नाम लेती हो मेरा , बदतमीज ,तुम मुझे आप क्यूं नही कहती ।।
सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख
सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।
चराग-ए-इश्क कभी दिल से जलाया न करो , जलाओ तो जलाकर नफरत से बुझाया न करो, ............ गम ये नहीं के भूल गए तुम हमको... बात ये है के , इस कदर याद तुम आया न करो...!!
अगरबत्ती की तरह तुम्हें खुशबू ही देंगे,
तुम शौक से चाहे जितना भी जला लो हमे।
किसी से क्या शिकायत करते साहब ,
दिल लगाने की खता तो हमनें भी की..!!
जिंदगी पर भरोशा कीजिए जनाबभरोरों पर जिंदगी नहीं…!!
वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे है
प्रेम की पहचान अगर शादी होती ,तो रुकमणी के स्थान पर आज राधा होती ..!!
"आजकल लोग अपने आप से ज्यादा मोबाइल सम्भाल के रखते है….क्योंकि रिश्ते सारे अब इसी में कैद हो के रहने लगे है"…!!
दर्द मिलता रहेगादिल मजबूत रखना….!!
संबंध बनाना,ऋण लेने जैसा आसान है.!किन्तु संबंध निभानाकिश्तें भरने जैसा कठिन है..!!
सुना है तारीफ के पुल के नीचे…मतलब की नदी बहती है…..!!
✯||मजबूत रिश्ते और
कड़क चाय धीरे धीरे ही बनते हैं...||✯ᵈ
✯ᵈ᭄•समंदर...༈
हिम्मत इतनी रखो..
की किस्मत छोटी लगने लगे..!!
औरत होना इतना आसान भी नहींआधे ख़्वाब दिल में ही दफ़न करने होते है….
दुनिया के साथ समस्या ये है कि बुद्धिमान लोग संदेह से भरे हैं जबकि मूर्ख आत्मविश्वास से!
दवा की बोतलाे में प्यार भर के बेचो यार,
लोग बीमारी से नहीं तन्हाई से मारे जा रहे हैं...
वृंदावन की कूंज गली मेंमही बैचने में गईनंद जी के लाल मुझे सामने मिले जबमें तो शरमा गई रेकनैया तेरी मुरली बैरन भई
पहले निचोड़ लेते हैं जिस्म अपनी आंखों से, फिर दुपट्टा संभालने कि हिदायत देते हैं..!!