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मेरे हिस्से में भी ये दिन आए.... हथेली मेरी हो और अपने नाम की मेहंदी तू लगाए !

ईद आई तुम ना आए क्या फायदा हैं ईद काईद का नाम ही है दीदार एक दूजे कि दीद

जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बांध मुझे। रामधारी सिंह दिनकर

आँखों से निकले हर आँसू कोतलाश होती है अपनी एक मुस्कान की …

जो देख के हँसता था हम जैसे फ़क़ीरों कोशोहरत की बुलंदी से उतरा तो बहुत रोया-रईस अंसारी

जीवन में दुःख और आनंद दोनों आते रहते हैं, इन्हें स्वीकार करो और आगे बढ़ो

ख़ुदख़ुशी करने से मुझे परहेज नहींबस शर्त इतनी हैं की फंदा तेरी जुल्फो का हो….!!

मुझमें बसने वाले शख्स ने,❣️✨❣️मुझमें रहना छोड़ दिया..!!!

खुद को इतना भी कमजोर ना समझो कि किसी ऐरे गेरे के एहसान की जरूरत हो..!!

हमें कई पराजयों का सामना करना पड़ सकता है, पर हमें पराजित नहीं होना चाहिए।

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा।

किसी के साथ ऐसी बहस मत करो, की बहस जीत जाओ मगर रिश्ता हार जाओ

सुविधाएं अगर हमारी आजादी को गिरवी रख लें, तो उन सुविधाओं का सुख सहूलियत मात्र नहीं होता, गुलामी में बदल जाता है। चित्रा मुग्दल

बाज के हौसले में फर्क है,वरना उड़ान कौवे भी भरते हैं।

उठे तो सैकड़ों हांथ थे उसके चरित्र पर,काश एक हांथ उसकी आबरू भी ढकता..!!

सभ्यता का युग तब आएगा जब औरत की मर्ज़ी के बिना कोई औरत को हाथ नहीं लगायेगा।

हमें गुमान था तुम्हारा होने का आँखें खुली और सारा भ्रम टूट गया

सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।

बाप गरीब जरूर है लेकिन इस बेटी के लिए , एक राजा की तरह सभी ख्वाइशें पूरी करता है ।।

बुरा तो तब लगता है जब छिपकली और कॉकरोच से,डरने वाली लड़की दिल से खेल जाती है.


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