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सबूत तो गुनाहो के होते है !बेगुनाह मोहब्बत का क्या सबूत

मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन आवाज़ों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन निदा फ़ाज़ली

देख कर परेशान हूं रिवाज दुनिया का अब जूठ बोलकर भी लोग शर्मिंदा नहीं होते।

कितनी गफलत में ज़िंदगी गुज़र रहा हूँ, मत पूछो। चराग़ ढूंढ़ रहा हूँ, हाथ में अंधेरा लिए...

लफ़्ज़ों के दांत नहीं होते, मगर ये काट लेते हैं...

गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है मैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है

इतना भी मत वफ़ादार बनिए कि लोग पालतू समझ बैठें।

कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।

तुम न कर सकोगे मेरे दिल के दर्द का इलाज़ , ज़ख्म को नासूर हुए मुद्दतें गुजर गयीं

वफ़ा और मोहोबतों के ज़माने गए,अब तो दिल बहलाने का सामान है मोहोबत !!

चाहें गणित हो या मोहब्बत,बदनाम तो सिर्फ X होता हैं …!!!

अपमान से भरी गुलामी की जिंदगी से तो मौत हजार गुना अच्छी है । भगत सिंह

सत्य के लिए किसी से भी नहीं डरना गुरु से भी नहीं मंत्र से भी नहीं लोक से भी नहीं वेद से भी नहीं

तुझे नहीं आएंगी मुफ़लिसी की मुश्किलात समझ, मैं छोटे से घर का बड़ा हूँ ....... मेरी बात समझ !!

पवित्रता किस को रास आती है यहाँ जनाब , सब के सब "जिस्म"के कीचड़ में "इश्क़"ढूंढते हैं.

हर रात तुम्हें भूल जानें की ख्वाहिश से सोती हूं,हर सुबह फिर एक बार तेरे हो जानें के ख़्वाब लिए उठती हूं!

मुसाफिर है हम, मुसाफिर हो तुम भी न जाने किस मोड़ पर फिर मुलाकात होगी...

जब एक बार जला ली हथेलियां अपनी फिर खुदा ने भी उस हाथ में दिया ना दिया

मैंने कब चाहा कोई मेरे साथ चले, "कहा ज़रूर

काश एक शायरी कभी,तुम्हारी कलम से ऐसी भी हो,जो मेरी हो मुझ पर हो और,बस मेरे लिए ही हो..!!


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