जिंदगी ने यूँ उधेड़ा बुन न पाये,चाह थी क्या, क्या मिला हम चुन न पाये.
जो लोग हमें कामयाबी की दुआ दिया करते थे,आज वो ही हमसे जलने लगे है !
वृक्ष के समान बनो जो कड़ी गर्मी झेलने के बाद भी सभी को छाया देता है।
महाकवि कालिदास
उम्मीद पर ज़ीना ,
जीने की आखिरी उम्मीद है..!!
प्राण देना प्रेम नहीं...किसी के प्राण बन जाना प्रेम है...।
कइयों को देख गुज़रा हूँतुझको को देख ठहर गया…..!!
दुनिया के महंगे से महंगे ऐशो आराम भी ,
मां की गोद सा सुकून नहीं दे पाते हैं ।।
इज्ज़त, आबरू और अपनी मर्यादा समझते बूझते,एक स्त्री के जीवन काल कि तस्वीर धूमिल हो जाती है..!!
अच्छे संस्कार किसी मॉल या बाजार में नहीं,
परिवार के माहौल से मिलते हैं...
घास बड़ी होती हैतो आपस में दोस्त हो जाती है पेड़ बड़े होते हैं तो अकेले हो जाते हैं…..
~ लीलाधर जगूड़ी
सर जिनके सलामत हैं,वो शर्मिंदा तो होंगे, याद आएगा जब उनको कि दस्तार कहाँ है? ~ अभिषेक शुक्ला
हो सके तो समझाना मुझे,
वर्ना गलत समझ कर भूल जाना..
फीते से क़िरदार को क्या नापे कोई , हकीकत इंसान की हरक़त बता देती है।
ये कैसा नशा है मैं किस ख़ुमार में हूँ तू आके जा भी चुका है मैं इंतज़ार में हूँ
खुशी आपके नजरिया पर निभर्र करती है,आपके पास क्या है उस पर नहीं.
ख़्वाहिशों पर पाबंदी ख़्वाबों पे पहरा है ,
कौन समझेगा दर्द मेरा कितना गहरा है।।
मेने खाया है चिरागों से धोखा इस कदर जल रहे है सालो से मगर रोशनी नहीं होती
मन करे कभी कुछ अच्छा करने का,
तो हांथ किसी विधवा का थाम लेना,
किसी बेसहारा अभागी स्त्री कि,
मांग फिर से तुम संवार देना,
और ये कैसा समाज है जो बेटे को,
दूसरे विवाह के लिए हां कहता है,
वहीं दिखाकर डर घर कि इज्ज़त,...
रावण सबके मन में हैं,राम अभी तक वन में हैं……!!
आपको लेकर मेरा खयाल नहीं बदलेगा,
साल बदलेगा मगर दिल का हाल नहीं बदलेगा।