मैं बागी रहूंगा हमेशा उन महफ़िलों का।
जहां शौहरत तलवे चाटने से मिलती हो।।
वो आईने में कैसे बर्दाश्त करता होगा खुद को
उसे तो धोकेबाज़ लोगो से सख्त नफरत थी..।।
कुछ ख़याल कुछ हक़ीक़त मिलाते हैं हम,
ऐसे ही पंक्तियों में ख़ुद को उतारते हैं हम।
तुम्हारी ख़ातिर तो बदला मैंने खुद को।
फिर तुम....किसकी ख़ातिर बदल गए
इश्क, इलेक्शन और शादी से पहले जो वादे होते हैं
उन्हें हवाई फायरिंग कहा जाता है...!!
जीवन अपूर्ण लिए हुएपाता कभी खोता कभीआशा निराशा से घिराहँसता कभी रोता कभीगति-मति न हो अवरूद्धइसका ध्यान आठो याम हैचलना हमारा काम हैइस विशद विश्वप्रहार मेंकिसको नहीं बहना पडासुख-दुख हमारी ही तरहकिसको नहीं सहना पडाफिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँमुझपर विधाता...
हम भूल सके हैं, न तुझे भूल सकेंगे,तू याद रहेगा हमें, हाँ याद रहेगा.
हर दौर में जुल्म रहा हैं,
और हर दौर में ज़ालिम मिटा हैं।
कुदरत को गहराई से देखो,आपको सब कुछ साफ-साफ समझ आएगा !
हर बार समझेंगे आप उनको
वो हर बार आपको तोड़ते चले जायेंगे..!!
धर्म मनुष्य जीवन को बेहतर बनाने के लिए बना था,
और आज मनुष्य धर्म को बेहतर बनाने में लगा हैं...
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं
मुझे उम्र के उस पड़ाव तक तेरा साथ चाहिए,आखिरी निवाला हो मेरा हांथ तेरा चाहिए..!!
बदनाम तो बस हमारे वहां के लोग हैंवरना माल फूंक के तो सारे काम करते हैं
पत्थर में भगवान है, लेकिन इंसान में इंसान नहीं !
किसी की गलतियों की सजा किसी और को देते है लोग बेवफाओं से हार कर...वफादारों से बदला लेते है लोग...
मोटिवेशन वाली वीडियो देख करआदमी 10-15 मिनट ही मोटीवेट रहता है।।
सारी उम्र एक ही गलती हमने बार बार दोहराई
अन्धों को आँसू दिखलाये बहरों को आवाज़ लगाई
कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ हैवो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ हैयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ हैयही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है
-कैफ़ी आज़मी