"तेरा हर नज़र-ए-अंदाज पसंद है मुझे" "बस एक नज़र अंदाज करना पसंद नहीं"
जो मनुष्य अपनी निंदा सह लेता है,
उसने मानो सारे जगत पर विजय प्राप्त कर ली।
काँटों से दिल लगाया है, लहूलुहान होने दो
अभी ज़मीं कहा है बस, उसे आसमान होने दो
चहेरा काला हो तो Powder लगाते है
ओर हरकते काली हो तो Password......!!
अजनबी
प्रेम , प्यास, प्रयास की अपनी जिद होती हैंऔर अपने ही रास्ते
फिर यूँ हुआ कि वक़्त ने मसरूफ़ कर दिया ,
वरना हमारे पास ज़माने के ख़्वाब थे ।।
हमें गुमान था तुम्हारा होने का
आँखें खुली और सारा भ्रम टूट गया
कैसे थे और
कैसे हो गये हैं हम ?
खुद को ढूँढते ढूँढते
खुद में ही खो गये हैं हम ..
ना जाने क्या लिखा हैं
किस्मत की लकीरों में ?
धड़कनों से जिंदा हैं
पर दिल से सो गये हैं हम ..
जिंदगी पर भरोसा कीजिए, भरोसे पर जिंदगी नहीं...
पेट का कोई धर्म नहीं होता,राजनीति तो भरे पेट वाले ही करते हैं…
मांगना नहीं कमाना सिखों
चाहे इज्जत हो या दौलत..!!
किसी गरीब से ये बड़े शहर के लोगपैसे देकर बहुत कुछ छीन लेते है….!!
लाया हूं आपके लिए चांदी की बालियां ,
कानों में डाल के इन्हें सोना बनाइए ।।
किसी को छल कर ग़र तुम ख़ुश हो रहे हो,
तो ये तुम्हारी सबसे बड़ी नाकामयाबी है।
ईमानदारी से काम करने वालों के शौक़,
भले ही पूरे ना हों पर नींद ज़रूर पूरी होती है !!!
साथ हजारों ख्याल आयेजैसे कोई सूखी लकड़ीसुर्ख आग की आहें भरे,दोनों लकड़ियां अभी बुझाई हैं
आपका गिरना एक हादसा हो सकता है...
मगर वहीँ पड़े रहना आपकी मर्ज़ी है ..
उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा
देखो मुझे गर तुम ने समुंदर नहीं देखा
दुख उत्पन्न करने वाली चीजों से दूर रहो !
टूटते पुल, धंसती सड़कें,टपकती छतें, बेपटरी ट्रेनें, बंद नाले, डूबते बेसमेंटझकझोर रहे हैं सबअब तो जागो कम से कमजनता हो तुम जागीर नहींकिसी रजवाड़े कीवोट जो देते रहोगेभ्रष्ट, निर्लज्ज, अक्षम प्रतिनिधियों कोधर्म और जाति के नाम परमरते रहोगे यूंही सब...