धड़कने आज़ाद है , पहरे लगाकर देख लो…प्यार छुपता ही नहीं , तुम छुपाकर देख लो..!!
अगर कोई हमेशा आपको व्यस्तहोने का दिखावा करता है तो वहव्यस्त नही किसी और के साथ मस्तरहता है, कितना भी याद कर लोकितना भी जता लो एक दिन खुदको ही लगेगा कि अब अपना रास्ताअलग ही सही है सूचना जनहित...
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
बारिश__
आसमाँ का दर्दसींचती है धरतीपनपता है प्रेम
औरत बेवा हो जाती है
तो उसकी चूड़ियाँ तोड़ देते हैं
मर्द की घड़ी या ऐनक या हुक्का तोड़ने का
कभी किसी को ख़्याल न आया।
वादों की तरह इश्क भी आधा रहा,मुलाकाते कम रही इंतजार ज्यादा रहा….!!
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमेंऔर हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
~फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़रूरत बनो
ऑप्शन नहीं...
सुनो कृष्ण!!मौसम हरे रखनाऔर मन गीला
आधुनिकता के नाम पर नंगे हो रहे हैं तन
इसका मतलब जानवर कहीं हमसे आगे है
महरुमीयों की अपनी कोई इंतेहा नहीं ,कभी चेहरा नही, तो कभी आईना नही ।तुम जिस से कर रहे हो मेरे हक में बद्दुआ ,मेरा भी है खुदा, वो फकत तुम्हारा नही ।
नाराज़गी कभी वहाँ मत रखिये !जहाँ आपको बताना पड़े कि आप नाराज़ हो !!
मेरा बुरा वक्त क्या आ गया
आज अंधों को भी मेरे में कमियां दिखने लगी!!
मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं
बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं
मलिकज़ादा जावेद
मैं रास्ते भूलता हूँ
और इसीलिए
नए रास्ते मिलते हैं
कुदरत के साथ बिताया गया समय,कभी व्यर्थ नहीं जाता !
महादेव के दरबार में सबकी समस्याओं का हल है,
कीमत केवल सच्ची आस्था और एक लोटा जल है..!!
ओह अच्छा....
तो तुम कह रहे हो के बारिशों का भी मौसम होता है....
मतलब.....
तुमने देखा नहीं कभी किसी की आंखों को बरसते...!!
वैरागी
पैसे कमाते कमाते खुद कागज बन जाते हैं,
सिर्फ़ बेटियां ही नहीं बेटे भी घर छोड़कर जाते हैं।