सोचती हूँ मेहनत की कलम से.... ज़िंदगी की कहानी फिर से लिखूं...!!
खुद को श्रेष्ठ खुद नही, औरों को करने दो
खुद कहोगे तो मान नही अभिमान झलकेगा।
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!
जो जितना तुम्हारा है तुम भी उसके उतने ही रहो
ज्यादा दिल की गुलामी में इज्जत की नीलामी हो जाती है
ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो देमैं कितनी बार लूटा हूँ मुझे हिसाब तो दे।
जो रिश्ते गहरे होते हैं,
वो अपनेपन का शोर नहीं मचाते!
इश्क हारा है तो दिल थाम के बैठें क्यों हो ,
तुम तो हर बात पे कहते थे कोई बात नहीं ।।
थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में ,
कैद में रह कर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है ..!!
भाई को डांटती हुई बहन से खूबसूरत दृश्य भला और क्या हो सकता है
मोहब्बत में ऐसे दीवाने हो जाओ कि 4 लोग बोले , एक ही शख्श था क्या इस सारे जहां में...
क्यों है
तेरा इन्तेजार ?
किस बात कि
है दरकरार ,, ?
जानता हूँ
कितनी ही सदायें दूँ
तू ना आएगा पलटकर
फिर भी क्यों है
जिया बेकरार
व्यर्थ है आशु
अब पिया मिलन
की आस,,,,,
आशु
उसके आने की उम्मीद ही नही
तो उसकी आदत कैसी..
जब वो अपना ही नही
तो शिकायत कैसी..
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
कितनी भी जान छिड़क लो…
बदलने वाले बदल ही जाते हैं!!!
‘’शोक मत करो ! नहीं उतरेगा कोई भी उत्सव
बुलावे पर उनके लाल क़ालीनों पर
करेंगे सारे उत्सव प्रतीक्षा
न्योते की तुम्हारे रोककर साँसें अपनी
बस करना होगा थोड़ा सा इंतज़ार”
तुमसे प्रेम करने के बाद महसूस हुआ है कि तुमसे बात करने से अक्सर मैं अपनी सारी परेशानियां,मुश्किलें भूल जाया करती हूं,जैसे एक सुकून का अनुभव होता है,जब तुम पास होते हो तो ऐसा लगता है जैसे ईश्वर से की...
अहंकार करने पर इंसान की प्रतिष्ठा,
वंश,वैभव, तीनों ही समाप्त हो जाते हैं॥
आह जो दिल से निकाली जाएगीक्या समझते हो कि खाली जाएगी
~अकबर इलाहाबादी
जहां पत्तियां नहीं झरती वहाँ बसंत नहीं आता
बुरा वक्त रुलाता है,मगर बहुत कुछ सीखा कर जाता है !