छोड़ना है आसान
संघर्ष पथ पर चलना है
हिम्मत का काम
रोते रोते बिखरना और
टूट जाना है आसान
मुस्कुराते हुये गिरना और संभलना है
हिम्मत का काम
मरना यहाँ
बहुत है...
तुम छाये रहना मुझपर बसंत की बहार बनकर
मैं खिला रहूँगा तुझमें फूल 'पलाश' का बनकर
जो दूसरों का हक़ और ख़ुशी छीन लेता है,
उसके सुख की उम्र बहुत कम होती है।
आधुनिकता के नाम पर नंगे हो रहे हैं तन
इसका मतलब जानवर कहीं हमसे आगे है
जब हृदय जलता है तो वाणी भी अग्निमय हो जाती है !!!
उम्मीद हाथ पकड़ने की है,और लोग हैं कि कमज़ोर नस पकड़ते हैं।
औरत के लिए कोई व्रत नहीं रखता,
फिर भी लंबी उम्र जी लेती है!!
प्रेम करती हैं राधा की तरह,
मीरा की तरह विष पी लेती है!!
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला,कौसल्या हितकारी ।हरषित महतारी, मुनि मन हारी,अद्भुत रूप बिचारी ॥लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,निज आयुध भुजचारी ।भूषन बनमाला, नयन बिसाला,सोभासिंधु खरारी ॥कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,केहि बिधि करूं अनंता ।माया गुन ग्यानातीत अमाना,वेद पुरान भनंता ॥
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।
दस्तक और आवाज तो कानों के लिए है जो रूह तक सुनाई दे उसे खामोशी कहते है
अहंकार भी आवश्यक हैं,
जब बात आधिकार चरित्र एवं सम्मान की हो...
अपना हुस्न संभाल कर रखो
मैं इस हुस्न पर दुपट्टा डालूंगा
सबकी परेशानियां सुनते हैं,
खुद की बताने का मन नहीं करता....
तुम मिल सको तो मिल लेना,
कुछ कह सको तो कह लेना...
मैं जी नहीं पाया जुदा होकर तुमसे,
तुम जी सको तो जी लेना...
मुख़ातिब हूँ मैं ख़ुद से, मग़र बात तुम्हारी होगी..!
मैं अपने ज़हन के उसूलों से तो नहीं फ़िरने वाला।।
ख कर लगे है तुझको ये राब्ता पुराना है
तेरी ही बाहों में जैसे गुज़रा इक ज़माना है
जन्म लेना भाग्य की बात है
मृत्यु आना समय की बात है
मृत्यु के बाद लोगो के दिलों में
रहना ये कर्मों की बात है।