जब वजूद में 'माँ' मिलती हैतो सारी पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैंऔर मुझमें 'माँ' शेष रह जाती है।
-नेहा यादव
रुतबा रोब का होना चाहिए,
अकड़ तो कुत्ते की पूंछ में भी होती हैं…
मुझे दिक्कत झूठ से नहीं..
मैं परेशां अपने सच से हूँ..!!
अजब सी खामोशी हैं मेरे अंदर तेरे जाने के बाद....
मै चीखती हु, चिल्लाती हु मगर शोर नहीं होता!!
जीवन की एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि ,आधे रिश्ते तो लोग इसलिए निभाते हैं ' क्योंकि भविष्य में उनसे काम पड़ सकता है ….
दिल चाहता हैं कि फिर अजनबी बनकर देखेतुम तमन्ना बन जाओ हम उम्मीद बनकर देखे
अपना ज़मीर जिंदा रखो,
ये पार्टीया तो आती जाती रहेंगी…
दौलत हुनर में बदल देती है ऐबों को, दो लात ऐसी दौलत पे जो सितम करती हो मजलूमों पे।
मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ
काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ
भारत भूषण पन्त
अजीब है..
औरत खुल कर हंस नहीं सकती बद किरदार कहते हैं,
मर्द खुल कर रो नहीं सकता कायर कहते हैं..
राजनीतिक भाषा की रचना ऐसी हैं जिसमे झूठ को सच बताया जाता हैं,
और सच का बड़े सम्मान के साथ हत्या किया जाता हैं
शब्दों का भी तापमान होता है साहब ,
ये सुकून देते हैं तो जला भी सकते हैं।।
औकात जो नाप रहे हो ज़ुबान की धार से ,
ज़रा ख़ुद में झाँक लो ज़मीर के दीदार से...
नमाज में दुआऔर मोहब्बत में निकाह बहुत जरूरी है !
निगाहें आज भी उनकी याद में बेचैन रहती हैं,
ये दिल उदास रहता है जुबां खामोश रहती हैं,
जब मयस्सर दीदार उनका ख्वाब में होता है,
तब नींदें हराम होती हैं आंखें रो पड़ती हैं..!!
विरक्ति
इस रात के पैरों में किसने ज़हर ए खंजर बांधें है
रोज आशिकों की रूह पर नया निशान बनाती है
इंसानी फितरत है साहब,
सज़ा हो या सलाह सिर्फ दुसरो को ही दी जाती है….!!
यक़ीनन सूरज चढ़ेगाइस रात का रंग उतरेगा
पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है ,मगर प्यार और संस्कार नहीं ...
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में