मिलकर सबसे रहिए यारों,
लेकिन दबकर किसी से भी नही...
तजुर्बा उम्र नहीं मुर्शदतजुर्बा हालात सिखाते हैं
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
इस मुल्क की रीत है कि यहाँ लडकियाँ ब्याह कर दिलों में नहीं, घरों में जाती हैं।
राही मासूम रजा
मैं दोस्ती का हर एक बढता हाथ चुमता हूं
बस एक शर्त है , बंदा नमक हराम ना हो
वैसे तो बहुत बुरा हूॅं मैं लेकिन दो चेहरे नहीं रखता !!
ख़ुश मिजाजी मशहूर हैं हमारी सादगी भी कमाल है
हम शरारती भी बेइंतेहा के है तन्हां भी बेमिसाल है
रोने के लिए हम एकांत ढूँढ़ते हैं,
हँसने के लिए अनेकांत।
प्रेमचंद
तुम्हारी हर बात का अर्थ मुझे समझ आता है ,, कान्हा ... इसलिए अब मैं किसी से ,, कोई शिकायत नहीं करती ...
ये रविवार नही आसान
कपड़ो का दरिया है
धो धो कर सुखाना है.
मां सीता जिंदा मिली यह राम जी की ताकत थी लेकिन
मां सीता पवित्र मिली वह रावण की मर्यादा थी
दया अगर लिखने बैठूं होते हैं अनुवादित रामरावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम
~अज़हर इक़बाल
स्वभाभिमान से जीने की आदत डालिए और
कुछ फ़ालतू लोगों को सूची से ब्लॉक कर दीजिए..!!
ये ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं, जितनी हम समझ रहे थे,
इश्क़, समझौते और जिम्मेदारियों के तजुर्बे रोज़ मिल रहे थे..!!
निगाहें आज भी उनकी याद में बेचैन रहती हैं,
ये दिल उदास रहता है जुबां खामोश रहती हैं,
जब मयस्सर दीदार उनका ख्वाब में होता है,
तब नींदें हराम होती हैं आंखें रो पड़ती हैं..!!
विरक्ति
आज मैं उधर से निकला था जहाँ हम मिलते थे,
किसी ने वहाँ दीवार खड़ी कर दी.
जहाँ तक मुमकिन था मै तुम्हारे पीछे भागा, अब इस से आगे तुम्हारी बदनसीबी है..
किसी से भी उलझने का अब मन नही करता ,
आप सही , मैं ग़लत , बात ख़त्म …
अदाओं का खेल है बहुत सारा.
कुछ लोग ज़िस्म पर भी मरते होंगे.!