पेट का कोई धर्म नहीं होता,राजनीति तो भरे पेट वाले ही करते हैं…
काम करने वाला मरने से कुछ घंटे पूर्व ही वृद्ध होता है।
~वृंदावनलाल वर्मा
घमंड में आकर अपना सर ऊंचा ना करें,जीतने वाले भी गोल्ड मेडल झुक कर हासिल करते हैं…
अगर विश्वास खुद पर हो तो, उजड़ी हुई जिंदगी भी खिल जाती है ..!!
मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा।
तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा॥
ये शबनमी लहजा है आहिस्ता ग़ज़ल पढ़ना
तितली की कहानी है फूलों की ज़बानी है
आंखों के समॅंदर में तूफ़ान का आग़ाज़ हैं ,अब कोई अपनी कस्तियां संभालें भी तो कैसे..!!
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
मंज़िल से ये कहो... के करे मेरा इंतज़ार ठहरा हुआ जरूर हूँ... भटका नहीं हूँ मैं...
मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं
बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं
मलिकज़ादा जावेद
रास्ते ख़ूबसूरत हो तो मंज़िल की परवाह क्यूँ करनादिल में अगर सुकून हो तोबेचैनियों की फ़िक्र क्यूँ करना
बहुत आसान नहीं थानज़दीकियों का फ़ासलामीलों तय किया हैअपनों को अपना समझते समझते!
पुरुष पेड़ पे लगे उन पत्तो कि तरह होते है,
जिन्हे धूप तो मिलती है पर छाँव नहीं..
मेरा संघर्ष एक दिन मुस्कुरायेगा, पाँव से काँटा ख़ुद ही निकल जायेगा
आप ऐश कीजिए जेब में रखीं दौलत से ,
मैं तो झोले में इंसानियत रखकर खुश हूं ।।
हाथ भी नहीं मिलाते उन लोगों के साथ
जिनकी रूह से हमें गद्दारी की बदबू आती है।
अगर तुमअपनी सांसों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपनी धड़कनों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपने छूटते प्राण को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अन्यथाजाने दो जिसे जाना है,
मत करो विलाप किसी के जाने का
~ अम्बष्ठ
कभी कभी सोचता हूं इन ऊंची ऊंची,
इमारतों में कितने गिरे हुए लोग रहते हैं...
सबकी परेशानियां सुनते हैं,
खुद की बताने का मन नहीं करता....
ज़ुल्म यह है कि जिंदगी लावारिस सी हो गई है ,,
गुरुर यह है की ख्वाहिश से अब भी जिंदा है..!