ज़हर की ज़रूरत ही ना पड़ी ...
उसके हर पल बदलते बर्ताव ने ही हमें मा^र डाला
चेहरे कि सिलवटें बनने तक मयस्सर हो तेरा साथ,टूट रहीं हों जब मेरी सांसें सीने पर लगा हो तेरा हांथ..!!
चल ग़ालिब कहीं और चलते हैंयहां हर नागिन के पीछे दो नाग बैठे हैं
दुनिया में कोई गलत नहीं होता, उसके लिए वो सही है हमारे लिए हम सही है !!
बेइमानी भी तेरे इश्क़ ने……..सिखाई थी
तूं पहली चीज़ थी जो मैंने मां से छुपाई थी
मौत भी तू जल्दी आया कर गरीब के घर, कफन का पैसा भी खर्च होता है दवाइयां खरीदते-खरीदते..
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
गुरुर नही हम खुद पर नाज करते है,
जो जैसे मिलता है , हम वैसे बात करते है...!!
जो गया वो गया आगे देखो बहुत कुछ है नया।जब तक अतीत को याद करते रहोगे तब तक खुद को बर्बाद करते रहोगे।
कहना बहुत आसान है!!!!!
तुमसे मेरा प्रेम कुछ ऐसा रहेगा,दुनिया उदाहरण दे हमारा, वैसा रहेगा.
शहर में आ कर पढ़ने वाले भूल गए
किस की माँ ने कितना ज़ेवर बेचा था
बेईमानी से कमाया हुआ पैसा ,
बीमारी में चला जाता है.....!!
किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप ,लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको …
मजलूमों के हक़ के लिए लड़ने का जज़्बा और बुलंद हो,
यह साल आपके संघर्षों को और पैना करे !
मुल्क में अमन लाए,
बदलाव लाए !
आज की सुबह खास है बादल का वो टुकड़ा बारिश के साथतेरी यादों की फुहार भी लाया है मैं खुद को आज सींचूँगीमन में बसी विरह की तपिशको इन गिली बूंदो सेकुछ नयी कलियाँ कुछ नये सपनेकुछ नये से तुम...
मुझ पर तरस खाने वाले लोगहद्द से ज़्यादा बुरे लगते हैं मुझे
जहाँ मूर्ख नहीं पूजे जाते,
जहाँ अन्न की सुरक्षा की जाती है
और जहाँ परिवार में कलह नहीं होती,
वहाँ लक्ष्मी निवास करती है।
जीवन कटना था, कट गया
अच्छा कटा, बुरा कटा
यह तुम जानो
मैं तो यह समझता हूँ
कपड़ा पुराना एक फटना था, फट गया
जीवन कटना था कट गया।
गोपालदास “नीरज”
तेरे साथ लम्हें इतनी रफ्तार से गुज़रे
जैसे किसी बच्चे का दिन इतवार सा गुजरे!
पता नहीं था चाहत ऐसी भी हो जाएगी
तुम मिलोगे और आदत तुम्हारी हो जाएगी...