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World's Best Cow Hospital

कहते है किसी के घर ख़ाली हाथ नहीं जाना चाहिए..!! इसलिए मैं अपना चार्जर साथ लेकर जाती हूँ ..!!

ज़िन्दगी इतनी मुश्किल इसलिए है..क्यूंकि लोग आसानी से मिली चीज़ की क़द्र नहीं करते..!!

रास आ जायेगा एक रोज़ तेरा जाना भी , हम किसी दुःख में लगातार नहीं रोते हैं ।।

ना देवरानी जेठानी कि कोई लड़ाई ना कोई गृह कलेश था, एक ही चूल्हे में बनता था खाना, ऐसा भारतीय परिवेश था..!!

जिंदा इंसान को गिराने मे औरमरे हुए इंसान को उठाने मे,ग़ज़ब की एकता दिखाते हैं लोग…

स्त्री का सम्मान ही पुरुष की मर्दानगी हैं,और पुरुष के सम्मान में ही स्त्री की सुंदरता हैं…

दुश्मनो से निपटना तो हम खूब जानते है...मगर मेरे कुछ अपने है जो मोहब्बत से वार करते है...

जितना निभा सकते हैं उतना ही बोलें..!!

जो जवाब वक्त पर नहीं मिलते, अक्सर वो अपने मायने खो देते हैं।

"कर्म" मेरे लिए "उल्टा काम" करता है..मै जितना ज्यादाअच्छा" करता हूँ, मेरे साथ उतना ही ज्यादा "बुरा" होता है.

दो पल सुकून में खोके आते है फुरसत हो तो चलो "बनारस" होके आते है।

मजदूरों ने मेरा घर बनाया, किसान मेरे परिवार को रोटी देते हैं, इसलियें किसान मजदूर मेरे भगवान हैं।

मरना है इक रोज सभी को ही बस ख्वाहिश इतनी है उस पल हाथों में हाथ बस तेरा होरहे तू सामने मेरे और मेरी आंखों को दीदार सिर्फ तेरा हो.... जा सकूं मैं इस दुनिया से चैन से इस तरह...

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार

इल्तिजा करते हुए प्यासा परिंदा मर गया अब तो दरिया को हया से डूब मरना चाहिए राघवेंद्र द्विवेदी

तुम से नाराज़गी नहीं कोई ,हम ख़फ़ा हो गये हैं अब खुद से ।

खुद से बेखबर हूंपता नही मैं कौन हूंदर्द है ज्यादाफिर भी मौन हूंइधर उधर मैंगलियों में फिरता हूंकोई पूछले गर इकबारकी मैं कौन हूंकह दूंगा ..खुद की तलाश में हूंभटकता मैं कोई राहीदीन दुनिया से भी बेखबर हूं शायद...

दुख का प्रतीकशायद रोना नहींमौन हो जाना है !!!

हमने जिनके लिए दुआ मांगी,वो गैरों की दुआओं के तलबगार निकले, जिनकी ख़ातिर इक वक्त में खुदा थे हम,अब हम उनकी ही नज़रों में गुनहगार निकले जिन्होंने कभी लाख अच्छाइयां गिनाई थीं मुझमे,अब हम उनकी खातिर महज़ बेकार निकले…!!

लड़ाई का उद्देश्य जीत होता है। संरक्षण में कोई संभव जीत नहीं होती।


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