यही खशियत है जिंदगी की
कर्ज वो भी चुकाने पड़ते है जो लिए ही नही
बुरा वक़्त हमेशा इंसान को ,अकेला कर देता है …
मर्द पढ़ा तो ब्याह लाया अनपढ़ को भी ,औरत पढ़ी तो सैकड़ों पुरुषों को नापसंद किया।
~ अज्ञात
तेरा साथ जो मिल जाए तो मंजिल दूर नही... दुआ मुकम्मल हो जाए तो जिंदगी दूर नही...!!
अपनी तन्हाई का वजूद हूँ मैं,
कुछ न होने के बावजूद हूँ मैं !
पवर पहचान बना सकती है
सम्मान चाहिए तो कर्म करो।
रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैंसब तेरी ओढ़नी के तार नज़र आते हैं
कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझेआप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
~ ज़ुबैर अली ताबिश
इबादत में बैठे हुए लोगों को मारने पीटने का काम
शैतानों का होता है इंसानों का नहीं...
आजकल हमें डुबाने की,नाकाम कोशिशें वही कर रहे हैं,जिन हरामखोरों को तैरना,हमने ही सिखाया था !!
जहाँ तुम मिलोगे,जाना बस वहीँ तक है…!
"अगर सीखना है तो समंदर से सीखो...
वो बड़ा हो के भी अपने दायरे में रहता है"...!!
कितनी गफलत में ज़िंदगी गुज़र रहा हूँ, मत पूछो।
चराग़ ढूंढ़ रहा हूँ, हाथ में अंधेरा लिए...
कोई तो जिद करे हमसे भी मिलने की ,
हमें भी महसूस हो हम भी आरजू है किसी की ..!!
दिखा के मदभरी आंखें कहा ये साकी ने , हराम कहते हैं जिसको यह वो शराब नहीं
ख़ुद को ख़ुद से आज़ाद किया, जा, तुझको हमने माफ़ किया !
मैं जिंदगी से भागना नहीं,
उससे जुड़ना चाहता हूं....
एक तुम गये केपूरा काफिला गयातूफा था तेजपेड़ को जड़ से हिला गया ….
जब सल्तनत से दिल काही राजा चला गयाफिर क्या मलाल तख्तगया या किला गया….
गाँव को छोड़ के हम शहर कमाने आए
अब ये एहसास हुआ जान गँवाने आए!
में दौड़ दौड़ के खुद को पकड़ कर लाता हुतुम्हारे इश्क ने बच्चा बना दिया मुझे...
तेरे वास्ते फलक से चांद लाए थे सोलह सत्राह सितारे संग बांध लाए थे ज़रा सी देर क्या हुई हमे आने में तुम चले गए किसी और की जिंदगी सजाने में…!!