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नहीं है प्यार उससे अब नहीं है मगर वो शख़्स प्यारा आज भी है

हो गई है पीर पर्वत-सी अब पिघलनी चाहिए। हर सूरत में अब इस हिमालय से कोई नई गंगा निकलनी चाहिए।

जिसके लिए सीखा था चाय बनाना अब वो हमसे बहाने बनाती है

रामचंद्र कह गये सिया से ऐसा कलयुग आएगा,देश में होगी भुखमरी, बेरोज़गारी वो उसे ही विकास बतलायेगा

हैसियत आसमान जैसी होनी चाहिए क्योंकि जमीन कितनी भी महंगी हो लोग खरीद लेते हैं !!

यकीन है "भगवान" पर, यमदूत के रूप में हमारे "पर" आएंगे, तब इस बेदर्द "जमाने" को, हम भी "उड़" कर कर दिखाएंगे..!! विरक्ति

पहले लगता था कि.... तुम ही दुनिया हो... अब लगता है कि.... तुम भी दुनिया हो....!!!

समझदारी दिमाग में होनी चाहिए,और दिल में बचपना.

हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ीख़ुदा करे कि जवानी तेरी रहे बे-दाग़ ।

तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!

मुझे दिल की बात कहने दो..मुझे ज़हर खाके के मर जाने दो

"फूल चुन कर एकत्र करने के लिए मत ठहरो। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे" ~रबीन्द्रनाथ ठाकुर

वेशक प्यार तुमने किया था हमने तो सिर्फ़ परवाह की थीवेशक मोहब्बत तुमने की थी हमने तो सिर्फ़ मन्नत की थीवेशक इश्क तुमने किया था हमने तो सिर्फ़ इबादत की थीवेशक ख्वाब तुमने दिखाया था हमने तो सिर्फ़ कोशिश की...

जलने वाले जलते रहो जलना तुम्हारा काम है,हम भी तुम्हे बुझने नहीं देंगे,क्योंकि यह हमारा काम है !

ये दुनियाँ अगर मिल भी जए तो क्या है …..

क्योंकि नहीं मिलते विचार तुम्हारे हमारे, अलग अलग रास्ते से क्यों ना पहुंचे हम मंज़िल तक

समय जब विपरीत हो, तो शांत रहना ही सही होता है...

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार

निर्दोष को मारोगे तो मिट्टी भी नसीब नहीं होगी

मे तेरे इश्क़ मैं ऐसे खो बैठा हूँ फेस वास से सर और शैंपू से मुंह धो बैठा हूँ !!


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