World's Best Cow Hospital

ये कैसा भार हैं जब मैं मुझमें ही रिक्त हूं..!!

नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो। मैथिलीशरण गुप्त

मेरी आँखों में ये जो पानी है, तेरी आँखों की मेहरबानी है।

मुझे जब भी उसकी याद आती है, मुझे सुलाने में सारी रात हार जाती है!!

शीशे टूटने के बाद कहाँ जुड़ पाते हैं जो जुड़ भी जाए तो एक ही अक्स हज़ार नजर आते हैं।

प्रेम तो आज भी उसी रुप उसी मिठास में है बस उसे निभाने वाला मनुष्य ही अधिक समझदार हो गया है। ~ राजेश गौरी

व्यर्थ का तक़ल्लुफ़ क्यों किसी से निभाना..जहाँ दिल न मिले वहाँ हाथ क्यों मिलना..!!

गरीबी शिक्षा सस्ती करने से कम होगी ,मुफ्त के राशन से नही।

जिंदगी में गम बहुत है,खुलासा मत होने देना, लबों से मुस्कुरा देना,मगर तमाशा मत होने देना..!!

अजीब अदा है लोगों की ... नजरें भी हम पर और नाराजगी भी हमीं से...!

मुकद्दर में लिखीकोई बात हो तुम,तकदीर की एकखुबसुरत सौगात हो तुम,करके प्यार तुम्हेंमहसूस किया जैसे,सदियों से यूं हीमेरे साथ हो तुम..!

अजीब होती है इंसान की फितरत निशानियों को महफूज़ रखकर इंसान को खो देते हैं।

शुरुआत हो चुकी हैं अब बादशाह के साथ बेगम भी नाचेंगी..!

अहंकार का बस इतना ही सच है दिल से जुड़े रिश्ते भी खा जाता है।

हम नास्तिक लोग इस धरती को स्वर्ग बनाना चाहते हैं, और आस्तिक मूर्ख लोग काल्पनिक स्वर्ग के चक्कर में, इस धरती को नर्क बना रहे हैं।।

गिरता न कभी चेतक तन परराणाप्रताप का कोड़ा थावह दौड़ रहा अरिमस्तक परवह आसमान का घोड़ा था था यहीं रहा अब यहाँ नहींवह वहीं रहा था यहाँ नहींथी जगह न कोई जहाँ नहींकिस अरिमस्तक पर कहाँ नहीं

कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में

पिताजी के बाहर जाने पर मां कभी किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती थीं. खुली छोड़ देती थीं सांकल कभी कभी पिताजी कुछ दूर जाकर लौट आते थे कहते हुए.. कि कुछ भूल गया हूं और मुस्कुरा देते थे दोनों... मां ने सिखाया... किवाड़ की खुली सांकल किसी के लौटने...

पहले प्यार अंधा होता था फिर उसने अपना इलाज़ कराया, अब वो सब देखता है गाडी,बांग्ला,पैसा !!

हमेशा सही के साथ खड़े रहो,भले ही अकेला क्यों ना रहना पड़े…


Concept, Created & Designed by sureshjain.com


© copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.

Translate »