वैसे तो चल रही है ज़िन्दगी,,तुम भी साथ चलते तो ज़िन्दगी कुछ और होती,,
~कीर्ति चन्द्रा
कैसे हार मान जाएं ,संघर्ष अभी जारी हैं मेरा..!!
सारा झगड़ा ही खवाहिशो का है ,ना गम चाहिए ना कम चाहिए ।।
रोटी कमाने की फिक्र,
रोटी खाने भी नहीं देती...
बहुत कम लोग जानते हैं
कि वो बहुत कम जानते हैं
कीचड़ में पत्थर नहीं मारा जातासूखने का इंतज़ार किया जाता है
किसी के लिए जरूरी होना,और फिर गैर जरूरी होनाहाँ , यही तो जिंदगी है…
जिंदगी बसर करनी है तुम्हें सांपों की बस्ती में,फन कुचलने का हुनर सीख लेना वरना ड़से जाओगे.
आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर ।
एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे जंजीर॥
कबीर
अपने को साधारण आदमी मानना भी एक ताक़त है।
ऐसा आदमी असाधारणता के कोई फालतू सपने नहीं देखता,
और निराश नहीं होता, टूटता नहीं।
छोटी सी लिस्ट है मेरी ख्वाहिस की,,,,,पहली भी तुम आख़री भी तुम,,,,,,
औरतें आंसूओं की झीलों से हरी रहती हैं ,
दूध और खून तो औलाद में बट जाता है
जीवन जीते जी एक संग्राम है,
पहले कुछ करके दिखाना,
फिर अहंकार की मिट्टी में उसे दबने से बचाना…
मकानों को घर मे तब्दील करने वाली स्त्रियांकरती हैं अनगिनत सब कुछ हर बारअपने आत्मसमान को दांव पर लगाकरफिर भी पाती है तिरस्कार अक्सर उन्हीं अपनों से जिनके लिए वह सबकुछ करती है
चार दिन की जिंदगीकुछ भी गिला न कीजिये,दवा, जाम, इश्क़, जहर जो मिले मजा लीजिये
मरना यहाँ
बहुत है आसान
ज़िन्दगी जीना है
हिम्मत का काम
हथियार रख
मैदान छोड़ना है आसान
संघर्ष पथ पर चलना है
हिम्मत का काम
रोते रोते बिखरना और
टूट जाना है आसान
मुस्कुराते हुये गिरना और संभलना है
हिम्मत का काम
मरना यहाँ
बहुत है...
किसी भी क्लास में नहीं पढ़ाया जाता है,
कि कैसे बोलना चाहिए ,
लेकिन जिस प्रकार से आप बोलते हैं,
वह तय कर देता है कि आप किस क्लास के हैं !
बहुत सीधा सा परिचय है जिंदगी का,
आसूं सच्चाई हैं और मुस्कुराहट एक नाटक...
बारिश की बूंदों ने शब ए फुरकत का रंज कुछ यूं आसान कर दियामेरे अश्क़ छुप गए और मैं तन्हा रह गया….!
वक़्त चाहे कितना भी बदल जाए ,..पर चाय से मोहब्बत नहीं बदलेगी…!!