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देख कर परेशान हूं रिवाज दुनिया का अब जूठ बोलकर भी लोग शर्मिंदा नहीं होते।

जो मनुष्य अपनी निंदा सह लेता है, उसने मानो सारे जगत पर विजय प्राप्त कर ली।

ज़रूरत के हिसाब से अल्फ़ाज़ तलाश लाते हैं,हम तो शायर हैं,सबके दिल की जान जाते हैं।

चार दिन बाज के ना उड़ने से आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!

तड़प मेरे बेकरार दिल की कभी तो असर उन पे भी करेगी..... कभी तो वो भी जलेंगे इसमें जो आग दिल मे दहक रही है....

पानी अगर शांत हैं तो, गहराई से मज़ाक नही करते...!

जंगल की अर्थव्यवस्था चाहे कुछ भी हो , शेर कभी घास नहीं खाता...

व्यवहार में सुंदरता रखो लडकियों चेहरे पर मरने वाले घर नहीं ले जाया करते….!!

सफलता यूँ ही क़दम नहीं चूमतीथके हों पाँव फिर भी चलना पड़ता है

कोई कितना ही बड़ा क्यों न हो, अंधों की तरह उसके पीछे न चलो। स्वामी विवेकानंद

आंखें थक गई थी "इंतज़ार" में फिर भी दस्तक लगाए बैठा रहा, हलक सूख गया रोते रोते मगर वो अपनी अकड़ में ऐंठा रहा..!! विरक्ति

खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है। जीवन नाम है सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का। मुंशी प्रेमचंद

ज़िंदगी जोड़ घटाव से नहीं, प्रेम और लगाव से है।

थोड़ा परेशान हूँ पर हारा नही हूँ मैं जो कुछ भी हूँ पर आवारा नही हूँ..!!

समझदारी दिमाग में होनी चाहिए,और दिल में बचपना.

समशान सा हैं दिल मेरारोज़ न जानें कितने ख़्वाबजलकर राख होते हैं यहां..!!

उसको अपना समझने का क्या फ़ायदा, जिसके अंदर आपके लिए अपनापन ही ना हो।

अगर विश्वास खुद पर हो तो, उजड़ी हुई जिंदगी भी खिल जाती है ..!!

हादसों को जो संग ले जाना था सब ले गये,एक सबक़ ज़िंदगी का मगर हमको दे गये !

सर जिनके सलामत हैं,वो शर्मिंदा तो होंगे, याद आएगा जब उनको कि दस्तार कहाँ है? ~ अभिषेक शुक्ला


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