फिर एक दिन वो लोग भी सो जाते हैं,
जिनको रातों में नींद नहीं आती....
क्रोध शरीर को जलाता है
और पश्चाताप आत्मा को
परिवर्तन केवल कर्म से आता है,
ध्यान और प्रार्थना से नहीं।
दलाई लामा
तारीफें दिन बनाती हैं,
और ताने ज़िंदगी...
बस साथ निभाने की जो कसमें दिलाई गई थीउसका बोझ है पर प्रेम नहीं हैअब यदि वो प्रेम की बात भी कर रहे हैतो वो इसलिए कि मजबूरी हैकि पति पत्नी हैगहराई में जाकर देखा जायतो वो सामाजिक बंधन ही...
उसने हमें छोड़ा शायद कदर नहीं थी इश़्क़ की,हम अपनी वफाओं के बादशाह तो आज भी हैं..!!
प्रेम करुणा बन के आंखो से न बहे तो..
समझो अंतर मन में उतरा ही नहीं...!!
मत पूछ तेरे लिये हम कितना तड़पते थे,
आंसू छिपाकर अपने अंदर से बिलखते थे..!!
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
कुछ लोग हमारी जिन्दगी में सिर्फ,
भरोसा तोड़ने के लिए आते हैं....
हर बार के मिलने में तक़ल्लुफ कैसा ,
चाँद सौ बार भी निकले तो नया लगता है ।।
एक कतरा ही सही मुझे ऐसा तरीफ़ तो दे
किसी को प्यासा जो देखूँ तो दरिया हो जाऊँ….💫🎻
रहता नहीं कोई भी मंज़र सदा
यहां हर ताल्लुक मुसाफिराना है !
इंतज़ार करने वालों को उतना ही मिलता है,
जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं!
तुमने निकलते देखे होंगे ज़नाजे अरमानों के, हमने खुले आम दफनाई हैं ख्वाहिशें अपनी..!!
यकीनन जीत जाते तुमसे वफाओं की बात में, हम तो बस तुम्हारी रंजिशों से हारे थे... बेवजह ही तुमपर ऐतबार किया था ख़ता थी हमारी , के हम तेरे सहारे थे...!!
कान भरने वाले से दूर रहा करो,
वरना ये लोग अपनों से दूर कर देंगे…
पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते...
न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया...
इतिहास गवाह है की कोई भी वास्तविक परिवर्तन
चर्चाओं से कभी नहीं हुआ।
लफ़्ज़ों के दांत नहीं होते,
मगर ये काट लेते हैं...