ख़्वाब ख़्वाहिश ख़ैरियत है ज़िंदगीहक़ीक़त उल्फ़त कैफ़ियत है ज़िंदगी
एक उम्र के सौदे में बंधी हुईइनायत इबादत तबियत है ज़िंदगी..!
~ नेहा यादव
जब नाश मनुज पर छाता है
पहले विवेक मर जाता है।
दिनकर
सिर्फ सांत्वना स्वीकार नही,
इस बार पूरी तरह से न्याय चाहिए।
हैवानो की सजा के साथ - साथ,
हर नजर में पुराना सम्मान चाहिए।
सेजल
हो गई है पीर पर्वत-सी अब पिघलनी चाहिए।
हर सूरत में अब इस हिमालय से कोई नई गंगा निकलनी चाहिए।
हारकर अपनी तक़दीर से,अवसादों के बीच भंवर में खोया था, जब मौत मांग रही थी ज़िन्दगी,मैं सिसक सिसककर रोया था.
कुछ गलत पतों ने हमें आजीवन यात्री बना दिया!
अक्सर में हवाओ के खिलाफ चलता हूँ
जिन्हें तुम जमीनी खुदा कहते हो ना,,,,,
हाँ में उन्ही मसीहाओ के खिलाफ लिखता हूँ !
जिंदगी में दो गलतियां कभी मत करनापहली लड़की पर भरोसा दूसरा गलती से भी भरोसा
कुछ लोग भूलने के नहीं,
बल्कि दफनाने के काबिल होते हैं...
जिनके ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है
उनके पास रुठने और टूटने का वक्त नहीं होता..
जीवन में चाहे परिस्थितियां कैसी भी रहें,
वो अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाता है,
और पत्नी के प्रति यदि वफादार है पुरूष,
तो मां बाप के लिये श्रवण कुमार कहलाता है..!!
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
आगे सिर्फ अंधेरा है,इसलिए इस बार अपना वोट सोच समझ कर दें !
जिस स्त्री को पूजते रहे कभी दुर्गा कभी काली में,
आज उसकी अस्मत सरेआम नीलाम की है पांचाली में..!!
जितनी शिद्दत से आप दुश्मनी निभाते हैं,
काश ! उतनी शिद्दत से दोस्ती भी निभाई होती...!
मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द को जाने कौन
आवाज़ों के बाज़ारों में
ख़ामोशी पहचाने कौन
निदा फ़ाज़ली
मैं इज़हार करूं तो ना भी हो सकती हैं, तुम करो तो हां की जिम्मेदारी मेरी ...
यादें दस्तक देती हैं
आँखें नम हो जाती हैं
होठ खामोश रह जाते हैं
दिल की धड़कनें
शोर बहुत मचाती हैं
मधुलिका
खुश रहने का बस एक ही मंत्र है
उम्मीद बस खुद से रखो किसी और इंसान से नहीं।
अब्दुल कलाम
जहा गलती न हो वहां झुको मत और ,
जहाँ इज़्ज़त ना मिले वहां रुको मत !!