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ज़िंदगी के सफ़र में नुक़सान बस इतना हुआ जो वहम था अपने हैं' वो सिलसिला ख़त्म हुआ.!

यूँ तो अमरोहा से मेरा कोई नाता ना था फिर कमबख्त नामुराद मोहब्बत हुई और उसपर सितम तुझ बेवफा से हुई और हम खुद बे खुद जॉन ऐलिया के मुरीद हो गए

जब कभी मुझे तुम्हारी याद आती हैं तो मैं नहीं देखती हमारी तस्वीरें,मैं पढ़ती हूं तुम्हारी लिखी कविताएं जहां मैं और तुम हमेशा साथ होते हैं !

जिंदगी में हजारों लोग आवाज देंगे, मगर वही बैठना जहां अपनेपन का एहसास हो...

एक उदास शहर में कुछ किताबें थी एक छत चार दीवारें थीं कुछ दोस्त थे चाय के कुल्हड़ थे गलियाँ थी किनारे थे एक उदास शहर में जहाँ वो थी और ज़िंदगी थी..

उसने कहा ‘‘फिर मिलेंगे” मैंने कहा “जल्द लौटना” उसने कहा “क्यों?” मैंने कहा “आज से पहले मैंने किसीका यूँ इन्तिज़ार नहीं किया.

बहन बाक़ी तो सब ठीक है पर जब हम चन्द्रमा पर रहने लगेंगे... तब करवा चौथ का व्रत किस को देख कर खोलेंगे...??

तुम्हारी शोहरतों पर दाद देता होगा जमाना...मेरे चाहने वाले तो मेरी बदनामियों पर फिदा हैं

किसी से हमेशा दिल से जुड़ें, मतलब से कभी नहीं....

कबीर और प्रीति वाला प्यार नही हमें तो ,तुमसे राधा कृष्ण वाला प्यार हुआ है…!!

अगर आप पर कोई मरता है, तो कोशिश करें वो जिंदा रहे....

काँटो को समझने के लिए बुद्धि काफी है,फूलों को समझने के लिए तो हृदय चाहिए !!!

कौन सीखा है सिर्फ बातों से , सबको एक हादसा जरूरी है। जॉन एलिया

ज़िन्दालाश बना देने वाली, समय की मार से अंंजान था मैं, रूह सहमी थी परिस्थितियां देखकर, जिस्म से बेजान था मैं..

घबराया साहेब बात बात पर डरता है,जब डगमग होवे कुर्सी तब धर्म को आगे करता है।पटर पटर बोले है ये सौ में नब्बे झूठ,राम नाम का लगा मुखौटा लेगा सब को लूट।चीन बढ़ाता अपना नक्शा उससे छिपता फिरता है,घबराया साहेब...

दिल में वो भीड़ है कि ज़रा भी नहीं जगह  आप आइए मगर कोई अरमाँ निकाल के ...

गलतियाँ ज़रूर माफ कर देनी चाहिए, पर चालाकियाँ नहीं……..

पता नही हम कब जान पाएंगे, लिपस्टिक कड़वी होती है या मीठी !

बड़ी कस केबांधे रक्खी है मुझेयादें तेरीबिछड़ना मुझे भी नहीइन से…..

हो सके तो समझाना मुझे, वर्ना गलत समझ कर भूल जाना..


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