जीवन में हमेशा एक दूसरे को,
समझने का प्रयत्न करे परखने का नहीं...
हर एक हर्फ का अन्दाज बदल रक्खा हैआज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा हैमैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दियामेरे कमरे में भी एक ताजमहल रक्खा है।
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने मेंतुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
जिंदगी में खुशियां यूटयूब की ऐड जैसी है मेरी..कुछ पल के बाद खत्म हो जाती पता नही चलता..!!
खूबसूरत तो औरतें होती हैंहम मर्द तोसिर्फ अमीर या गरीब होते हैं
क्यूँ हर दफ़ा ख़ुशियों की क़ीमत आंसुओं से चुकानी पड़ती है..?
ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।
अपना तन सीतल करै, औरन कौं सुख होइ॥
दाग़ जब चरित्र पर हो तोफिल्टर लगाने से साफ नहीं होते…..!!
तभी तक पूछे जाओगे जब तक काम आओगे
चिरागों को जलते ही बुझा दी जाती है तीलियां .!!
मौन और एकांत आत्मा के,
सर्वेत्तम मित्र हैं....
स्त्रियां कायनात गढ़ती रही है….फिर भीअस्तित्व के लिए लड़ती रहीं हैं….!!!
तेरे लौटने के इंतेजार में,तेरी यादों से मोहब्ब्त हो गई….
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है,
पर यह पशु की तौहीन है,
पशु बलात्कार नहीं करते,
सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
उम्र छोटी, किरदार हजार, अनुभव लाख पाए थे,
तक़दीर कि मिली ठोकर से हम शून्य पर आए थे..!!
विरक्ति
मन का झुकना भी बहुत जरूरी है,
सिर्फ तन झुकाने से भगवान नहीं मिलते.....
कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
सारे ही काम जरूरी थे जिंदगी में और होते भी गए
एक खुदा तेरी इबादत ही थी जो हर बार टालती गयी
ग़ुरूर में बन्दा खुद को
हर इक से जुदा समझता है
अधूरा आदमी ख़ुद को
ख़ुदा समझता है
अभी ख़मोश हूं तो
ताअल्लुक़ की ज़िंदगी के लिए
ख़बर नहीं वो मेरी चुप्पी को
क्या समझता है।
कुछ सवालों के जवाब बड़ी ख़ामोशी सेबह जाते हैं आँखों के कोरों से
छुपा दिये जाते हैं उनके सूखे हुए दागभीगे हुए मन के रूमालों में
सपने पूरे होंगे लेकिन आप ,
सपने देखना शुरू तो करें..!!