महादेव के दरबार में सबकी समस्याओं का हल है,
कीमत केवल सच्ची आस्था और एक लोटा जल है..!!
काश मेरी किस्मत….कोरे कागज जैसी होती…..जिस पर मैं रोज खुद लिख पाती…!!
हम को रोज़ी खींच लाई शहर के सहराओ में
फूल, तितली, एक लड़की रह गए सब गाँव में
आज शोहरत के सफ़र में याद आता है वो पल
अपना दिल रखा था हमने जब किसी के पाँव में..!!
तुम्हे केसे बताएं तुमसे क्या चाहते हैबस वफा के बदले थोड़ी वफा चाहते हैहमसे मोहब्बत की इंतहा ना पूछोहम तो सनम तुम्हे बेइंतहा चाहते हैतुझे मानते हैं तुझे पूजते हैतुझमें ही अपना खुदा चाहते हैअपने आशिक पे थोड़ा सा एहसान...
बाज के हौसले में फर्क है,वरना उड़ान कौवे भी भरते हैं।
जोर बाकी नहीं उड़ान में क्यावर्ना रखा है आसमान में क्या
रात चाहे कितनी भी
काली क्यूं न हो
मन में रोशनी का दिया
जलाया जा सकता है
उम्मीद के दीपों से
सजाकर घर अपना
आमवस को
पूर्णमासी बनाया जा सकता है..!
एक उदास शहर में
कुछ किताबें थी
एक छत चार दीवारें थीं
कुछ दोस्त थे चाय के कुल्हड़ थे
गलियाँ थी किनारे थे
एक उदास शहर में
जहाँ वो थी और ज़िंदगी थी..
जितना ज्यादा तुम उसे बाहर ढूंढते हो, उतना ज्यादा ही वो तुम्हारे अंदर होता हैं पढ़ लो चाहे दुनियां का कोई भी ग्रंथ, इश्क़ और ईश्वर हमेशा ऐसे ही तो मिलता हैं!
घर के मुखिया को सच्चा और ईमानदार होना चाहिये।
झूठा फ़रेबी और जुमलेबाज नहीं !
मेरे शौक तो छोड़ो मेरी ज़िद भी छोड़ो
मन को इतने टुकड़ों में बांटा है उसने
अब तो ज़रूरत भी मुझे ज़रूरी नहीं लगती..!!
अपमान से भरी गुलामी की जिंदगी से तो मौत हजार गुना अच्छी है ।
भगत सिंह
लम्बा धागा और लम्बी जुबान केवल समस्याए ही देते है,,इसलिए धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर रखना ही उचित है..."!!
भागदौड़ जिंदगी
सिमटी दुनियां
गिरफत में आंखे
हर वक्त देखे ...
बदला तस्वीर
बदलाव का बयार
एक पल को ओझल
अनदेखे रहा न जाए.!!
जहां तहां की खबरे
अखबारों सा व्यवहार
विपरीत प्रभाव
चस्का खराब ..!!
कभी कभी लगता है जिनको मोहब्बत में ज्यादा तमन्ना नहीं होती है न.. उनके ही ज्यादा गहरे ज़ख्म होते हैं
खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है।
जीवन नाम है सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का।
मुंशी प्रेमचंद
ख़ैर अच्छा तो कुछ नहीं , पर जो हैं सही हैं ...
भूत पहले ही बीत चुका है, भविष्य अभी तक आया नहीं है। तुम्हारे लिए जीने के लिए बस एक ही क्षण है।~ गौतम बुद्ध