किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे..
किसी को रूला कर हंसे तो क्या हंसे..!!
ऐसे ही नहीं बन जाते गैरों से रिश्ते,कुछ खालीपन अपनों ने ही दिया होगा।
~गुलज़ार
संघर्षो के दिनों में, तन्हा हर इंसान होता है।
साथ न कोई यार होता है, और न इतवार होता है।।
ठाकुर का कुँवा,
ठाकुर का खेत
ठाकुर की हवेली
अब नहीं चलेगा....
प्यादो से बस्ती जलवाकर राजा मातम मनाते हैं,राजनीतिक लोग इसी चक्रव्यूह में शासन चलाते हैं।
जहाँ तुम मिलोगे,जाना बस वहीँ तक है…!
सुनसान रास्तों पर भी , ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये , लाजवाब बेशुमार लगती है ,,भीड़ थी आसपास बहुत कि उलझनें और उलझ गई ,, इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,, अब ना कोई...
तुम इस शहर की रिवायत से
अनजान हो मेरे दोस्त,
यहाँ याद रहने के लिए
पहले याद दिलाना पड़ता है.....
जिंदगी और चाय में एक बात तो है ,
जब मजा आने लगता है ख़त्म हो जाती है ।।
मोमबत्ती को आखिर में ही पता चलता है कि
उसे उस धागे ने ही खत्म किया,
जिसको वो सीने में छुपाए रखती थी...
मै प्यार लिखता रहा वो प्याज पढ़ती रही.. एक शब्द ने मेरी मोहबत को सलाद बना दिया..!!
जो हकीकत में हुआ वो ख्वाबों में कहां था,
जो ज़िंदगी सिखाती रही वो किताबों में कहां था...
जहा गलती न हो वहां झुको मत और ,
जहाँ इज़्ज़त ना मिले वहां रुको मत !!
शाख से टूटे हुए फूल ने सबक दिया, ज्यादा अच्छे बनोगे तो लोग तोड़ देगें..
ए इश्क़ मुझे अब और जख्म चाहिए,
मेरी शायरी में अब वो बात नही….!!
चलो अपने अपने गिरेबाँ में हम झाँक आते हैंकहीं हम ही तो नहीं हैं बे-ग़ैरत सबसे ज्यादा
ना बाप का साया,
ना रिश्तेदार और ना ही कोई रहबर है,
सर पर कई जिम्मेदारियां ऊपर से मुफलिसी का कहर है..!!
पता है मुझे ऐ ज़िन्दगी
कदम कदम पर
तू मुझे रुलायेगी
मगर याद रख
तेरे ज़ुल्मों सितम की उम्र है छोटी
मेरे होंठों की हंसी से
तू पल पल मात खायेंगी
अपनी इच्छाओं को सत्यापित करने के लिए अपने शब्दों को सत्य बनाओ
यादो मे बसर हो रही थी ज़िन्दगीजब से आने का पैग़ाम आयापलपल बेकली इंतजारो का हुआ अंत हर आती हवा की सरसराहट पर भिनी खुशबू आने लगी उनकी मुन्तजिर निगाहे ढूंढ रही मोहब्बत-एकशिश की परवाहबरकत है उनकीकुछ श्रृंगार कर लें…तो...