विनय विफल हो जहाँ, बाण लेना पड़ता है।
स्वेच्छा से जो न्याय नहीं देता है, उसको
एक रोज आखिर सब-कुछ देना पड़ता है।
ऐ बारिश जरा थम के बरस
जब मेरा यार आ जायें तो जम के बरस🌧️
पहले ना बरस कि वो आ ना सके
फिर इतना बरस की वो जा ना सके 🌧️
मुसाफिर
हर लड़का जिस्म नहीं मांगता, हर लड़की पैसे पर नहीं मरती, कुछ रिश्ते लोगों की सोच से ज्यादा पवित्र होते हैं
मन में रखते हीन भावना, पेशे से शुद्ध चाटुकार हैं,
बनते कद्दावर नेता हैं, लेकिन फितरत से गद्दार हैं..!!
संवेदनाएं कहां शेष हैं अब इन मुर्दों के शहर में,
तेरहवीं के भोजन में भी नमक के लिए लड़ पड़ते हैं..!!
विरक्ति
कोई तुम पर आंख बंद करके भरोसा करता है,तो कभी उसे ये एहसास ना होने देना की वो अंधा है...
प्रेम आपको डांट कर सुला देता है,
हवस रात भर जगाए रखती है.
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...
मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ,
वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ।
एक जंगल है तेरी आँखों में,
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ।
दुष्यंत कुमार
मूर्खो से तारीफ सुनने से बेहतर है,
कि बुद्धिमान से तुम डांट सुन लेना..!!
यही जगत की रीत है, यही जगत की नीत
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है
सफर जारी रखो, वक्त बदलने वाला है।
यशवर्धन जैन
ख़्वाब ख़्वाब ही रह गया ,
जिंदगी ने कुछ यूं हिसाब किया..!!
हादसों को जो संग ले जाना था सब ले गये,एक सबक़ ज़िंदगी का मगर हमको दे गये !
रोज़ रोज़ ये मुलाक़ात इत्तफाक तो नहीं
मेरी तरह हुजूर धड़कने बेईमान तो नहीं
हमारे भविष्य का आधार आज के यथार्थ,
लिए गए निर्णय पर निर्भर करता है..!!
कुछ ग़म और कई उलझनें है
जो दौर है जिम्मेदारियों का तो ख्वाहिशों से भी रंजिशें है.
हमें भी इश्क़ के मारों पे रहम आता है ,
ये बोझ वो है जिसे हमनें भी उठाया है ।।
कहीं चाँदी की है चम्मच
और रेशम के खिलौने हैं
कहीं काँटों का है बिस्तर
और बस सपन सलोने हैं
सुधीर...
ढलती उम्र के साथमोहब्बत बढ़ती जाएबस तुम्हारा इतना साथ चाहिए।
-नेहा यादव