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World's Best Cow Hospital

मत करो हमसे यूँ ग़ैरों जैसा सलूक ख़बर हम भी रखते हैं लावारिस हैं हम

बेरोज़गार के लिए, रोज़गार ही त्योहार होते हैं…

तिनका सी मैं औरसंमुदर सा इश्क़,डूबने का डर औरडूबना हैं इश्क़ ,,,

दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।

बहुत कुछ चाहिए नहीं मुझे ,मुस्कुराने के लिए,तुम्हें मुस्कुराता हुआ देखूं,बस इतना काफी है मेरे लिए । _अर्चना शर्मा

शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैंकि सब कुछ शुरू से शुरू होलेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैंहमें कोई दिलचस्पी नहीं रहतीकि वह सब कैसे समाप्त होता हैजो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ थाहमारे चाहने पर। ~ कुँवर नारायण

बहुत अच्छे होकर भी आप हर किसी के लिए अच्छे नहीं हो सकते कहीं बुरे बना दिए जाते हैं तो कहीं बुरे साबित कर दिए जाते हैं !!!

सूरज जैसा बनना है तोसूरज जितना जलना होगानदियों सा आदर पाना है तोपर्वत छोड़ निकलना होगा...

ईमानदारी से काम करने वालों के शौक़, भले ही पूरे ना हों पर नींद ज़रूर पूरी होती है !!!

घर छोड़ा नादानी में बीवी छोड़ी जवानी में, देश बेचा बुढ़ापे में भक्त खुश हैं गुलामी में !

मेरी आस्तीन में ऐसे सांपों का बसेरा है, मेरे मुंह पर मेरा है 'तेरे मुंह पर तेरा है !!

ये दो शब्द जीवन को नष्ट कर देते है..पहला "अहम" और दूसरा "वहम"…!!

हसीनों की गलियों से आँखें बंद कर गुज़रना  लड़ गयीं जो उनसे आँखें, गड्ढे में जा गिरोगे।

चलो अपने अपने गिरेबाँ में हम झाँक आते हैंकहीं हम ही तो नहीं हैं बे-ग़ैरत सबसे ज्यादा

बेहिसाब उधड़ी पड़ी हैं ख्वाहिशों की चादरें कोई दर्जी सलीखे का शहर में बिठाया जाए!

सबसे बड़ी ख़ुशी उसी काम को करने में है ,जिसे लोग कहते हैं कि ये तुम्हारे बस का नहीं है …

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे

हिसाब भरी ज़िन्दगी को बेहिसाब जिया जाए , महीना सावन का आ गया है महादेव से इश्क किया जाए ..!!

जो वफादार होते है वो, हर किसी के दीवाने नही होते..।

शब्दों से तुम बन गए पंक्तियों में मेरे ढल गए स्याही में मेरे पिघल गए रचना मेरी तुम बन गए। हर छंद में तुम रम गए मैं तुम पर अब क्या लिखूं? मेरे गीत के नज़्म बन गए जीने की वजह तुम बन गए। स्वर लहरी तुम बन...


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