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तपस्या अगर पार्वती की थी तो प्रतीक्षा शिव की भी रही होगी

न चाहते हुए भी किताबों से, हमेशा दोस्ती रखनी पड़ेगी। हम किताबी कीड़े है मेरी जान!, हमसे मोहब्बत महंगी पड़ेगी।। सेजल

सोचती हूँ लिख दूं एक किताब खुद के संघर्षों पर , फिर आता है ख्याल की पढ़ेगा कौन ....

इलाज़ ना ढूंढ तू इश्क़ का, वो होगा ही नहीं, इलाज़ मर्ज़ का होता है इबादत का नहीं..!!

ज़िन्दगी इतनी मुश्किल इसलिए है..क्यूंकि लोग आसानी से मिली चीज़ की क़द्र नहीं करते..!!

नकारात्मक लोग से किनारा करों,ये आप को कभी सफल नही होने देंगे।

जीवन में किसी को परखने का नहीं ,समझने का प्रयास करिए …

मुझसे मेरे मिजाज़ का आलम न पूछिये , क़ातिल को ख़ुद दिया है हमने कलेजा निकाल के ..!!

अनुभव उम्र से नहीं,परिस्थितियों का सामना करने से आता हैं…

मंजिल चाहें कितनी भी ऊँची क्यों न हो, रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते है।

फिर यूँ हुआ कि वक़्त ने मसरूफ़ कर दिया , वरना हमारे पास ज़माने के ख़्वाब थे ।।

दो रोटी के वास्ते, मरता था जो रोज । मरने पर उसके हुआ, देशी घी का भोज ॥

इतने कमजोर नहीं की, वफादार होने का ऐलान करें, हमें यकीन है अपने किरदार पर, जो "खोएगा", "ढूँढता" फिरेगा...

रखने की बस ये तीन ही चीज़ें हैं इन दिनों, हिम्मत रखो यक़ीन रखो और फ़ासला रखो।

बेरोजगार पुरुष, विधवा स्त्री गरीब पिता और, एक तरफा आशिक का दर्द कोई नहीं समझ सकता..

आज तो कलम ने भी ताना मार दिया ! जब कोई पढ़ता ही नहीं तो लिखते क्यू हों !!

सजा जो भी चाहो ,आप मुकर्रर कर दो, जब खता ही नहीं कई तो मुआफी कैसी।

तुम वही हो जो तुम सोचते हो !

तेरे ख़्वाबों से अच्छे मेरे ख़्यालात है,,, तुम ख़्वाबों मे भी दगा करते हो कितना भी चाहूँ तुम मेरे नहीं होते,,,, पर ख्यालतो मे तुझे मुक्कुमल पा लेता हूं


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