छोड़ने वाले छोड़ जाते है मुक़ाम कोई भी हो,निभाने वाले निभा जाते है हालात कोई भी हो
चुपके से भेजा था गुलाब उसे...खुशबु ने पूरे मोहल्ले मे शोर मचा दिया...
हिसाब भरी ज़िन्दगी को बेहिसाब जिया जाए ,
महीना सावन का आ गया है महादेव से इश्क किया जाए ..!!
क़त्ल हुआ हमारा इस तरह किश्तों में..!!कभी ख़ंजर बदल गए कभी क़ातिल बदल गए.!!
प्यार की बातें करके, बस हवस मिटाते हैं लोग...
तुम्हें याद करके सोने की आदत थीआज तुम्हें याद करके रोने की आदत हो गई
हम वो खामोश समंदर है..
जिसके पहलू में तूफान पलते है..!!
रूठ जाने कि सदी गुज़र गई..
अब नज़र अंदाज़ करने का ज़माना है..!!
चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें,
दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का...
तू समझा नहीं जिंदगी का मकसद,तू उलझा रहा लोगों की गलती ढूंढने में.
मैं तुम्हरे साथ हूं कहने में और,रहने में बहुत फर्क होता है!
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
धीरे-धीरे
हर चीज बेवकूफ लगेगी...
जन्म, प्रेम, जिंदगी
और
आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु।
सुसिल ग़ाफ़िल