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World's Best Cow Hospital

मेरे जीवन से मिला एक तजुर्बा, आज भी बहुत अहम् था, प्यार, भरोसा, वफ़ा, ज़फा, इंसान के लिये सिर्फ वहम् था..!!

पा तो लिया इंसाँ ने दोनों ही जहाँपर इंसाँ में इंसाँ ही बाकी न रहा

मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं मलिकज़ादा जावेद

साया नहीं है बाप का, बच्चा भी है गोद, मां ही जाने बच्चे का, कैसे भरना है ओझ, धूप सहे बरसात सहे या रहे शरीर से सोझ, ईंटों से ज्यादा भारी है ज़िम्मेदारी का बोझ..!!

मिडिल क्लास लड़का हूं साहब, दूसरे शहर में घूमने के लिए पेपर देने का बहाना बताना पड़ता है…!!!

मुझे दिक्कत झूठ से नहीं.. मैं परेशां अपने सच से हूँ..!!

हमारे द्वारा किया गया आचरण और व्यवहार, हमारी संतानों के संस्कारों की नींव रखते हैं.

बदले बदले से सब हुज़ूर नज़र आते हैं चुनाव तक कौन कौन वही रह जाते हैं।

“संसार में हर इंसान का परिवर्तन निश्चित है,किसी का हृदय परिवर्तित होगा और किसी का समय..!!

धीरे-धीरे हर चीज बेवकूफ लगेगी... जन्म, प्रेम, जिंदगी और आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु। सुसिल ग़ाफ़िल

आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं! — मोहम्मद अल्वी

ईमान बेचकर दौलत कमाने वालों से कह दो, फरिश्ते कब्रों में रिशवत नहीं लेते

बहुत कम लोग जानते हैं कि वो बहुत कम जानते हैं

सभ्यता का युग तब आएगा जब औरत की मर्ज़ी के बिना कोई औरत को हाथ नहीं लगायेगा।

शरीर की हिफाजत धन से भी अधिक करनी चाहिए, क्योंकि शरीर बिगड़ने के बाद धन भी उसकी हिफाजत नहीं कर सकता।

औरत ने जनम दिया मर्दों को.. मर्दों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा घुत्कार दिया

उद्देश्य और दिशा के बिना, प्रयास और साहस पर्याप्त नहीं है....

कोशिश करते रहिए ,सफ़ल हुए तो घरवाले ख़ुश और असफल हुए तो पड़ोसी ख़ुश।

ज़िन्दगी भर मेरे जीते जी तुमने मेरा मातम मनाया, आख़िरी तमन्ना है मेरी मौत पर तुम उत्सव मनाना…!!

कही बैठ कर वो मेरा जिक्र कर रहा होगा..... ये हिचकी सुबह से यूँ ही तो नहीं आ रही है मुझे...!!


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